अध्याय 5: हमारा पर्यावरण (Our Environment)
VVI Objective Questions (className 10th Biology)
Q1. ओजोन (Ozone) के एक अणु में ऑक्सीजन के कितने परमाणु होते हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) 3 (सूत्र: O3)
Q2. ओजोन परत सूर्य से आने वाली किस हानिकारक विकिरण को पृथ्वी पर आने से रोकती है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) पराबैंगनी विकिरण (UV Rays - जिससे त्वचा कैंसर और मोतियाबिंद होता है)
Q3. ओजोन परत के क्षरण (विनाश) के लिए मुख्य रूप से कौन-सा रसायन जिम्मेदार है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) सीएफसी (क्लोरोफ्लोरोकार्बन - CFC / जो फ्रिज व एसी में प्रयुक्त होता है)
Q4. किसी पारितंत्र (Ecosystem) के सभी हरे पौधे क्या कहलाते हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) उत्पादक (Producers / स्वपोषी - जो प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन बनाते हैं)
Q5. निम्नलिखित में से कौन एक सही आहार श्रृंखला (Food Chain) का निर्माण करता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) घास → बकरी → मानव
Q6. किसी आहार श्रृंखला में एक पोषी स्तर से अगले पोषी स्तर पर कितने प्रतिशत ऊर्जा का स्थानांतरण होता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) 10% (लिंडमैन का 10% का नियम - 90% ऊर्जा जैविक क्रियाओं में खर्च हो जाती है)
Q7. किसी पारितंत्र में ऊर्जा का प्रवाह (Energy Flow) हमेशा किस दिशा में होता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) एकदिशिक (Unidirectional / उत्पादक से सर्वोच्च उपभोक्ता की ओर)
Q8. हरे पौधे सूर्य के प्रकाश की कुल प्राप्त विकिरण ऊर्जा का लगभग कितना प्रतिशत भाग खाद्य ऊर्जा में बदलते हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) 1% (सूर्य की ऊर्जा का केवल 1% भाग ही पौधे अवशोषित कर पाते हैं)
Q9. आहार श्रृंखला के प्रत्येक चरण या स्तर को क्या कहा जाता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) पोषी स्तर (Trophic Level)
Q10. मृत जीवों और उनके अपशिष्टों को सरल अकार्बनिक पदार्थों में तोड़ने वाले सूक्ष्मजीव क्या कहलाते हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) अपघटक / अपमार्जक (Decomposers - जीवाणु व कवक)
Q11. निम्नलिखित में से कौन जैव-निम्नीकरणीय (Biodegradable) कचरा है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) फलों और सब्जियों के छिलके / कागज / सूती कपड़ा
Q12. निम्नलिखित में से कौन जैव-अनिम्नीकरणीय (Non-biodegradable) अपशिष्ट है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) प्लास्टिक, डीडीटी और सीसा (जो सूक्ष्मजीवों द्वारा अपघटित नहीं होते)
Q13. आहार श्रृंखला में हानिकारक कीटनाशकों (जैसे DDT) की सांद्रता का प्रत्येक उच्च पोषी स्तर पर बढ़ते जाना क्या कहलाता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) जैव आवर्धन (Biological Magnification)
Q14. किसी आहार श्रृंखला में डीडीटी या कीटनाशकों का सर्वाधिक संकेंद्रण (जमाव) किस जीव में होगा?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) शीर्ष उपभोक्ता (जैसे मनुष्य / बाज) में
Q15. एक कृत्रिम या मानव-निर्मित पारितंत्र (Artificial Ecosystem) का सही उदाहरण कौन-सा है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) बगीचा / खेत / एक्वेरियम (मछलीघर)
Q16. कई आहार श्रृंखलाएं जब आपस में एक जाल के रूप में जुड़ जाती हैं, तो उसे क्या कहते हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) आहार जाल (Food Web)
Q17. वायुमंडल के किस भाग में ओजोन परत (Ozone Layer) मुख्य रूप से पाई जाती है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) समताप मंडल (Stratosphere)
Q18. विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) प्रतिवर्ष किस तिथि को मनाया जाता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) 5 जून (16 सितंबर को विश्व ओजोन दिवस मनाया जाता है)
Q19. UNEP का पूरा नाम क्या है, जिसने 1987 में CFC के उत्पादन को स्थिर रखने का समझौता कराया?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (United Nations Environment Programme)
Q20. किसी भी पारितंत्र के प्रथम पोषी स्तर (First Trophic Level) पर हमेशा कौन उपस्थित होते हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) स्वपोषी उत्पादक (हरे पौधे)
Q21. द्वितीय पोषी स्तर (Second Trophic Level) पर कौन-से जीव आते हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) प्राथमिक उपभोक्ता (शाकाहारी जीव - जैसे हिरण, टिड्डा)
Q22. तृतीय पोषी स्तर (Third Trophic Level) पर कौन-से जीव आते हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) छोटे मांसाहारी (द्वितीयक उपभोक्ता - जैसे मेंढक, लोमड़ी)
Q23. एक आहार श्रृंखला में सामान्यतः अधिकतम कितने पोषी स्तर हो सकते हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) 3 से 4 स्तर (क्योंकि आगे ऊर्जा बहुत कम बचती है)
Q24. किसी पारितंत्र के भौतिक (अजैव / Abiotic) घटकों के अंतर्गत कौन आते हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) तापमान, वर्षा, वायु, मिट्टी और प्रकाश
Q25. किसी पारितंत्र के जैविक (Biotic) घटक कौन होते हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) सभी सजीव (उत्पादक, उपभोक्ता एवं अपघटक)
Q26. कचरा प्रबंधन में 3R या 5R नियम में 'Reuse' का क्या अर्थ होता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) पुनः उपयोग (वस्तुओं को बार-बार इस्तेमाल करना)
Q27. कचरा प्रबंधन के लिए इस्तेमाल होने वाले '3R' का सही क्रम क्या है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) Reduce, Recycle, Reuse (कम उपयोग, पुनः चक्रण, पुनः उपयोग)
Q28. ट्रेन और सार्वजनिक स्थानों पर प्लास्टिक कप के स्थान पर 'कुल्हड़' के अत्यधिक उपयोग पर रोक क्यों लगाई गई थी?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) उपजाऊ ऊपरी मिट्टी (Topsoil) का भारी नुकसान होने के कारण (अब कागज के डिस्पोजेबल कप का उपयोग होता है)
Q29. एक मैदानी पारितंत्र (Grassland Ecosystem) की सही खाद्य श्रृंखला कौन-सी है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) घास → टिड्डा → मेंढक → सांप → चील
Q30. जलीय या तालाब पारितंत्र (Pond Ecosystem) की सही खाद्य श्रृंखला कौन-सी है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) शैवाल (पादप प्लवक) → छोटे जलीय कीट → छोटी मछली → बड़ी मछली (बगुला)
Q31. यदि किसी खाद्य श्रृंखला में से सभी मांसाहारियों को हटा दिया जाए, तो क्या होगा?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) शाकाहारियों की संख्या बहुत बढ़ जाएगी और वनस्पति नष्ट हो जाएगी
Q32. यदि किसी पारितंत्र से सभी उत्पादकों (हरे पौधों) को हटा दिया जाए, तो क्या परिणाम होगा?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) पूरा पारितंत्र नष्ट हो जाएगा (भोजन और ऑक्सीजन के अभाव में)
Q33. अपघटक (Decomposers) पर्यावरण के लिए क्यों अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) यह पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण करते हैं और पर्यावरण को साफ रखते हैं
Q34. ओजोन (O3) का निर्माण वायुमंडल में किस रासायनिक प्रक्रिया द्वारा होता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) पराबैंगनी किरणों द्वारा O2 के टूटने और मुक्त ऑक्सीजन (O) के O2 से जुड़ने पर (O2 —UV→ O + O ; O + O2 → O3)
Q35. अंटार्कटिका के ऊपर ओजोन परत की मोटाई में आई अत्यधिक कमी को क्या नाम दिया गया है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) ओजोन छिद्र (Ozone Hole - 1985 में पहली बार देखा गया)
Q36. ओजोन गैस हमारे लिए धरातल (निचले वायुमंडल) पर कैसी होती है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) एक घातक विष (Deadly Poison - ऊपरी वायुमंडल में सुरक्षा ढाल है, पर नीचे जहरीली है)
Q37. अस्पताल के जैविक कचरे और खतरनाक ठोस अपशिष्टों को उच्च तापमान पर जलाकर नष्ट करने की भट्टी को क्या कहते हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) भस्मीकरण / इनसिनरेटर (Incineration)
Q38. गीले जैविक कचरे (जैसे रसोई का छिलका, गोबर) से खाद बनाने की प्रक्रिया क्या कहलाती है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) कंपोस्टिंग (Composting)
Q39. किसी आहार श्रृंखला में यदि उत्पादक के पास 10,000 जूल ऊर्जा उपलब्ध है, तो तृतीयक उपभोक्ता (बाज) तक कितनी ऊर्जा पहुंचेगी?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) 10 जूल (10,000 → 1,000 → 100 → 10 J)
Q40. कौन-सा जीव मांसाहारी और शाकाहारी दोनों प्रकार का भोजन करता है (सर्वाहारी / Omnivore)?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) मनुष्य और कौआ
Q41. वायु प्रदूषण का सबसे अच्छा प्राकृतिक सूचक (Natural Bio-indicator) किसे माना जाता है?
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सही उत्तर: (A) लाइकेन (Lichen - SO2 प्रदूषण में नहीं उगते)
Q42. पारितंत्र (Ecosystem) शब्द का सबसे पहला प्रयोग किस वैज्ञानिक ने किया था?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) ए. जी. टांसले (A.G. Tansley - 1935)
Q43. किसी आहार श्रृंखला में ऊर्जा का पिरामिड (Pyramid of Energy) हमेशा कैसा बनता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) हमेशा सीधा (Upright - क्योंकि ऊपर जाने पर ऊर्जा घटती है)
Q44. नगरपालिकाओं द्वारा कचरा निस्तारण के लिए निचले खुले गड्ढों में कचरा भरकर ऊपर मिट्टी डालने की विधि क्या कहलाती है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) भूमि भराव क्षेत्र (Landfill / लैंडफिलिंग)
Q45. निम्नलिखित में से कौन-सा समूह केवल जैव-निम्नीकरणीय (Biodegradable) वस्तुओं का है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) घास, फूल तथा चमड़ा (या गोबर, लकड़ी, सूती कपड़ा)
महत्वपूर्ण लघु उत्तरीय प्रश्न (2 Marks)
Q1. पारितंत्र (Ecosystem) किसे कहते हैं? इसके दो मुख्य घटक कौन-से हैं?
आसान उत्तर देखें
1. परिभाषा: किसी क्षेत्र के सभी सजीव (पादप, जंतु व सूक्ष्मजीव) और उनके साथ जुड़े निर्जीव भौतिक वातावरण (ताप, प्रकाश, मिट्टी, जल) का परस्पर मिलकर बना संतुलित तंत्र पारितंत्र कहलाता है।
2. दो मुख्य घटक:
• (i) जैविक घटक (Biotic): उत्पादक, उपभोक्ता तथा अपघटक।
• (ii) अजैविक घटक (Abiotic): तापमान, प्रकाश, वायु, जल, मिट्टी और खनिज।
2. दो मुख्य घटक:
• (i) जैविक घटक (Biotic): उत्पादक, उपभोक्ता तथा अपघटक।
• (ii) अजैविक घटक (Abiotic): तापमान, प्रकाश, वायु, जल, मिट्टी और खनिज।
Q2. आहार श्रृंखला (Food Chain) किसे कहते हैं? एक स्थलीय आहार श्रृंखला का उदाहरण दीजिए।
आसान उत्तर देखें
1. परिभाषा: पारितंत्र में विभिन्न जीवों की वह श्रृंखला जिसमें एक जीव दूसरे जीव को भोजन के रूप में खाकर ऊर्जा का प्रवाह एक क्रम में करता है, उसे आहार श्रृंखला कहते हैं।
2. उदाहरण (घास का मैदान):
घास (उत्पादक) → टिड्डा (प्राथमिक उपभोक्ता) → मेंढक (द्वितीयक उपभोक्ता) → सांप (तृतीयक उपभोक्ता) → चील (शीर्ष उपभोक्ता)।
2. उदाहरण (घास का मैदान):
घास (उत्पादक) → टिड्डा (प्राथमिक उपभोक्ता) → मेंढक (द्वितीयक उपभोक्ता) → सांप (तृतीयक उपभोक्ता) → चील (शीर्ष उपभोक्ता)।
Q3. आहार जाल (Food Web) क्या है? यह पारितंत्र में क्यों आवश्यक है?
आसान उत्तर देखें
1. परिभाषा: एक पारितंत्र में कई आहार श्रृंखलाएं आपस में मिलकर एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं। इस प्रकार बने आहार श्रृंखलाओं के परस्पर जाल को आहार जाल कहते हैं।
2. महत्व: आहार जाल किसी एक जीव पर भोजन की निर्भरता को खत्म करता है (वैकल्पिक भोजन प्रदान करता है) और पारितंत्र के प्राकृतिक संतुलन व स्थिरता को बनाए रखता है।
2. महत्व: आहार जाल किसी एक जीव पर भोजन की निर्भरता को खत्म करता है (वैकल्पिक भोजन प्रदान करता है) और पारितंत्र के प्राकृतिक संतुलन व स्थिरता को बनाए रखता है।
Q4. पोषी स्तर (Trophic Level) क्या है? एक आहार श्रृंखला में कितने पोषी स्तर हो सकते हैं और क्यों?
आसान उत्तर देखें
1. परिभाषा: किसी आहार श्रृंखला के प्रत्येक चरण या स्तर को पोषी स्तर कहते हैं (जैसे प्रथम स्तर = उत्पादक, द्वितीय स्तर = शाकाहारी)।
2. स्तरों की सीमा: एक आहार श्रृंखला में सामान्यतः केवल 3 से 4 पोषी स्तर ही होते हैं। इसका कारण यह है कि प्रत्येक स्तर पर 90% ऊर्जा नष्ट हो जाती है और केवल 10% ऊर्जा ही आगे जाती है, जिससे चौथे स्तर के बाद बहुत नगण्य ऊर्जा बचती है।
2. स्तरों की सीमा: एक आहार श्रृंखला में सामान्यतः केवल 3 से 4 पोषी स्तर ही होते हैं। इसका कारण यह है कि प्रत्येक स्तर पर 90% ऊर्जा नष्ट हो जाती है और केवल 10% ऊर्जा ही आगे जाती है, जिससे चौथे स्तर के बाद बहुत नगण्य ऊर्जा बचती है।
Q5. 10% ऊर्जा प्रवाह का नियम (Lindeman's 10% Law) क्या है?
आसान उत्तर देखें
उत्तर: सन 1942 में वैज्ञानिक लिंडमैन ने यह नियम दिया। इसके अनुसार, "किसी आहार श्रृंखला में एक पोषी स्तर से अगले उच्च पोषी स्तर तक केवल 10% ऊर्जा ही कार्बनिक पदार्थों के रूप में स्थानांतरित होती है।"
शेष 90% ऊर्जा उस स्तर के जीवों द्वारा श्वसन, पाचन, वृद्धि तथा पर्यावरण में ऊष्मा के रूप में खर्च हो जाती है।
शेष 90% ऊर्जा उस स्तर के जीवों द्वारा श्वसन, पाचन, वृद्धि तथा पर्यावरण में ऊष्मा के रूप में खर्च हो जाती है।
Q6. जैव आवर्धन (Biological Magnification) किसे कहते हैं? एक उदाहरण दीजिए।
आसान उत्तर देखें
1. परिभाषा: आहार श्रृंखला के माध्यम से हानिकारक कीटनाशकों एवं रसायनों (जैसे DDT) का प्रत्येक अगले पोषी स्तर पर लगातार बढ़ते क्रम में जमा होना जैव आवर्धन कहलाता है।
• उदाहरण: फसलों पर छिड़का गया DDT पानी से शैवाल → छोटी मछली → बड़ी मछली → अंत में मनुष्य के शरीर में सर्वाधिक सांद्रता में पहुंच जाता है, क्योंकि रसायन शरीर से बाहर नहीं निकल पाते।
• उदाहरण: फसलों पर छिड़का गया DDT पानी से शैवाल → छोटी मछली → बड़ी मछली → अंत में मनुष्य के शरीर में सर्वाधिक सांद्रता में पहुंच जाता है, क्योंकि रसायन शरीर से बाहर नहीं निकल पाते।
Q7. ओजोन क्या है तथा यह किस प्रकार बनती है? समीकरण लिखिए।
आसान उत्तर देखें
1. परिचय: ओजोन ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से मिलकर बना एक अणु (O3) है, जो ऊपरी वायुमंडल में एक सुरक्षात्मक परत बनाता है।
2. निर्माण प्रक्रिया: सूर्य की उच्च ऊर्जा वाली पराबैंगनी किरणें ऑक्सीजन अणु (O2) को तोड़कर स्वतंत्र ऑक्सीजन परमाणु (O) बनाती हैं, जो फिर O2 से जुड़कर ओजोन बना लेते हैं:
• O2 —UV किरणें→ O + O
• O + O2 → O3 (ओजोन)
2. निर्माण प्रक्रिया: सूर्य की उच्च ऊर्जा वाली पराबैंगनी किरणें ऑक्सीजन अणु (O2) को तोड़कर स्वतंत्र ऑक्सीजन परमाणु (O) बनाती हैं, जो फिर O2 से जुड़कर ओजोन बना लेते हैं:
• O2 —UV किरणें→ O + O
• O + O2 → O3 (ओजोन)
Q8. ओजोन परत का हमारे जीवन में क्या महत्व है? इसके क्षय से क्या खतरे हैं?
आसान उत्तर देखें
1. महत्व: ओजोन परत सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी (UV) विकिरण को सोखकर पृथ्वी पर रहने वाले सभी जीवों के लिए एक सुरक्षा ढाल का कार्य करती है।
2. क्षय के खतरे: यदि यह परत पतली हो जाए, तो पराबैंगनी किरणें सीधे धरातल पर आएंगी जिससे मानव में त्वचा कैंसर, मोतियाबिंद, आनुवंशिक विकृति तथा फसलों और जलीय शैवालों का भारी विनाश होगा।
2. क्षय के खतरे: यदि यह परत पतली हो जाए, तो पराबैंगनी किरणें सीधे धरातल पर आएंगी जिससे मानव में त्वचा कैंसर, मोतियाबिंद, आनुवंशिक विकृति तथा फसलों और जलीय शैवालों का भारी विनाश होगा।
Q9. क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC) ओजोन परत को कैसे नुकसान पहुंचाते हैं?
आसान उत्तर देखें
उत्तर: रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर और अग्निशामक यंत्रों से निकलने वाले CFC रसायन वायुमंडल के समताप मंडल में पहुंच जाते हैं।
वहां पराबैंगनी किरणें CFC को तोड़कर सक्रिय क्लोरीन परमाणु मुक्त करती हैं। क्लोरीन का केवल एक परमाणु ओजोन (O3) के लाखों अणुओं को तोड़कर साधारण ऑक्सीजन (O2) में बदल देता है, जिससे ओजोन परत पतली होकर छिद्र बन जाता है।
वहां पराबैंगनी किरणें CFC को तोड़कर सक्रिय क्लोरीन परमाणु मुक्त करती हैं। क्लोरीन का केवल एक परमाणु ओजोन (O3) के लाखों अणुओं को तोड़कर साधारण ऑक्सीजन (O2) में बदल देता है, जिससे ओजोन परत पतली होकर छिद्र बन जाता है।
Q10. अपघटक (Decomposers) क्या हैं? पारितंत्र में इनकी क्या भूमिका है?
आसान उत्तर देखें
1. परिभाषा: वे सूक्ष्मजीव (जीवाणु और कवक) जो मृत पौधों और जंतुओं के जटिल कार्बनिक शरीरों को सड़ा-गलाकर सरल अकार्बनिक पदार्थों में बदल देते हैं, उन्हें अपघटक कहते हैं।
2. भूमिका:
• ये कचरे और मृत शरीरों को हटाकर पर्यावरण को स्वच्छ रखने वाले प्राकृतिक सफाईकर्मी हैं।
• ये मिट्टी में पोषक तत्वों (खनिजों) का पुनर्चक्रण करके उसे दोबारा पौधों के उपयोग लायक बनाते हैं।
2. भूमिका:
• ये कचरे और मृत शरीरों को हटाकर पर्यावरण को स्वच्छ रखने वाले प्राकृतिक सफाईकर्मी हैं।
• ये मिट्टी में पोषक तत्वों (खनिजों) का पुनर्चक्रण करके उसे दोबारा पौधों के उपयोग लायक बनाते हैं।
Q11. जैव-निम्नीकरणीय (Biodegradable) और जैव-अनिम्नीकरणीय (Non-biodegradable) पदार्थों में अंतर स्पष्ट करें।
आसान उत्तर देखें
1. जैव-निम्नीकरणीय पदार्थ: वे पदार्थ जो प्राकृतिक रूप से सूक्ष्मजीवों (जीवाणुओं) द्वारा आसानी से अपघटित होकर मिट्टी में मिल जाते हैं (जैसे: फलों के छिलके, कागज, गोबर, सूती कपड़ा)। ये प्रदूषण नहीं फैलाते।
2. जैव-अनिम्नीकरणीय पदार्थ: वे पदार्थ जिनका सूक्ष्मजीवों द्वारा अपघटन नहीं हो पाता और वे सैकड़ों वर्षों तक पर्यावरण में बने रहते हैं (जैसे: प्लास्टिक, पॉलिथीन, कांच, डीडीटी)। ये भारी प्रदूषण फैलाते हैं।
2. जैव-अनिम्नीकरणीय पदार्थ: वे पदार्थ जिनका सूक्ष्मजीवों द्वारा अपघटन नहीं हो पाता और वे सैकड़ों वर्षों तक पर्यावरण में बने रहते हैं (जैसे: प्लास्टिक, पॉलिथीन, कांच, डीडीटी)। ये भारी प्रदूषण फैलाते हैं।
Q12. हमारे द्वारा उत्पादित कचरे के निपटान (प्रबंधन) के दो सुरक्षित उपाय सुझाइए।
आसान उत्तर देखें
उत्तर:
1. कंपोस्टिंग (खाद बनाना): रसोई से निकलने वाले गीले जैव-निम्नीकरणीय कचरे (सब्जी के छिलके, पत्तियां) को गड्ढे में दबाकर जैविक खाद बनाई जाए।
2. पुनर्चक्रण (Recycling): प्लास्टिक, कांच, धातु और कागज जैसे सूखे कचरे को अलग छांटकर कारखानों में पुनर्चक्रण द्वारा नई उपयोगी वस्तुएं बनाई जाएं।
1. कंपोस्टिंग (खाद बनाना): रसोई से निकलने वाले गीले जैव-निम्नीकरणीय कचरे (सब्जी के छिलके, पत्तियां) को गड्ढे में दबाकर जैविक खाद बनाई जाए।
2. पुनर्चक्रण (Recycling): प्लास्टिक, कांच, धातु और कागज जैसे सूखे कचरे को अलग छांटकर कारखानों में पुनर्चक्रण द्वारा नई उपयोगी वस्तुएं बनाई जाएं।
Q13. कचरा प्रबंधन में 5R सिद्धांत (5R Principle) क्या है?
आसान उत्तर देखें
उत्तर: पर्यावरण संरक्षण के लिए 5R का अर्थ निम्नलिखित है:
• 1. Refuse (इनकार): प्लास्टिक की थैलियों और हानिकारक चीजों के इस्तेमाल से मना करना।
• 2. Reduce (कम उपयोग): संसाधनों का अपव्यय कम करना।
• 3. Reuse (पुनः उपयोग): डिब्बों, बोतलों का बार-बार इस्तेमाल करना।
• 4. Repurpose (पुनः प्रयोजन): किसी टूटी वस्तु को दूसरे काम में लगाना (जैसे टूटे कप में गमला बनाना)।
• 5. Recycle (पुनर्चक्रण): पुराने कचरे को गलाकर नई वस्तुएं बनाना।
• 1. Refuse (इनकार): प्लास्टिक की थैलियों और हानिकारक चीजों के इस्तेमाल से मना करना।
• 2. Reduce (कम उपयोग): संसाधनों का अपव्यय कम करना।
• 3. Reuse (पुनः उपयोग): डिब्बों, बोतलों का बार-बार इस्तेमाल करना।
• 4. Repurpose (पुनः प्रयोजन): किसी टूटी वस्तु को दूसरे काम में लगाना (जैसे टूटे कप में गमला बनाना)।
• 5. Recycle (पुनर्चक्रण): पुराने कचरे को गलाकर नई वस्तुएं बनाना।
Q14. एक तालाब (एक्वेरियम) में कृत्रिम सफाई की आवश्यकता क्यों होती है, जबकि प्राकृतिक झील में नहीं?
आसान उत्तर देखें
उत्तर:
• एक्वेरियम (मछलीघर) एक अपूर्ण और कृत्रिम पारितंत्र है जिसमें अपघटक (सूक्ष्मजीव) और जलीय पौधे प्राकृतिक संतुलन के अनुसार नहीं होते, जिससे मछलियों का मल और बचा खाना सड़ने लगता है और इसे बार-बार साफ करना पड़ता है।
• प्राकृतिक झील एक पूर्ण एवं स्व-नियंत्रित पारितंत्र है, जहाँ मौजूद प्राकृतिक अपघटक कचरे को स्वतः सड़ाकर जल को साफ और संतुलित बनाए रखते हैं।
• एक्वेरियम (मछलीघर) एक अपूर्ण और कृत्रिम पारितंत्र है जिसमें अपघटक (सूक्ष्मजीव) और जलीय पौधे प्राकृतिक संतुलन के अनुसार नहीं होते, जिससे मछलियों का मल और बचा खाना सड़ने लगता है और इसे बार-बार साफ करना पड़ता है।
• प्राकृतिक झील एक पूर्ण एवं स्व-नियंत्रित पारितंत्र है, जहाँ मौजूद प्राकृतिक अपघटक कचरे को स्वतः सड़ाकर जल को साफ और संतुलित बनाए रखते हैं।
Q15. यदि किसी आहार श्रृंखला से सभी शाकाहारी जीवों को हटा दिया जाए, तो क्या प्रभाव पड़ेगा?
आसान उत्तर देखें
उत्तर: शाकाहारी जीवों के हटने से दो बड़े प्रभाव होंगे:
1. मांसाहारी भूखे मर जाएंगे: द्वितीयक उपभोक्ताओं (मांसाहारियों) को भोजन नहीं मिलेगा, जिससे वे धीरे-धीरे समाप्त हो जाएंगे।
2. उत्पादकों की अत्यधिक वृद्धि: पौधों और घास को खाने वाला कोई नहीं रहेगा, जिससे वनस्पति की अनियंत्रित वृद्धि होगी और प्राकृतिक संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाएगा।
1. मांसाहारी भूखे मर जाएंगे: द्वितीयक उपभोक्ताओं (मांसाहारियों) को भोजन नहीं मिलेगा, जिससे वे धीरे-धीरे समाप्त हो जाएंगे।
2. उत्पादकों की अत्यधिक वृद्धि: पौधों और घास को खाने वाला कोई नहीं रहेगा, जिससे वनस्पति की अनियंत्रित वृद्धि होगी और प्राकृतिक संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाएगा।
Q16. ऊर्जा का प्रवाह हमेशा एकदिशिक (Unidirectional) ही क्यों होता है?
आसान उत्तर देखें
उत्तर: सूर्य से पौधों द्वारा ग्रहण की गई सौर ऊर्जा कभी वापस सूर्य में नहीं जा सकती। इसी तरह, शाकाहारी जीवों से प्राप्त ऊर्जा कभी वापस हरे पौधों को नहीं मिलती और उच्च मांसाहारियों द्वारा छोड़ी गई ऊष्मा निचले स्तरों पर नहीं लौटती।
ऊर्जा केवल उत्पादक → शाकाहारी → मांसाहारी की ओर एक ही दिशा में बहती है, इसलिए ऊर्जा का प्रवाह हमेशा एकदिशिक होता है।
ऊर्जा केवल उत्पादक → शाकाहारी → मांसाहारी की ओर एक ही दिशा में बहती है, इसलिए ऊर्जा का प्रवाह हमेशा एकदिशिक होता है।
Q17. प्लास्टिक के अत्यधिक उपयोग से पर्यावरण को क्या हानियाँ हैं?
आसान उत्तर देखें
उत्तर:
1. मृदा एवं जल प्रदूषण: प्लास्टिक अजैव-निम्नीकरणीय है, मिट्टी में दबने पर यह पानी के रिसाव को रोकता है और उपजाऊ क्षमता घटाता है।
2. नालियों का जाम होना व पशुओं की मृत्यु: थैलियां नालियों को चोक कर देती हैं और कचरे के साथ खाने पर मवेशियों की आंतों में फंसकर उनकी जान ले लेती हैं।
3. जहरीली गैसें: प्लास्टिक को जलाने पर डाइऑक्सिन जैसी जानलेवा कैंसरकारी गैसें निकलती हैं।
1. मृदा एवं जल प्रदूषण: प्लास्टिक अजैव-निम्नीकरणीय है, मिट्टी में दबने पर यह पानी के रिसाव को रोकता है और उपजाऊ क्षमता घटाता है।
2. नालियों का जाम होना व पशुओं की मृत्यु: थैलियां नालियों को चोक कर देती हैं और कचरे के साथ खाने पर मवेशियों की आंतों में फंसकर उनकी जान ले लेती हैं।
3. जहरीली गैसें: प्लास्टिक को जलाने पर डाइऑक्सिन जैसी जानलेवा कैंसरकारी गैसें निकलती हैं।
Q18. भस्मीकरण (Incineration) क्या है? यह किस प्रकार के कचरे के लिए उपयोगी है?
आसान उत्तर देखें
1. परिभाषा: ठोस खतरनाक अपशिष्टों को एक विशेष बंद भट्टी (इंसिनरेटर) में 1000°C से अधिक उच्च तापमान पर ऑक्सीजन की उपस्थिति में जलाकर राख में बदलने की विधि को भस्मीकरण कहते हैं।
2. उपयोगिता: यह अस्पतालों के बायोमेडिकल कचरे (संक्रमित सुई, पट्टियां, दवाइयां, मानव अंग) को नष्ट करने का सबसे सुरक्षित तरीका है ताकि कोई संक्रमण न फैले।
2. उपयोगिता: यह अस्पतालों के बायोमेडिकल कचरे (संक्रमित सुई, पट्टियां, दवाइयां, मानव अंग) को नष्ट करने का सबसे सुरक्षित तरीका है ताकि कोई संक्रमण न फैले।
Q19. UNEP द्वारा 1987 में ओजोन परत के संरक्षण हेतु क्या ऐतिहासिक कदम उठाया गया?
आसान उत्तर देखें
उत्तर: 1987 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की अगुवाई में मॉन्ट्रियल (कनाडा) में एक अंतरराष्ट्रीय संधि हुई, जिसे मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल कहा जाता है।
इसके तहत दुनिया के सभी देशों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC) के वैश्विक उत्पादन को 1986 के स्तर पर ही स्थिर (फ्रीज) रखा जाएगा और धीरे-धीरे इसके उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाएगा।
इसके तहत दुनिया के सभी देशों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC) के वैश्विक उत्पादन को 1986 के स्तर पर ही स्थिर (फ्रीज) रखा जाएगा और धीरे-धीरे इसके उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाएगा।
Q20. हमारे द्वारा खाए जाने वाले शाकाहारी और मांसाहारी भोजन में से किसमें कीटनाशकों की मात्रा अधिक होगी और क्यों?
आसान उत्तर देखें
उत्तर: मांसाहारी भोजन में कीटनाशकों की मात्रा बहुत अधिक होगी।
• कारण: जैव आवर्धन (Biological Magnification) के नियम के अनुसार, जब कोई मांसाहारी जीव कई शाकाहारी जीवों को खाता है, तो उन सभी शाकाहारियों के शरीर में जमा हुआ कीटनाशक उस अकेले मांसाहारी के शरीर में संचित हो जाता है। अतः उच्च पोषी स्तर होने के कारण मांसाहार में रसायनों की सांद्रता कई गुना अधिक होती है।
• कारण: जैव आवर्धन (Biological Magnification) के नियम के अनुसार, जब कोई मांसाहारी जीव कई शाकाहारी जीवों को खाता है, तो उन सभी शाकाहारियों के शरीर में जमा हुआ कीटनाशक उस अकेले मांसाहारी के शरीर में संचित हो जाता है। अतः उच्च पोषी स्तर होने के कारण मांसाहार में रसायनों की सांद्रता कई गुना अधिक होती है।
महत्वपूर्ण दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 Marks)
Q1. पारितंत्र (Ecosystem) क्या है? इसके जैविक एवं अजैविक घटकों का विस्तारपूर्वक वर्णन करें।
आसान उत्तर देखें
1. पारितंत्र की परिभाषा:
किसी निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में रहने वाले सभी सजीव घटक (पौधे, जंतु, सूक्ष्मजीव) और उनके चारों ओर उपस्थित निर्जीव भौतिक वातावरण आपस में मिलकर जो संतुलित व्यवस्था बनाते हैं, उसे पारितंत्र कहते हैं।
2. पारितंत्र के मुख्य दो घटक:
• (A) अजैविक घटक (Abiotic Components):
- जलवायुवीय कारक: तापमान, प्रकाश, वर्षा, आर्द्रता और वायु।
- अकार्बनिक पदार्थ: जल, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन और विभिन्न खनिज लवण।
- कार्बनिक पदार्थ: प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और ह्यूमस (सड़ी-गली पत्तियां)।
• (B) जैविक घटक (Biotic Components):
- 1. उत्पादक (Producers): सभी हरे पौधे और नील-हरित शैवाल, जो सौर ऊर्जा और क्लोरोफिल की मदद से प्रकाश संश्लेषण द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाते हैं।
- 2. उपभोक्ता (Consumers): वे जीव जो भोजन के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उत्पादकों पर निर्भर रहते हैं। इन्हें शाकाहारी (प्राथमिक), मांसाहारी (द्वितीयक व तृतीयक) और सर्वाहारी में बांटा जाता है।
- 3. अपघटक (Decomposers): जीवाणु और कवक जैसे सूक्ष्मजीव, जो मृत जीवों के शरीरों को सड़ा-गलाकर जटिल तत्वों को सरल खनिजों में बदलकर मिट्टी में लौटा देते हैं।
किसी निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में रहने वाले सभी सजीव घटक (पौधे, जंतु, सूक्ष्मजीव) और उनके चारों ओर उपस्थित निर्जीव भौतिक वातावरण आपस में मिलकर जो संतुलित व्यवस्था बनाते हैं, उसे पारितंत्र कहते हैं।
2. पारितंत्र के मुख्य दो घटक:
• (A) अजैविक घटक (Abiotic Components):
- जलवायुवीय कारक: तापमान, प्रकाश, वर्षा, आर्द्रता और वायु।
- अकार्बनिक पदार्थ: जल, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन और विभिन्न खनिज लवण।
- कार्बनिक पदार्थ: प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और ह्यूमस (सड़ी-गली पत्तियां)।
• (B) जैविक घटक (Biotic Components):
- 1. उत्पादक (Producers): सभी हरे पौधे और नील-हरित शैवाल, जो सौर ऊर्जा और क्लोरोफिल की मदद से प्रकाश संश्लेषण द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाते हैं।
- 2. उपभोक्ता (Consumers): वे जीव जो भोजन के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उत्पादकों पर निर्भर रहते हैं। इन्हें शाकाहारी (प्राथमिक), मांसाहारी (द्वितीयक व तृतीयक) और सर्वाहारी में बांटा जाता है।
- 3. अपघटक (Decomposers): जीवाणु और कवक जैसे सूक्ष्मजीव, जो मृत जीवों के शरीरों को सड़ा-गलाकर जटिल तत्वों को सरल खनिजों में बदलकर मिट्टी में लौटा देते हैं।
Q2. आहार श्रृंखला (Food Chain) और आहार जाल (Food Web) क्या हैं? दोनों की सचित्र व्याख्या करें और इनके मुख्य अंतर स्पष्ट करें।
आसान उत्तर देखें
1. आहार श्रृंखला (Food Chain):
पारितंत्र में जीवों का वह सरल व सीधा क्रम जिसमें एक जीव दूसरे जीव को खाकर पोषक तत्वों और ऊर्जा का एकदिशिक प्रवाह करता है, उसे आहार श्रृंखला कहते हैं।
• उदाहरण (घास का मैदान): घास → टिड्डा → मेंढक → सांप → चील।
2. आहार जाल (Food Web):
प्रकृति में कोई भी जीव केवल एक ही प्रकार के भोजन पर निर्भर नहीं रहता। जब कई आहार श्रृंखलाएं आपस में एक-दूसरे से जुड़कर एक जटिल जाल का रूप ले लेती हैं, तो उसे आहार जाल कहते हैं।
• महत्व: यह पारितंत्र में जीवों को वैकल्पिक भोजन के स्रोत देकर पारिस्थितिक संतुलन को स्थिरता प्रदान करता है।
3. दोनों में मुख्य अंतर:
• आहार श्रृंखला सरल और एकल सीधी रेखा में होती है, जबकि आहार जाल कई श्रृंखलाओं का जटिल संजाल है।
• आहार श्रृंखला में किसी एक जीव के लुप्त होने पर पूरी कड़ी टूट जाती है, जबकि आहार जाल में वैकल्पिक भोजन उपलब्ध होने से तंत्र सुरक्षित रहता है।
पारितंत्र में जीवों का वह सरल व सीधा क्रम जिसमें एक जीव दूसरे जीव को खाकर पोषक तत्वों और ऊर्जा का एकदिशिक प्रवाह करता है, उसे आहार श्रृंखला कहते हैं।
• उदाहरण (घास का मैदान): घास → टिड्डा → मेंढक → सांप → चील।
2. आहार जाल (Food Web):
प्रकृति में कोई भी जीव केवल एक ही प्रकार के भोजन पर निर्भर नहीं रहता। जब कई आहार श्रृंखलाएं आपस में एक-दूसरे से जुड़कर एक जटिल जाल का रूप ले लेती हैं, तो उसे आहार जाल कहते हैं।
• महत्व: यह पारितंत्र में जीवों को वैकल्पिक भोजन के स्रोत देकर पारिस्थितिक संतुलन को स्थिरता प्रदान करता है।
3. दोनों में मुख्य अंतर:
• आहार श्रृंखला सरल और एकल सीधी रेखा में होती है, जबकि आहार जाल कई श्रृंखलाओं का जटिल संजाल है।
• आहार श्रृंखला में किसी एक जीव के लुप्त होने पर पूरी कड़ी टूट जाती है, जबकि आहार जाल में वैकल्पिक भोजन उपलब्ध होने से तंत्र सुरक्षित रहता है।
Q3. पारितंत्र में ऊर्जा के प्रवाह (Flow of Energy) का विस्तार से वर्णन करें। 10% ऊर्जा नियम को एक उदाहरण और ऊर्जा पिरामिड की सहायता से समझाइए।
आसान उत्तर देखें
1. ऊर्जा प्रवाह की मूल विशेषताएं:
• सूर्य ही पृथ्वी पर ऊर्जा का अंतिम और सबसे बड़ा स्रोत है।
• हरे पौधे (उत्पादक) पत्तियों पर पड़ने वाली कुल सौर विकिरण ऊर्जा का केवल 1% भाग खाद्य ऊर्जा (रासायनिक ऊर्जा) में बदल पाते हैं।
• पारितंत्र में ऊर्जा का प्रवाह हमेशा एकदिशिक (Unidirectional) होता है (उत्पादक → प्राथमिक उपभोक्ता → द्वितीयक उपभोक्ता → शीर्ष मांसाहारी)।
2. लिंडमैन का 10% नियम (10% Law):
जब ऊर्जा एक पोषी स्तर से अगले पोषी स्तर में जाती है, तो केवल 10% ऊर्जा ही नए जैविक भार के रूप में संचित होती है। शेष 90% ऊर्जा श्वसन, पाचन, वृद्धि और ऊष्मा के रूप में पर्यावरण में लुप्त हो जाती है।
• संख्यात्मक उदाहरण:
यदि हरे पौधों (उत्पादक) के पास 20,000 J ऊर्जा है, तो:
- हिरण (प्राथमिक उपभोक्ता) को मिलेगी = 20,000 का 10% = 2,000 J
- भेड़िया (द्वितीयक उपभोक्ता) को मिलेगी = 2,000 का 10% = 200 J
- शेर (शीर्ष उपभोक्ता) को पहुंचेगी = 200 का 10% = 20 J
यही कारण है कि 3 या 4 स्तरों के बाद इतनी कम ऊर्जा बचती है कि आगे नया पोषी स्तर संभव नहीं हो पाता और ऊर्जा का पिरामिड हमेशा सीधा (Upright) बनता है।
• सूर्य ही पृथ्वी पर ऊर्जा का अंतिम और सबसे बड़ा स्रोत है।
• हरे पौधे (उत्पादक) पत्तियों पर पड़ने वाली कुल सौर विकिरण ऊर्जा का केवल 1% भाग खाद्य ऊर्जा (रासायनिक ऊर्जा) में बदल पाते हैं।
• पारितंत्र में ऊर्जा का प्रवाह हमेशा एकदिशिक (Unidirectional) होता है (उत्पादक → प्राथमिक उपभोक्ता → द्वितीयक उपभोक्ता → शीर्ष मांसाहारी)।
2. लिंडमैन का 10% नियम (10% Law):
जब ऊर्जा एक पोषी स्तर से अगले पोषी स्तर में जाती है, तो केवल 10% ऊर्जा ही नए जैविक भार के रूप में संचित होती है। शेष 90% ऊर्जा श्वसन, पाचन, वृद्धि और ऊष्मा के रूप में पर्यावरण में लुप्त हो जाती है।
• संख्यात्मक उदाहरण:
यदि हरे पौधों (उत्पादक) के पास 20,000 J ऊर्जा है, तो:
- हिरण (प्राथमिक उपभोक्ता) को मिलेगी = 20,000 का 10% = 2,000 J
- भेड़िया (द्वितीयक उपभोक्ता) को मिलेगी = 2,000 का 10% = 200 J
- शेर (शीर्ष उपभोक्ता) को पहुंचेगी = 200 का 10% = 20 J
यही कारण है कि 3 या 4 स्तरों के बाद इतनी कम ऊर्जा बचती है कि आगे नया पोषी स्तर संभव नहीं हो पाता और ऊर्जा का पिरामिड हमेशा सीधा (Upright) बनता है।
Q4. ओजोन परत (Ozone Layer) क्या है? यह हमारे लिए क्यों आवश्यक है? इसके क्षय (Depletion) के मुख्य कारण, दुष्प्रभाव और संरक्षण के उपाय विस्तार से लिखिए।
आसान उत्तर देखें
1. ओजोन परत का स्वरूप व महत्व:
वायुमंडल के समताप मंडल (Stratosphere) में ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से मिलकर बनी ओजोन गैस (O3) की एक सुरक्षात्मक परत होती है। यह सूर्य की घातक पराबैंगनी किरणों (UV Rays) को सोखकर पृथ्वी के सभी जीवों के लिए रक्षा कवच का कार्य करती है।
2. क्षय के मुख्य कारण:
मानव द्वारा निर्मित क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs), हैलोन्स और हाइड्रोक्लोरोफ्लोरोकार्बन जैसे रसायनों का फ्रिज, एसी और स्प्रे कैन में अत्यधिक उपयोग। जब CFC समताप मंडल में पहुंचता है, तो इसकी मुक्त क्लोरीन ओजोन के अणुओं को लगातार तोड़ती रहती है।
3. ओजोन क्षय के दुष्प्रभाव:
• मनुष्यों में त्वचा कैंसर, आंखों का मोतियाबिंद और रोग प्रतिरोधक क्षमता का कमजोर होना।
• फसलों की उत्पादकता में भारी गिरावट और पत्तियों का जलना।
• समुद्र में पादप प्लवकों (Phytoplankton) का विनाश, जिससे जलीय खाद्य श्रृंखला पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी।
4. संरक्षण के उपाय:
• 1987 के मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (UNEP) के तहत CFC के उत्पादन पर वैश्विक रोक और उसकी जगह पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों (HFCs) का उपयोग।
• ओजोन-विनाशक रसायनों के उत्सर्जन की नियमित निगरानी।
वायुमंडल के समताप मंडल (Stratosphere) में ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से मिलकर बनी ओजोन गैस (O3) की एक सुरक्षात्मक परत होती है। यह सूर्य की घातक पराबैंगनी किरणों (UV Rays) को सोखकर पृथ्वी के सभी जीवों के लिए रक्षा कवच का कार्य करती है।
2. क्षय के मुख्य कारण:
मानव द्वारा निर्मित क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs), हैलोन्स और हाइड्रोक्लोरोफ्लोरोकार्बन जैसे रसायनों का फ्रिज, एसी और स्प्रे कैन में अत्यधिक उपयोग। जब CFC समताप मंडल में पहुंचता है, तो इसकी मुक्त क्लोरीन ओजोन के अणुओं को लगातार तोड़ती रहती है।
3. ओजोन क्षय के दुष्प्रभाव:
• मनुष्यों में त्वचा कैंसर, आंखों का मोतियाबिंद और रोग प्रतिरोधक क्षमता का कमजोर होना।
• फसलों की उत्पादकता में भारी गिरावट और पत्तियों का जलना।
• समुद्र में पादप प्लवकों (Phytoplankton) का विनाश, जिससे जलीय खाद्य श्रृंखला पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी।
4. संरक्षण के उपाय:
• 1987 के मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (UNEP) के तहत CFC के उत्पादन पर वैश्विक रोक और उसकी जगह पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों (HFCs) का उपयोग।
• ओजोन-विनाशक रसायनों के उत्सर्जन की नियमित निगरानी।
Q5. कचरा प्रबंधन (Waste Management) से आप क्या समझते हैं? घरेलू और औद्योगिक कचरे के सुरक्षित निपटान की प्रमुख विधियों का विस्तारपूर्वक वर्णन करें।
आसान उत्तर देखें
1. कचरा प्रबंधन की परिभाषा:
हमारे दैनिक जीवन में उत्पन्न होने वाले ठोस एवं तरल अपशिष्टों को पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाए बिना सही तरीके से एकत्र करना, छांटना, पुनः उपयोग करना और सुरक्षित नष्ट करना कचरा प्रबंधन कहलाता है।
2. सुरक्षित निपटान की प्रमुख 5 विधियाँ:
• (i) स्रोत पर कचरे का पृथक्करण (Segregation):
कचरे को दो अलग डिब्बों में बांटना — गीला कचरा (हरा डिब्बा / जैव-निम्नीकरणीय) जैसे छिलके, बासी खाना और सूखा कचरा (नीला डिब्बा / अजैव-निम्नीकरणीय) जैसे प्लास्टिक, कागज, कांच और धातु।
• (ii) कंपोस्टिंग एवं वर्मीकंपोस्टिंग (खाद निर्माण):
गीले जैविक कचरे और गोबर को गड्ढे में दबाकर केंचुओं और जीवाणुओं की मदद से उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद तैयार की जाती है।
• (iii) पुनर्चक्रण (Recycling):
प्लास्टिक, पुराने अखबार, कांच और लोहे के कबाड़ को पिघलाकर फैक्ट्रियों में दोबारा नई उपयोगी वस्तुएं बनाई जाती हैं, जिससे प्राकृतिक संसाधनों की बचत होती है।
• (iv) भस्मीकरण (Incineration):
अस्पतालों के खतरनाक बायोमेडिकल कचरे (संक्रमित सुई, दवाइयां, पट्टियां) को विशेष भट्टी में 1000°C से अधिक उच्च तापमान पर जलाकर सुरक्षित राख में बदला जाता है।
• (v) सुरक्षित भूमि भराव (Sanitary Landfill):
शहरी गैर-पुनर्चक्रण योग्य सूखे कचरे को शहर से दूर निचले गड्ढों में दबाकर ऊपर मिट्टी की मोटी परत बिछा दी जाती है।
हमारे दैनिक जीवन में उत्पन्न होने वाले ठोस एवं तरल अपशिष्टों को पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाए बिना सही तरीके से एकत्र करना, छांटना, पुनः उपयोग करना और सुरक्षित नष्ट करना कचरा प्रबंधन कहलाता है।
2. सुरक्षित निपटान की प्रमुख 5 विधियाँ:
• (i) स्रोत पर कचरे का पृथक्करण (Segregation):
कचरे को दो अलग डिब्बों में बांटना — गीला कचरा (हरा डिब्बा / जैव-निम्नीकरणीय) जैसे छिलके, बासी खाना और सूखा कचरा (नीला डिब्बा / अजैव-निम्नीकरणीय) जैसे प्लास्टिक, कागज, कांच और धातु।
• (ii) कंपोस्टिंग एवं वर्मीकंपोस्टिंग (खाद निर्माण):
गीले जैविक कचरे और गोबर को गड्ढे में दबाकर केंचुओं और जीवाणुओं की मदद से उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद तैयार की जाती है।
• (iii) पुनर्चक्रण (Recycling):
प्लास्टिक, पुराने अखबार, कांच और लोहे के कबाड़ को पिघलाकर फैक्ट्रियों में दोबारा नई उपयोगी वस्तुएं बनाई जाती हैं, जिससे प्राकृतिक संसाधनों की बचत होती है।
• (iv) भस्मीकरण (Incineration):
अस्पतालों के खतरनाक बायोमेडिकल कचरे (संक्रमित सुई, दवाइयां, पट्टियां) को विशेष भट्टी में 1000°C से अधिक उच्च तापमान पर जलाकर सुरक्षित राख में बदला जाता है।
• (v) सुरक्षित भूमि भराव (Sanitary Landfill):
शहरी गैर-पुनर्चक्रण योग्य सूखे कचरे को शहर से दूर निचले गड्ढों में दबाकर ऊपर मिट्टी की मोटी परत बिछा दी जाती है।
