अध्याय 6: प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन (Management of Natural Resources)
VVI Objective Questions (className 10th Biology)
Q1. चिपको आंदोलन (Chipko Movement) का मुख्य उद्देश्य किसका संरक्षण करना था?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) वन / वृक्षों का (उत्तराखंड के गढ़वाल के रेनी गाँव से 1970 के दशक में शुरू)
Q2. चिपको आंदोलन का नेतृत्व मुख्य रूप से किस पर्यावरणविद् ने किया था?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) सुंदरलाल बहुगुणा (Sundarlal Bahuguna)
Q3. राजस्थान के खेजड़ली गाँव में खेजड़ी वृक्षों की रक्षा के लिए 1731 में अपने प्राणों का बलिदान किसने दिया था?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) अमृता देवी विश्नोई (363 लोगों के साथ - इनकी स्मृति में राष्ट्रीय वन्यजीव संरक्षण पुरस्कार दिया जाता है)
Q4. गंगा सफाई योजना (Ganga Action Plan - GAP) की शुरुआत किस वर्ष हुई थी?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) 1985 में (गंगा जल की गुणवत्ता सुधारने के लिए)
Q5. जल में किस जीवाणु (Bacteria) की उपस्थिति यह दर्शाती है कि जल मानव मल से संदूषित (प्रदूषित) है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) कोलीफॉर्म जीवाणु (Coliform bacteria - यह मानव आंत में पाया जाने वाला जीवाणु है)
Q6. 'टिहरी बांध' (Tehri Dam) किस नदी पर बनाया गया है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) भागीरथी / गंगा नदी (उत्तराखंड)
Q7. 'सरदार सरोवर बांध' (Sardar Sarovar Dam) किस नदी पर स्थित है, जिसके विरोध में नर्मदा बचाओ आंदोलन हुआ?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) नर्मदा नदी (गुजरात - मेधा पाटकर के नेतृत्व में आंदोलन)
Q8. हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में सदियों पुरानी स्थानीय सिंचाई की नहर प्रणाली को क्या कहा जाता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) कुल्ह (Kulh)
Q9. बिहार में वर्षा जल संचयन और सिंचाई की पारंपरिक प्रणाली का नाम क्या है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) आहर और पाइन (Ahar and Pyne)
Q10. राजस्थान में वर्षा जल संचयन (Water Harvesting) की पारंपरिक संरचना कौन-सी है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) खादिन एवं टांका (Khadin & Tanka)
Q11. पर्यावरण संरक्षण के लिए '3R' सिद्धांत में कौन-कौन से घटक शामिल हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) Reduce (कम उपयोग), Recycle (पुनर्चक्रण), Reuse (पुनः उपयोग)
Q12. निम्नलिखित में से कौन अनवीकरणीय (समाप्य / Non-renewable) ऊर्जा स्रोत है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) कोयला एवं पेट्रोलियम (जीवाश्म ईंधन)
Q13. निम्नलिखित में से किसे 'जैव विविधता का तप्त स्थल' (Hotspot of Biodiversity) कहा जाता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) वन (जंगल / Forests - क्योंकि यहाँ असंख्य प्रजातियाँ पाई जाती हैं)
Q14. 1972 में पश्चिम बंगाल के मिदनापुर जिले में स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से किस वन का पुनरुद्धार (पुनर्जीवन) किया गया था?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) अराबाड़ी के साल (Sal) वन (ए.के. बनर्जी द्वारा)
Q15. भारत के 'जल पुरुष' (Waterman of India) के नाम से कौन प्रसिद्ध हैं, जिन्होंने राजस्थान में जल संरक्षण के लिए 'जोहड़' बनाए?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) डॉ. राजेंद्र सिंह (Rajendra Singh)
Q16. प्राकृतिक संसाधनों के संपोषित (टिकाऊ) प्रबंधन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधनों को सुरक्षित रखना
Q17. वनों के संरक्षण एवं उपयोग से जुड़े 'दावेदार' (Stakeholders) कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) 4 प्रकार के (स्थानीय निवासी, वन विभाग, उद्योगपति और प्रकृति प्रेमी)
Q18. 'नर्मदा बचाओ आंदोलन' (Narmada Bachao Andolan) का नेतृत्व मुख्य रूप से किसने किया था?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) मेधा पाटकर (Medha Patkar)
Q19. बड़े बांधों के निर्माण से जुड़ी प्रमुख 'पर्यावरणीय समस्या' क्या है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) विशाल वन क्षेत्रों का जलमग्न होना और जैव विविधता का विनाश
Q20. बड़े बांधों के निर्माण से उत्पन्न होने वाली प्रमुख 'सामाजिक समस्या' कौन-सी है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) बड़ी संख्या में किसानों और आदिवासियों का विस्थापन व उचित पुनर्वास न मिलना
Q21. वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) भूजल स्तर (Groundwater Level) का पुनर्भरण और जल संरक्षण
Q22. भौम जल (भूजल / Underground Water) का सबसे बड़ा लाभ क्या है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) यह वाष्प बनकर नहीं उड़ता और मच्छरों के प्रजनन से मुक्त रहता है
Q23. तमिलनाडु में वर्षा जल संग्रहण की पारंपरिक व्यवस्था को क्या कहा जाता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) एरिस (Eris / टैंक प्रणाली)
Q24. केरल में वर्षा जल संचयन के लिए उपयोग की जाने वाली पारंपरिक संरचना कौन-सी है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) सुरंगम (Surangam)
Q25. कर्नाटक में जल संचयन की पारंपरिक प्रणाली को किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) कट्टा (Katta)
Q26. महाराष्ट्र में पारंपरिक जल संचयन और सिंचाई प्रणाली को क्या कहा जाता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) बंधारस एवं ताल (Bandharas and Tals)
Q27. जीवाश्म ईंधन (कोयला और पेट्रोलियम) के अपूर्ण दहन से कौन-सी अत्यंत विषैली गैस उत्पन्न होती है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) कार्बन मोनोऑक्साइड (CO)
Q28. जीवाश्म ईंधनों के अत्यधिक जलने से वायुमंडल में CO2 की मात्रा बढ़ने से कौन-सी वैश्विक समस्या हो रही है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) ग्लोबल वार्मिंग (ग्रीनहाउस प्रभाव / भूमंडलीय तापन)
Q29. 'ग्रीनहाउस गैस' (Greenhouse Gas) का मुख्य घटक निम्नलिखित में से कौन है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) एवं मीथेन (CH4)
Q30. अम्लीय वर्षा (Acid Rain) के लिए मुख्य रूप से कौन-सी गैसें उत्तरदायी होती हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NO2)
Q31. पीने के शुद्ध और सुरक्षित जल का pH मान कितना होना चाहिए?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) लगभग 7 (उदासीन / 6.5 से 8.5)
Q32. पर्यावरण संरक्षण के 5R में 'Refuse' का क्या अर्थ होता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) ऐसी वस्तुओं को लेने से मना (इनकार) करना जो पर्यावरण को नुकसान पहुँचाती हैं
Q33. पर्यावरण संरक्षण के 5R में 'Repurpose' (पुनः प्रयोजन) का क्या तात्पर्य है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) किसी वस्तु का मूल उद्देश्य समाप्त होने पर उसे किसी अन्य उपयोगी काम में लगाना
Q34. भारत सरकार द्वारा वन्यजीव संरक्षण के लिए दिया जाने वाला 'अमृता देवी विश्नोई राष्ट्रीय पुरस्कार' किस क्षेत्र में दिया जाता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) वन्यजीव संरक्षण एवं वनों की रक्षा के लिए अदम्य साहस दिखाने पर
Q35. जैव विविधता (Biodiversity) की विविधता का आधार किसे माना जाता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) किसी क्षेत्र में पाई जाने वाली विभिन्न प्रजातियों की संख्या (पेड़-पौधे, जंतु, सूक्ष्मजीव)
Q36. चिपको आंदोलन की शुरुआत उत्तराखंड के किस जिले के रेनी गाँव से हुई थी?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) चमोली (गढ़वाल)
Q37. वन कटाव (Deforestation) का सबसे गंभीर दुष्परिणाम क्या होता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) मृदा अपरदन (मिट्टी का बहना) और भूजल स्तर में भारी गिरावट
Q38. जल संभर प्रबंधन (Watershed Management) का मुख्य जोर किस पर होता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) भूमि एवं जल के प्राथमिक स्रोतों का वैज्ञानिक विकास ताकि जैव-मात्रा का उत्पादन बढ़े
Q39. सीएनजी (CNG) का मुख्य घटक कौन-सी गैस होती है जो कम प्रदूषण फैलाती है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) मीथेन (Methane - CH4)
Q40. एलपीजी (LPG / रसोई गैस) का मुख्य गैसीय घटक क्या है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) ब्यूटेन (Butane - C4H10)
Q41. गंगा नदी भारत के किस राज्य के गंगोत्री हिमनद से निकलकर बंगाल की खाड़ी में गिरती है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) उत्तराखंड से निकलकर (कुल लंबाई लगभग 2500 किमी)
Q42. नमामि गंगे कार्यक्रम (Namami Gange Programme) को केंद्र सरकार द्वारा किस वर्ष मंजूरी दी गई थी?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) जून 2014 में (गंगा के प्रदूषण को कम करने और संरक्षण हेतु)
Q43. वनों पर प्रत्यक्ष रूप से निर्भर रहने वाले स्थानीय लोग अपनी दैनिक आवश्यकताओं के लिए किस पर निर्भर होते हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) जलावन की लकड़ी, छोटी इमारती लकड़ी, फल, चारा और औषधियां
Q44. ऊर्जा के पारंपरिक और पर्यावरण-अनुकूल नवीकरणीय स्रोत कौन-से हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा एवं जल विद्युत
Q45. राजस्थान में जल संचयन के लिए बनाए जाने वाले 'खादिन' (Khadin) का मुख्य ढांचा किस प्रकार का होता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) ढलान वाली कृषि भूमि के निचले भाग पर मिट्टी का लंबा पक्का बांध (पाल) बनाना
महत्वपूर्ण लघु उत्तरीय प्रश्न (2 Marks)
Q1. प्राकृतिक संसाधनों के संपोषित (टिकाऊ) प्रबंधन से आप क्या समझते हैं?
आसान उत्तर देखें
उत्तर: प्राकृतिक संसाधनों (जैसे जल, वन, कोयला, पेट्रोलियम) का इस प्रकार विवेकपूर्ण और नियंत्रित उपयोग करना जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना हमारी वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति भी हो सके और भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी संसाधन सुरक्षित रहें, संपोषित प्रबंधन कहलाता है।
Q2. चिपको आंदोलन क्या था? यह कब और कहाँ शुरू हुआ था?
आसान उत्तर देखें
उत्तर: 1970 के दशक में उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय के रेनी गाँव (चमोली जिला) में वनों की कटाई रोकने के लिए यह आंदोलन शुरू हुआ था।
जब ठेकेदार के कुल्हाड़ीधारी मजदूर पेड़ काटने आए, तो गाँव की महिलाएं पेड़ों से चिपककर (गले लगाकर) खड़ी हो गईं और उन्हें कटने से बचा लिया। इसे ही चिपको आंदोलन कहा गया, जिसका नेतृत्व आगे चलकर सुंदरलाल बहुगुणा ने किया।
जब ठेकेदार के कुल्हाड़ीधारी मजदूर पेड़ काटने आए, तो गाँव की महिलाएं पेड़ों से चिपककर (गले लगाकर) खड़ी हो गईं और उन्हें कटने से बचा लिया। इसे ही चिपको आंदोलन कहा गया, जिसका नेतृत्व आगे चलकर सुंदरलाल बहुगुणा ने किया।
Q3. वनों के संरक्षण से जुड़े चार प्रमुख दावेदार (Stakeholders) कौन-कौन से हैं?
आसान उत्तर देखें
उत्तर: वनों पर निर्भर चार प्रमुख दावेदार निम्नलिखित हैं:
1. स्थानीय निवासी: जो वनों के अंदर या पास रहते हैं और अपनी दैनिक जरूरतों (जलावन, चारा, फल) के लिए वन पर निर्भर हैं।
2. सरकारी वन विभाग: जो वनों की भूमि का मालिक है और संसाधनों का नियंत्रण करता है।
3. उद्योगपति: जो लकड़ी, कागज, बीड़ी पत्ता जैसी सामग्री के लिए वनों का उपयोग करते हैं।
4. प्रकृति एवं वन्यजीव प्रेमी: जो वनों को उनके मूल प्राकृतिक रूप में संरक्षित देखना चाहते हैं।
1. स्थानीय निवासी: जो वनों के अंदर या पास रहते हैं और अपनी दैनिक जरूरतों (जलावन, चारा, फल) के लिए वन पर निर्भर हैं।
2. सरकारी वन विभाग: जो वनों की भूमि का मालिक है और संसाधनों का नियंत्रण करता है।
3. उद्योगपति: जो लकड़ी, कागज, बीड़ी पत्ता जैसी सामग्री के लिए वनों का उपयोग करते हैं।
4. प्रकृति एवं वन्यजीव प्रेमी: जो वनों को उनके मूल प्राकृतिक रूप में संरक्षित देखना चाहते हैं।
Q4. गंगा सफाई योजना (Ganga Action Plan) क्यों शुरू की गई थी? इसके दो मुख्य कारण लिखिए।
आसान उत्तर देखें
उत्तर: सन 1985 में गंगा नदी के तेजी से गिरते जल स्तर और अत्यधिक प्रदूषण को सुधारने के लिए यह योजना शुरू की गई थी।
दो मुख्य कारण:
• शहरों का अनुपचारित (बिना साफ किया हुआ) घरेलू सीवेज और कचरा सीधे गंगा में बहाना।
• कारखानों का विषैला रासायनिक अपशिष्ट और मानव शवों/राख को नदी में प्रवाहित करना।
दो मुख्य कारण:
• शहरों का अनुपचारित (बिना साफ किया हुआ) घरेलू सीवेज और कचरा सीधे गंगा में बहाना।
• कारखानों का विषैला रासायनिक अपशिष्ट और मानव शवों/राख को नदी में प्रवाहित करना।
Q5. जल में कोलीफॉर्म जीवाणु (Coliform Bacteria) की उपस्थिति क्या दर्शाती है?
आसान उत्तर देखें
उत्तर: कोलीफॉर्म जीवाणुओं का एक ऐसा समूह है जो मानव की आंतों में पाया जाता है।
यदि नदी या पीने के पानी में कोलीफॉर्म पाया जाता है, तो यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि जल मानव मल-मूत्र और सीवेज से संदूषित (प्रदूषित) हो चुका है और ऐसा पानी पीने से हैजा, टाइफाइड और पीलिया जैसी घातक बीमारियां हो सकती हैं।
यदि नदी या पीने के पानी में कोलीफॉर्म पाया जाता है, तो यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि जल मानव मल-मूत्र और सीवेज से संदूषित (प्रदूषित) हो चुका है और ऐसा पानी पीने से हैजा, टाइफाइड और पीलिया जैसी घातक बीमारियां हो सकती हैं।
Q6. बड़े बांधों के निर्माण से कौन-सी तीन मुख्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं?
आसान उत्तर देखें
उत्तर:
1. सामाजिक समस्या: हजारों किसानों और आदिवासियों के घर और खेत डूब जाते हैं और उन्हें उचित मुआवजा व पुनर्वास नहीं मिलता।
2. पर्यावरणीय समस्या: विशाल वन क्षेत्र पानी में डूबकर नष्ट हो जाते हैं और जैव विविधता खत्म हो जाती है।
3. आर्थिक समस्या: जनता के बहुत भारी धन का उपयोग होता है, लेकिन लाभ सभी को समान रूप से नहीं मिलता।
1. सामाजिक समस्या: हजारों किसानों और आदिवासियों के घर और खेत डूब जाते हैं और उन्हें उचित मुआवजा व पुनर्वास नहीं मिलता।
2. पर्यावरणीय समस्या: विशाल वन क्षेत्र पानी में डूबकर नष्ट हो जाते हैं और जैव विविधता खत्म हो जाती है।
3. आर्थिक समस्या: जनता के बहुत भारी धन का उपयोग होता है, लेकिन लाभ सभी को समान रूप से नहीं मिलता।
Q7. वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) क्या है? इसके दो मुख्य लाभ लिखिए।
आसान उत्तर देखें
1. परिभाषा: बारिश के पानी को व्यर्थ बहकर नालों में जाने से रोककर उसे गड्ढों, टांकों, पोखरों या छतों के माध्यम से जमीन के अंदर भूजल को रिचार्ज करने की तकनीक को वर्षा जल संचयन कहते हैं।
2. दो मुख्य लाभ:
• भूजल स्तर में भारी सुधार होता है और सूखे के समय पानी की कमी नहीं होती।
• भूमिगत जल का वाष्पीकरण नहीं होता और यह मच्छरों के प्रजनन से पूरी तरह सुरक्षित रहता है।
2. दो मुख्य लाभ:
• भूजल स्तर में भारी सुधार होता है और सूखे के समय पानी की कमी नहीं होती।
• भूमिगत जल का वाष्पीकरण नहीं होता और यह मच्छरों के प्रजनन से पूरी तरह सुरक्षित रहता है।
Q8. भौम जल (भूजल) सतही जल (तालाब/नदी) की तुलना में क्यों बेहतर माना जाता है?
आसान उत्तर देखें
उत्तर:
1. भूजल जमीन के नीचे बंद रहता है, इसलिए यह धूप से वाष्प बनकर उड़ता नहीं है।
2. यह चारों तरफ की मिट्टी में फैलकर कुओं और फसलों को नमी प्रदान करता है।
3. इसमें मच्छर और कीड़े प्रजनन नहीं कर पाते और यह जंतुओं/मानव अपशिष्टों से सुरक्षित रहता है।
1. भूजल जमीन के नीचे बंद रहता है, इसलिए यह धूप से वाष्प बनकर उड़ता नहीं है।
2. यह चारों तरफ की मिट्टी में फैलकर कुओं और फसलों को नमी प्रदान करता है।
3. इसमें मच्छर और कीड़े प्रजनन नहीं कर पाते और यह जंतुओं/मानव अपशिष्टों से सुरक्षित रहता है।
Q9. हिमाचल प्रदेश की पारंपरिक 'कुल्ह' (Kulh) सिंचाई व्यवस्था क्या है?
आसान उत्तर देखें
उत्तर: हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में लगभग 400 वर्ष पहले स्थानीय ग्रामीणों द्वारा झरनों और ग्लेशियरों के पिघलते पानी को मानव निर्मित मिट्टी की छोटी-छोटी नहरों (कुल्ह) द्वारा नीचे के कई गांवों तक पहुंचाया जाता था।
इस पानी का प्रबंधन ग्रामीणों की आपसी सहमति से होता था, जिसमें सबसे दूर वाले गांव को पहले पानी दिया जाता था।
इस पानी का प्रबंधन ग्रामीणों की आपसी सहमति से होता था, जिसमें सबसे दूर वाले गांव को पहले पानी दिया जाता था।
Q10. अमृता देवी विश्नोई का बलिदान पर्यावरण संरक्षण के इतिहास में क्यों अमर है?
आसान उत्तर देखें
उत्तर: सन 1731 में राजस्थान के जोधपुर के पास खेजड़ली गाँव में राजा के महल निर्माण के लिए हरे खेजड़ी वृक्षों को काटा जा रहा था।
अमृता देवी विश्नोई ने पेड़ों की रक्षा के लिए अपनी तीन बेटियों और 363 अन्य विश्नोई ग्रामीणों के साथ पेड़ों से लिपटकर अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। उनके इस अदम्य साहस की याद में भारत सरकार 'अमृता देवी विश्नोई राष्ट्रीय पुरस्कार' प्रदान करती है।
अमृता देवी विश्नोई ने पेड़ों की रक्षा के लिए अपनी तीन बेटियों और 363 अन्य विश्नोई ग्रामीणों के साथ पेड़ों से लिपटकर अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। उनके इस अदम्य साहस की याद में भारत सरकार 'अमृता देवी विश्नोई राष्ट्रीय पुरस्कार' प्रदान करती है।
Q11. पर्यावरण संरक्षण के '3R' सिद्धांत का क्या अर्थ है?
आसान उत्तर देखें
उत्तर: 3R का अर्थ निम्नलिखित है:
• 1. Reduce (कम उपयोग): आवश्यकता न होने पर बिजली के पंखे/बल्ब बंद करना, पानी का नल खुला न छोड़ना।
• 2. Recycle (पुनर्चक्रण): प्लास्टिक, कांच, कागज और धातु के कचरे को गलाकर नई वस्तुएं बनाना।
• 3. Reuse (पुनः उपयोग): प्लास्टिक या कांच के डिब्बों और लिफाफों को फेंकने के बजाय बार-बार घरेलू सामान रखने में उपयोग करना।
• 1. Reduce (कम उपयोग): आवश्यकता न होने पर बिजली के पंखे/बल्ब बंद करना, पानी का नल खुला न छोड़ना।
• 2. Recycle (पुनर्चक्रण): प्लास्टिक, कांच, कागज और धातु के कचरे को गलाकर नई वस्तुएं बनाना।
• 3. Reuse (पुनः उपयोग): प्लास्टिक या कांच के डिब्बों और लिफाफों को फेंकने के बजाय बार-बार घरेलू सामान रखने में उपयोग करना।
Q12. जीवाश्म ईंधन (कोयला एवं पेट्रोलियम) के संरक्षण की आवश्यकता क्यों है?
आसान उत्तर देखें
उत्तर:
1. सीमित भंडार: कोयला और पेट्रोलियम अनवीकरणीय स्रोत हैं। वर्तमान उपभोग दर के अनुसार पेट्रोलियम लगभग 40 वर्ष और कोयला लगभग 200 वर्ष में समाप्त हो जाएगा।
2. प्रदूषण नियंत्रण: इनके जलने से कार्बन डाइऑक्साइड (ग्लोबल वार्मिंग), कार्बन मोनोऑक्साइड और सल्फर-नाइट्रोजन के ऑक्साइड (अम्लीय वर्षा) निकलते हैं, जो पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँचाते हैं।
1. सीमित भंडार: कोयला और पेट्रोलियम अनवीकरणीय स्रोत हैं। वर्तमान उपभोग दर के अनुसार पेट्रोलियम लगभग 40 वर्ष और कोयला लगभग 200 वर्ष में समाप्त हो जाएगा।
2. प्रदूषण नियंत्रण: इनके जलने से कार्बन डाइऑक्साइड (ग्लोबल वार्मिंग), कार्बन मोनोऑक्साइड और सल्फर-नाइट्रोजन के ऑक्साइड (अम्लीय वर्षा) निकलते हैं, जो पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँचाते हैं।
Q13. पश्चिम बंगाल के अराबाड़ी वन क्षेत्र में वन संरक्षण का कौन-सा सफल प्रयोग किया गया था?
आसान उत्तर देखें
उत्तर: 1972 में पश्चिम बंगाल के मिदनापुर जिले के अराबाड़ी में 1,272 हेक्टेयर के बुरी तरह उजड़ चुके साल (Sal) वनों को बचाने के लिए वन अधिकारी ए.के. बनर्जी ने स्थानीय ग्रामीणों को वन सुरक्षा में शामिल किया।
बदले में ग्रामीणों को रोजगार और वनोपज (लकड़ी, पत्ता) का 25% हिस्सा दिया गया। 10 वर्षों में ही यह वन पूरी तरह हरा-भरा और 12.5 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का समृद्ध वन बन गया।
बदले में ग्रामीणों को रोजगार और वनोपज (लकड़ी, पत्ता) का 25% हिस्सा दिया गया। 10 वर्षों में ही यह वन पूरी तरह हरा-भरा और 12.5 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का समृद्ध वन बन गया।
Q14. जैव विविधता के तप्त स्थल (Biodiversity Hotspots) क्या हैं? इन्हें संरक्षित करना क्यों जरूरी है?
आसान उत्तर देखें
1. परिभाषा: पृथ्वी के वे प्राकृतिक क्षेत्र (जैसे घने वन) जहाँ पेड़-पौधों, पक्षियों, जंतुओं और सूक्ष्मजीवों की असंख्य दुर्लभ प्रजातियाँ एक साथ पाई जाती हैं, उन्हें जैव विविधता के तप्त स्थल कहते हैं।
2. संरक्षण का कारण: जैव विविधता का नुकसान होने से प्राकृतिक पारिस्थितिक संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाता है, जिससे मौसम चक्र और खाद्य जाल नष्ट हो जाते हैं।
2. संरक्षण का कारण: जैव विविधता का नुकसान होने से प्राकृतिक पारिस्थितिक संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाता है, जिससे मौसम चक्र और खाद्य जाल नष्ट हो जाते हैं।
Q15. जल संभर प्रबंधन (Watershed Management) का मुख्य उद्देश्य क्या है?
आसान उत्तर देखें
उत्तर: जल संभर प्रबंधन का मुख्य उद्देश्य किसी क्षेत्र की भूमि और जल संसाधनों का वैज्ञानिक तरीके से विकास करना है, ताकि:
• मिट्टी का कटाव (अपरदन) रुके और भूजल स्तर ऊपर उठे।
• वनस्पति और फसलों (बायोमास) का कुल उत्पादन बढ़े, जिससे सूखे और बाढ़ के प्रभाव को कम किया जा सके और ग्रामीणों की आय में वृद्धि हो।
• मिट्टी का कटाव (अपरदन) रुके और भूजल स्तर ऊपर उठे।
• वनस्पति और फसलों (बायोमास) का कुल उत्पादन बढ़े, जिससे सूखे और बाढ़ के प्रभाव को कम किया जा सके और ग्रामीणों की आय में वृद्धि हो।
Q16. ऊर्जा की बचत और पर्यावरण संरक्षण के लिए एक व्यक्ति के रूप में आप क्या योगदान दे सकते हैं?
आसान उत्तर देखें
उत्तर:
1. कम दूरी तय करने के लिए निजी वाहन के बजाय पैदल चलना या साइकिल का उपयोग करना।
2. जरूरत न होने पर लाइट, पंखे बंद करना और साधारण बल्ब की जगह LED बल्ब का उपयोग करना।
3. टपकते हुए नलों को तुरंत ठीक कराकर जल की एक-एक बूंद बचाना।
4. लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का उपयोग करना और भोजन को व्यर्थ न फेंकना।
1. कम दूरी तय करने के लिए निजी वाहन के बजाय पैदल चलना या साइकिल का उपयोग करना।
2. जरूरत न होने पर लाइट, पंखे बंद करना और साधारण बल्ब की जगह LED बल्ब का उपयोग करना।
3. टपकते हुए नलों को तुरंत ठीक कराकर जल की एक-एक बूंद बचाना।
4. लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का उपयोग करना और भोजन को व्यर्थ न फेंकना।
Q17. बिहार की पारंपरिक 'आहर-पाइन' जल संचयन प्रणाली क्या है?
आसान उत्तर देखें
उत्तर: बिहार के दक्षिणी इलाकों में वर्षा जल संचयन की यह प्राचीन व्यवस्था है:
• आहर: तीन तरफ से मिट्टी की ऊंची पाल (दीवार) बनाकर बनाया गया एक उथला जल संचयन जलाशय होता है।
• पाइन: नदियों या आहर से पानी को दूर-दराज के खेतों तक ले जाने वाली छोटी नहरें या नालियाँ होती हैं। यह बाढ़ नियंत्रण और धान की सिंचाई दोनों में अत्यंत उपयोगी है।
• आहर: तीन तरफ से मिट्टी की ऊंची पाल (दीवार) बनाकर बनाया गया एक उथला जल संचयन जलाशय होता है।
• पाइन: नदियों या आहर से पानी को दूर-दराज के खेतों तक ले जाने वाली छोटी नहरें या नालियाँ होती हैं। यह बाढ़ नियंत्रण और धान की सिंचाई दोनों में अत्यंत उपयोगी है।
Q18. राजस्थान की पारंपरिक 'खादिन' (Khadin) प्रणाली कैसे काम करती है?
आसान उत्तर देखें
उत्तर: खादिन ढलान वाली कृषि भूमि पर जल संचयन की एक अद्भुत तकनीक है:
पहाड़ी ढलानों से बहकर आने वाले वर्षा जल को रोकने के लिए खेत के निचले सिरे पर मिट्टी का एक लंबा बांध (पाल) बना दिया जाता है। पानी वहां रुककर जमीन में समा जाता है, जिससे मिट्टी में नमी बनी रहती है और अतिरिक्त पानी रिसकर पास के कुओं को रिचार्ज कर देता है।
पहाड़ी ढलानों से बहकर आने वाले वर्षा जल को रोकने के लिए खेत के निचले सिरे पर मिट्टी का एक लंबा बांध (पाल) बना दिया जाता है। पानी वहां रुककर जमीन में समा जाता है, जिससे मिट्टी में नमी बनी रहती है और अतिरिक्त पानी रिसकर पास के कुओं को रिचार्ज कर देता है।
Q19. जीवाश्म ईंधनों के उपयोग को कम करने के लिए कौन-से वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत अपनाए जा सकते हैं?
आसान उत्तर देखें
उत्तर: कोयला और पेट्रोलियम के स्थान पर हम निम्नलिखित नवीकरणीय एवं प्रदूषण-मुक्त ऊर्जा स्रोतों का उपयोग कर सकते हैं:
1. सौर ऊर्जा (Solar Energy): सोलर पैनल और सोलर कुकर द्वारा।
2. पवन ऊर्जा (Wind Energy): पवन चक्कियों द्वारा बिजली उत्पादन।
3. बायो-गैस (Biogas): गोबर और जैविक कचरे से रसोई गैस बनाना।
4. जल विद्युत एवं भू-तापीय ऊर्जा
1. सौर ऊर्जा (Solar Energy): सोलर पैनल और सोलर कुकर द्वारा।
2. पवन ऊर्जा (Wind Energy): पवन चक्कियों द्वारा बिजली उत्पादन।
3. बायो-गैस (Biogas): गोबर और जैविक कचरे से रसोई गैस बनाना।
4. जल विद्युत एवं भू-तापीय ऊर्जा
Q20. 'पुनर्चक्रण' (Recycling) की तुलना में 'पुनः उपयोग' (Reuse) को बेहतर क्यों माना जाता है?
आसान उत्तर देखें
उत्तर: पुनः उपयोग (Reuse) हमेशा पुनर्चक्रण (Recycle) से बेहतर है, क्योंकि:
• पुनर्चक्रण (Recycling) में कचरे को गलाने और नई वस्तु बनाने के लिए भारी मात्रा में बिजली, ईंधन और ऊर्जा खर्च होती है तथा थोड़ा प्रदूषण भी फैलता है।
• जबकि पुनः उपयोग (Reuse) में हम किसी वस्तु (जैसे जैम की कांच की बोतल या प्लास्टिक का डिब्बा) को बिना कोई ऊर्जा खर्च किए बस धोकर दोबारा सीधे काम में ले लेते हैं।
• पुनर्चक्रण (Recycling) में कचरे को गलाने और नई वस्तु बनाने के लिए भारी मात्रा में बिजली, ईंधन और ऊर्जा खर्च होती है तथा थोड़ा प्रदूषण भी फैलता है।
• जबकि पुनः उपयोग (Reuse) में हम किसी वस्तु (जैसे जैम की कांच की बोतल या प्लास्टिक का डिब्बा) को बिना कोई ऊर्जा खर्च किए बस धोकर दोबारा सीधे काम में ले लेते हैं।
महत्वपूर्ण दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 Marks)
Q1. प्राकृतिक संसाधनों के संपोषित प्रबंधन (Sustainable Management) से क्या अभिप्राय है? वनों के संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भूमिका का उदाहरण सहित वर्णन करें।
आसान उत्तर देखें
1. संपोषित प्रबंधन की परिभाषा:
प्राकृतिक संसाधनों का इस प्रकार न्यायसंगत और विवेकपूर्ण उपयोग करना ताकि पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताएं पूरी हों और आने वाली भावी पीढ़ियों के लिए भी वे पर्याप्त मात्रा में सुरक्षित रहें, संपोषित प्रबंधन कहलाता है।
2. वन संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भूमिका:
वनों के वास्तविक संरक्षक वहां के स्थानीय लोग और आदिवासी होते हैं, क्योंकि उनका जीवन वनों से अटूट रूप से जुड़ा होता है:
• (i) अमृता देवी विश्नोई का बलिदान (1731):
राजस्थान के खेजड़ली गाँव में राजा के सैनिकों द्वारा हरे खेजड़ी वृक्षों की कटाई रोकने के लिए अमृता देवी विश्नोई ने अपनी बेटियों और 363 ग्रामीणों के साथ पेड़ों से लिपटकर अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।
• (ii) चिपको आंदोलन (1970 का दशक):
उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र (रेनी गाँव) में जब लकड़ी ठेकेदार के मजदूर पेड़ काटने पहुंचे, तो गाँव की महिलाएं पेड़ों से चिपककर खड़ी हो गईं और उन्हें कटने से बचा लिया। इसने पूरे देश में जन-जागरूकता फैलाई।
• (iii) अराबाड़ी वन पुनरुद्धार (1972):
पश्चिम बंगाल के मिदनापुर में वन अधिकारी ए.के. बनर्जी ने 1,272 हेक्टेयर नष्ट हो चुके साल (Sal) वनों को बचाने के लिए ग्रामीणों को वन सुरक्षा में शामिल किया। बदले में उन्हें रोजगार और 25% वनोपज दी गई, जिससे उजड़ा हुआ जंगल पुनः समृद्ध बन गया।
प्राकृतिक संसाधनों का इस प्रकार न्यायसंगत और विवेकपूर्ण उपयोग करना ताकि पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताएं पूरी हों और आने वाली भावी पीढ़ियों के लिए भी वे पर्याप्त मात्रा में सुरक्षित रहें, संपोषित प्रबंधन कहलाता है।
2. वन संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भूमिका:
वनों के वास्तविक संरक्षक वहां के स्थानीय लोग और आदिवासी होते हैं, क्योंकि उनका जीवन वनों से अटूट रूप से जुड़ा होता है:
• (i) अमृता देवी विश्नोई का बलिदान (1731):
राजस्थान के खेजड़ली गाँव में राजा के सैनिकों द्वारा हरे खेजड़ी वृक्षों की कटाई रोकने के लिए अमृता देवी विश्नोई ने अपनी बेटियों और 363 ग्रामीणों के साथ पेड़ों से लिपटकर अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।
• (ii) चिपको आंदोलन (1970 का दशक):
उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र (रेनी गाँव) में जब लकड़ी ठेकेदार के मजदूर पेड़ काटने पहुंचे, तो गाँव की महिलाएं पेड़ों से चिपककर खड़ी हो गईं और उन्हें कटने से बचा लिया। इसने पूरे देश में जन-जागरूकता फैलाई।
• (iii) अराबाड़ी वन पुनरुद्धार (1972):
पश्चिम बंगाल के मिदनापुर में वन अधिकारी ए.के. बनर्जी ने 1,272 हेक्टेयर नष्ट हो चुके साल (Sal) वनों को बचाने के लिए ग्रामीणों को वन सुरक्षा में शामिल किया। बदले में उन्हें रोजगार और 25% वनोपज दी गई, जिससे उजड़ा हुआ जंगल पुनः समृद्ध बन गया।
Q2. बड़े बांधों (Large Dams) के निर्माण के क्या-क्या लाभ हैं? इनसे उत्पन्न होने वाली सामाजिक, आर्थिक एवं पर्यावरणीय समस्याओं की विस्तार से विवेचना करें।
आसान उत्तर देखें
1. बड़े बांधों के प्रमुख लाभ:
• सिंचाई: विशाल नहर प्रणालियों (जैसे राजस्थान में इंदिरा गांधी नहर) द्वारा दूर-दराज के सूखाग्रस्त इलाकों तक पानी पहुंचाना।
• जल विद्युत उत्पादन: टरबाइन चलाकर भारी मात्रा में प्रदूषण-मुक्त बिजली तैयार करना।
• शहरी जलापूर्ति एवं बाढ़ नियंत्रण: शहरों को पीने का पानी उपलब्ध कराना और वर्षा ऋतु में बाढ़ को रोकना।
2. बांधों से जुड़ी तीन प्रमुख समस्याएं:
• (A) सामाजिक समस्या: बांध के विशाल जलाशय में हजारों किसानों और आदिवासियों के घर, जमीन व पुश्तैनी गाँव डूब जाते हैं। उन्हें उचित मुआवजा और सम्मानजनक पुनर्वास नहीं मिल पाता (जैसे नर्मदा बचाओ आंदोलन और टिहरी बांध विवाद)।
• (B) पर्यावरणीय समस्या: लाखों हेक्टेयर उपजाऊ कृषि भूमि और समृद्ध घने वन जलमग्न हो जाते हैं। इससे असंख्य वन्यजीवों का आवास छिन जाता है, जैव विविधता नष्ट होती है और डूबी हुई वनस्पतियों के सड़ने से मीथेन जैसी ग्रीनहाउस गैस निकलती है।
• (C) आर्थिक समस्या: बांधों के निर्माण में जनता के भारी धन और राजस्व का निवेश होता है, लेकिन इसका आनुपातिक लाभ विस्थापित गरीबों तक न पहुंचकर केवल बड़े उद्योगपतियों और धनी किसानों तक सीमित रह जाता है।
• सिंचाई: विशाल नहर प्रणालियों (जैसे राजस्थान में इंदिरा गांधी नहर) द्वारा दूर-दराज के सूखाग्रस्त इलाकों तक पानी पहुंचाना।
• जल विद्युत उत्पादन: टरबाइन चलाकर भारी मात्रा में प्रदूषण-मुक्त बिजली तैयार करना।
• शहरी जलापूर्ति एवं बाढ़ नियंत्रण: शहरों को पीने का पानी उपलब्ध कराना और वर्षा ऋतु में बाढ़ को रोकना।
2. बांधों से जुड़ी तीन प्रमुख समस्याएं:
• (A) सामाजिक समस्या: बांध के विशाल जलाशय में हजारों किसानों और आदिवासियों के घर, जमीन व पुश्तैनी गाँव डूब जाते हैं। उन्हें उचित मुआवजा और सम्मानजनक पुनर्वास नहीं मिल पाता (जैसे नर्मदा बचाओ आंदोलन और टिहरी बांध विवाद)।
• (B) पर्यावरणीय समस्या: लाखों हेक्टेयर उपजाऊ कृषि भूमि और समृद्ध घने वन जलमग्न हो जाते हैं। इससे असंख्य वन्यजीवों का आवास छिन जाता है, जैव विविधता नष्ट होती है और डूबी हुई वनस्पतियों के सड़ने से मीथेन जैसी ग्रीनहाउस गैस निकलती है।
• (C) आर्थिक समस्या: बांधों के निर्माण में जनता के भारी धन और राजस्व का निवेश होता है, लेकिन इसका आनुपातिक लाभ विस्थापित गरीबों तक न पहुंचकर केवल बड़े उद्योगपतियों और धनी किसानों तक सीमित रह जाता है।
Q3. वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) की आवश्यकता क्यों है? भारत के विभिन्न राज्यों में अपनाई जाने वाली पारंपरिक जल संग्रहण प्रणालियों का सविस्तार उल्लेख करें।
आसान उत्तर देखें
1. वर्षा जल संचयन की आवश्यकता एवं महत्व:
वर्षा जल का अधिकांश भाग नालों और नदियों से होकर व्यर्थ समुद्र में बह जाता है। जल संचयन द्वारा इस पानी को जमीन के अंदर भेजकर भूजल (Groundwater) का पुनर्भरण किया जाता है। भूजल वाष्प बनकर उड़ता नहीं, स्वच्छ रहता है और सूखे के समय फसलों व पीने के काम आता है।
2. भारत के विभिन्न राज्यों की पारंपरिक प्रणालियाँ:
• (i) बिहार (आहर-पाइन): आहर तीन तरफ से मिट्टी की ऊंची दीवार वाला जलाशय होता है और पाइन छोटी नहरें होती हैं जो पानी को खेतों तक ले जाती हैं।
• (ii) राजस्थान (खादिन एवं टांका): ढलान वाली भूमि पर मिट्टी का बांध बनाकर 'खादिन' और घरों के नीचे पक्के भूमिगत 'टांके' बनाकर वर्षा जल एकत्र किया जाता है।
• (iii) हिमाचल प्रदेश (कुल्ह): ग्लेशियरों और झरनों के पिघलते पानी को मिट्टी की छोटी नहरों (कुल्ह) द्वारा पहाड़ों से नीचे गांवों तक पहुंचाया जाता है।
• (iv) महाराष्ट्र (बंधारस एवं ताल): छोटी नदियों पर चेकडैम (बंधारे) बनाकर पानी रोका जाता है।
• (v) केरल (सुरंगम) एवं कर्नाटक (कट्टा): पहाड़ी ढलानों पर क्षैतिज गुफाएं खोदकर (सुरंगम) तथा नदियों पर मिट्टी के कच्चे बांध (कट्टा) बनाकर जल संचित किया जाता है।
• (vi) तमिलनाडु (एरिस): पारंपरिक टैंक प्रणाली द्वारा वर्षा जल संचित कर सिंचाई की जाती है।
वर्षा जल का अधिकांश भाग नालों और नदियों से होकर व्यर्थ समुद्र में बह जाता है। जल संचयन द्वारा इस पानी को जमीन के अंदर भेजकर भूजल (Groundwater) का पुनर्भरण किया जाता है। भूजल वाष्प बनकर उड़ता नहीं, स्वच्छ रहता है और सूखे के समय फसलों व पीने के काम आता है।
2. भारत के विभिन्न राज्यों की पारंपरिक प्रणालियाँ:
• (i) बिहार (आहर-पाइन): आहर तीन तरफ से मिट्टी की ऊंची दीवार वाला जलाशय होता है और पाइन छोटी नहरें होती हैं जो पानी को खेतों तक ले जाती हैं।
• (ii) राजस्थान (खादिन एवं टांका): ढलान वाली भूमि पर मिट्टी का बांध बनाकर 'खादिन' और घरों के नीचे पक्के भूमिगत 'टांके' बनाकर वर्षा जल एकत्र किया जाता है।
• (iii) हिमाचल प्रदेश (कुल्ह): ग्लेशियरों और झरनों के पिघलते पानी को मिट्टी की छोटी नहरों (कुल्ह) द्वारा पहाड़ों से नीचे गांवों तक पहुंचाया जाता है।
• (iv) महाराष्ट्र (बंधारस एवं ताल): छोटी नदियों पर चेकडैम (बंधारे) बनाकर पानी रोका जाता है।
• (v) केरल (सुरंगम) एवं कर्नाटक (कट्टा): पहाड़ी ढलानों पर क्षैतिज गुफाएं खोदकर (सुरंगम) तथा नदियों पर मिट्टी के कच्चे बांध (कट्टा) बनाकर जल संचित किया जाता है।
• (vi) तमिलनाडु (एरिस): पारंपरिक टैंक प्रणाली द्वारा वर्षा जल संचित कर सिंचाई की जाती है।
Q4. पर्यावरण संरक्षण एवं कचरा प्रबंधन हेतु 5R सिद्धांत (5R Principle) की विस्तारपूर्वक व्याख्या कीजिए। दैनिक जीवन में इसे कैसे लागू किया जा सकता है?
आसान उत्तर देखें
5R सिद्धांत पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की आधुनिक वैश्विक रूपरेखा है:
• 1. Refuse (इनकार करना):
ऐसी वस्तुओं और पैकेजिंग को लेने से साफ मना करना जो पर्यावरण को नुकसान पहुँचाती हैं।
- दैनिक अमल: बाजार जाते समय सिंगल-यूज प्लास्टिक की थैलियों और डिस्पोजेबल कप-प्लेट को लेने से इनकार करना और कपड़े का थैला साथ रखना।
• 2. Reduce (कम उपयोग करना):
संसाधनों और वस्तुओं का फिजूलखर्च कम करना।
- दैनिक अमल: कमरे से बाहर निकलते समय बिजली के बल्ब/पंखे बंद करना, टपकते नल ठीक करना और भोजन की बर्बादी रोकना।
• 3. Reuse (पुनः उपयोग करना):
किसी वस्तु को फेंकने के बजाय उसे बार-बार इस्तेमाल में लाना।
- दैनिक अमल: जैम, अचार या घी के खाली कांच व प्लास्टिक के डिब्बों को दाल, मसाले व चीनी रखने के काम में लेना।
• 4. Repurpose (पुनः प्रयोजन):
जब कोई वस्तु अपने मूल उद्देश्य के लिए बेकार हो जाए, तो उसे किसी दूसरे रचनात्मक काम में लगाना।
- दैनिक अमल: टूटे हुए चीनी मिट्टी के कप, पुरानी बाल्टी या कटी बोतलों को छोटे गमले बनाकर पौधे लगाना।
• 5. Recycle (पुनर्चक्रण):
कचरे को छांटकर फैक्ट्रियों में पुनः प्रसंस्कृत कर नई वस्तुएं बनाना।
- दैनिक अमल: पुराने अखबार, प्लास्टिक, लोहा और टूटे कांच को कबाड़ी को देना ताकि नए उत्पाद बन सकें और प्राकृतिक कच्चे माल की खपत घटे।
• 1. Refuse (इनकार करना):
ऐसी वस्तुओं और पैकेजिंग को लेने से साफ मना करना जो पर्यावरण को नुकसान पहुँचाती हैं।
- दैनिक अमल: बाजार जाते समय सिंगल-यूज प्लास्टिक की थैलियों और डिस्पोजेबल कप-प्लेट को लेने से इनकार करना और कपड़े का थैला साथ रखना।
• 2. Reduce (कम उपयोग करना):
संसाधनों और वस्तुओं का फिजूलखर्च कम करना।
- दैनिक अमल: कमरे से बाहर निकलते समय बिजली के बल्ब/पंखे बंद करना, टपकते नल ठीक करना और भोजन की बर्बादी रोकना।
• 3. Reuse (पुनः उपयोग करना):
किसी वस्तु को फेंकने के बजाय उसे बार-बार इस्तेमाल में लाना।
- दैनिक अमल: जैम, अचार या घी के खाली कांच व प्लास्टिक के डिब्बों को दाल, मसाले व चीनी रखने के काम में लेना।
• 4. Repurpose (पुनः प्रयोजन):
जब कोई वस्तु अपने मूल उद्देश्य के लिए बेकार हो जाए, तो उसे किसी दूसरे रचनात्मक काम में लगाना।
- दैनिक अमल: टूटे हुए चीनी मिट्टी के कप, पुरानी बाल्टी या कटी बोतलों को छोटे गमले बनाकर पौधे लगाना।
• 5. Recycle (पुनर्चक्रण):
कचरे को छांटकर फैक्ट्रियों में पुनः प्रसंस्कृत कर नई वस्तुएं बनाना।
- दैनिक अमल: पुराने अखबार, प्लास्टिक, लोहा और टूटे कांच को कबाड़ी को देना ताकि नए उत्पाद बन सकें और प्राकृतिक कच्चे माल की खपत घटे।
Q5. जीवाश्म ईंधन (कोयला एवं पेट्रोलियम) के अत्यधिक उपभोग से उत्पन्न होने वाली पर्यावरणीय समस्याओं का वर्णन करें तथा इनके संरक्षण के व्यावहारिक उपाय बताइए।
आसान उत्तर देखें
1. जीवाश्म ईंधन के अत्यधिक दहन से उत्पन्न समस्याएं:
• (i) ग्लोबल वार्मिंग (भूमंडलीय तापन): दहन से भारी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) गैस निकलती है, जो ग्रीनहाउस प्रभाव बढ़ाकर पृथ्वी के तापमान में वृद्धि और ग्लेशियरों के पिघलने का कारण बन रही है।
• (ii) अम्लीय वर्षा (Acid Rain): इनमें मौजूद सल्फर और नाइट्रोजन जलकर SO2 और NO2 बनाते हैं, जो वर्षा के जल में घुलकर सल्फ्यूरिक और नाइट्रिक अम्ल बनाते हैं, जिससे मिट्टी, जल और ऐतिहासिक इमारतें क्षतिग्रस्त होती हैं।
• (iii) वायु प्रदूषण व स्वास्थ्य संकट: अपूर्ण दहन से कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) जैसी अत्यंत जहरीली गैस और कालिख के बारीक कण (PM 2.5) निकलते हैं, जो दमा, फेफड़ों का कैंसर और हृदय रोग पैदा करते हैं।
• (iv) सीमित भंडार: ये अनवीकरणीय स्रोत हैं। वर्तमान उपभोग दर पर पेट्रोलियम मात्र 40-50 वर्ष और कोयला लगभग 200 वर्षों में समाप्त हो जाएगा।
2. संरक्षण के व्यावहारिक उपाय:
• छोटी दूरियों के लिए निजी मोटरसाइकिल/कार के स्थान पर पैदल चलना या साइकिल का उपयोग करना।
• लंबी यात्राओं के लिए व्यक्तिगत वाहनों के स्थान पर सार्वजनिक परिवहन (बस, मेट्रो, रेल) का अधिकाधिक प्रयोग करना।
• घरों और दफ्तरों में साधारण बल्बों के स्थान पर ऊर्जा-कुशल LED और इनवर्टर उपकरणों का प्रयोग करना।
• सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और बायोगैस जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को प्राथमिकता देना।
• (i) ग्लोबल वार्मिंग (भूमंडलीय तापन): दहन से भारी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) गैस निकलती है, जो ग्रीनहाउस प्रभाव बढ़ाकर पृथ्वी के तापमान में वृद्धि और ग्लेशियरों के पिघलने का कारण बन रही है।
• (ii) अम्लीय वर्षा (Acid Rain): इनमें मौजूद सल्फर और नाइट्रोजन जलकर SO2 और NO2 बनाते हैं, जो वर्षा के जल में घुलकर सल्फ्यूरिक और नाइट्रिक अम्ल बनाते हैं, जिससे मिट्टी, जल और ऐतिहासिक इमारतें क्षतिग्रस्त होती हैं।
• (iii) वायु प्रदूषण व स्वास्थ्य संकट: अपूर्ण दहन से कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) जैसी अत्यंत जहरीली गैस और कालिख के बारीक कण (PM 2.5) निकलते हैं, जो दमा, फेफड़ों का कैंसर और हृदय रोग पैदा करते हैं।
• (iv) सीमित भंडार: ये अनवीकरणीय स्रोत हैं। वर्तमान उपभोग दर पर पेट्रोलियम मात्र 40-50 वर्ष और कोयला लगभग 200 वर्षों में समाप्त हो जाएगा।
2. संरक्षण के व्यावहारिक उपाय:
• छोटी दूरियों के लिए निजी मोटरसाइकिल/कार के स्थान पर पैदल चलना या साइकिल का उपयोग करना।
• लंबी यात्राओं के लिए व्यक्तिगत वाहनों के स्थान पर सार्वजनिक परिवहन (बस, मेट्रो, रेल) का अधिकाधिक प्रयोग करना।
• घरों और दफ्तरों में साधारण बल्बों के स्थान पर ऊर्जा-कुशल LED और इनवर्टर उपकरणों का प्रयोग करना।
• सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और बायोगैस जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को प्राथमिकता देना।
