अध्याय 4: विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव
VVI Objective Questions (className 10th Physics)
Q1. विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव की खोज किस वैज्ञानिक ने की थी?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) ऑर्स्टेड (Oersted)
Q2. विद्युत चुम्बकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) की खोज किसने की थी?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) माइकल फैराडे
Q3. चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) का SI मात्रक क्या होता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) टेस्ला (Tesla - T)
Q4. विद्युत मोटर (Electric Motor) विद्युत ऊर्जा को किस ऊर्जा में बदलता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) यांत्रिक ऊर्जा (Mechanical Energy)
Q5. विद्युत जनित्र (Dynamo / Generator) यांत्रिक ऊर्जा को किस ऊर्जा में परिवर्तित करता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) विद्युत ऊर्जा (Electrical Energy)
Q6. फ्लेमिंग के वामहस्त नियम (Left-Hand Rule) में तर्जनी (Forefinger) किसकी दिशा दर्शाती है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) चुंबकीय क्षेत्र की दिशा
Q7. फ्लेमिंग के वामहस्त नियम में अँगूठा (Thumb) किसकी दिशा को दर्शाता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) आरोपित बल की दिशा
Q8. विद्युत चुंबक (Electromagnet) बनाने के लिए प्रायः किस पदार्थ की छड़ का उपयोग होता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) नरम लोहा (Soft Iron)
Q9. स्थायी चुंबक (Permanent Magnet) बनाने के लिए किस पदार्थ का उपयोग किया जाता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) इस्पात (Steel / Alnico)
Q10. चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं चुंबक के बाहर किस दिशा में गमन करती हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) उत्तर ध्रुव से दक्षिण ध्रुव (N to S)
Q11. चुंबक के भीतर चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा क्या होती है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) दक्षिण से उत्तर ध्रुव (S to N)
Q12. किसी परिनालिका (Solenoid) के भीतर चुंबकीय क्षेत्र कैसा होता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) सभी बिंदुओं पर एकसमान (Uniform) होता है
Q13. प्रत्यावर्ती धारा (AC) की आवृत्ति (Frequency) भारत में कितनी होती है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) 50 Hz
Q14. लघुपथन (Short Circuit) के समय परिपथ में विद्युत धारा का मान:
उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) बहुत अधिक बढ़ जाता है
Q15. घरेलू विद्युत परिपथ में विद्युन्मय तार (Live Wire) का रंग कैसा होता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) लाल (Red)
Q16. घरेलू विद्युत परिपथ में उदासीन तार (Neutral Wire) का रंग कैसा होता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) काला (Black)
Q17. भू-संपर्क तार (Earth Wire) का रंग कैसा होता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) हरा (Green)
Q18. फ्लेमिंग के दक्षिण-हस्त (Right-Hand) नियम का उपयोग किसकी दिशा ज्ञात करने के लिए किया जाता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) प्रेरित विद्युत धारा (Induced Current) की दिशा
Q19. किसी धारावाही सीधी लंबी परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र:
उत्तर देखें
सही उत्तर: (D) सभी बिंदुओं पर समान होता है
Q20. विद्युत मोटर में धारा की दिशा बदलने वाले वलय (Ring) को क्या कहते हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) विभक्त वलय (Split Ring / Commutator)
Q21. दक्षिण-हस्त अँगूठा नियम (Right-Hand Thumb Rule) किसने प्रतिपादित किया था?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) मैक्सवेल (Maxwell)
Q22. चुंबकीय फ्लक्स (Magnetic Flux) का SI मात्रक क्या होता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) वेबर (Weber - Wb)
Q23. दिष्ट धारा (DC) की आवृत्ति कितनी होती है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) 0 Hz (शून्य)
Q24. विद्युत फ्यूज को घरेलू परिपथ में किस तार के साथ जोड़ा जाता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) विद्युन्मय तार (Live Wire)
Q25. चुंबकीय सुई (Magnetic Needle) स्वतंत्र रूप से लटकने पर सदैव किस दिशा में ठहरती है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) उत्तर-दक्षिण दिशा (North-South)
Q26. विद्युत जनित्र (Dynamo) किस सिद्धांत पर आधारित है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) विद्युत चुम्बकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) पर
Q27. दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं एक-दूसरे को:
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) कभी नहीं काटती हैं
Q28. प्रत्यावर्ती धारा (AC) जनित्र में प्रयुक्त वलय कैसे होते हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) सर्पी वलय (Slip Rings)
Q29. विद्युत चुम्बकीय प्रेरण द्वारा उत्पन्न विद्युत वाहक बल (EMF) का मान किस नियम से ज्ञात होता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) फैराडे का नियम (Faraday's Law)
Q30. विद्युत चुंबक की शक्ति को कैसे बढ़ाया जा सकता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) दोनों (A और B) द्वारा
महत्वपूर्ण लघु उत्तरीय प्रश्न (2 Marks)
Q1. चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं क्या हैं? इनके दो प्रमुख गुण लिखें।
उत्तर देखें
उत्तर: चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं वे काल्पनिक बंद वक्र रेखाएं हैं जो किसी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा और तीव्रता को प्रदर्शित करती हैं।
दो प्रमुख गुण:
1. ये रेखाएं चुंबक के बाहर उत्तरी ध्रुव (N) से निकलकर दक्षिणी ध्रुव (S) में प्रवेश करती हैं तथा चुंबक के अंदर S से N की ओर जाती हैं।
2. दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं कभी भी एक-दूसरे को प्रतिच्छेद (कट) नहीं करती हैं।
दो प्रमुख गुण:
1. ये रेखाएं चुंबक के बाहर उत्तरी ध्रुव (N) से निकलकर दक्षिणी ध्रुव (S) में प्रवेश करती हैं तथा चुंबक के अंदर S से N की ओर जाती हैं।
2. दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं कभी भी एक-दूसरे को प्रतिच्छेद (कट) नहीं करती हैं।
Q2. दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं एक-दूसरे को प्रतिच्छेद क्यों नहीं करती हैं?
उत्तर देखें
उत्तर: यदि दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं एक-दूसरे को किसी बिंदु पर काटेंगी, तो उस प्रतिच्छेद बिंदु पर चुंबकीय सुई रखने पर वह एक ही समय में दो अलग-अलग दिशाओं को दर्शाएगी, जो कि भौतिक रूप से असंभव है। इसलिए दो क्षेत्र रेखाएं कभी नहीं काटतीं।
Q3. मैक्सवेल का दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम (Right-Hand Thumb Rule) क्या है?
उत्तर देखें
उत्तर: यदि हम अपने दाहिने हाथ में किसी सीधे धारावाही चालक को इस प्रकार पकड़ें कि अँगूठा विद्युत धारा की दिशा की ओर संकेत करे, तो हमारी मुड़ी हुई अंगुलियाँ चालक के चारों ओर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा को प्रदर्शित करेंगी।
Q4. फ्लेमिंग का वामहस्त नियम (Left-Hand Rule) लिखें।
उत्तर देखें
उत्तर: अपने बाएँ हाथ के अँगूठे, तर्जनी और मध्यमा को इस प्रकार परस्पर लंबवत फैलाएं कि:
• तर्जनी: चुंबकीय क्षेत्र की दिशा दर्शाए,
• मध्यमा: प्रवाहित विद्युत धारा की दिशा दर्शाए,
तो अँगूठा चालक पर लगने वाले चुंबकीय बल (गति की दिशा) को व्यक्त करेगा। (यह नियम विद्युत मोटर में प्रयुक्त होता है)।
• तर्जनी: चुंबकीय क्षेत्र की दिशा दर्शाए,
• मध्यमा: प्रवाहित विद्युत धारा की दिशा दर्शाए,
तो अँगूठा चालक पर लगने वाले चुंबकीय बल (गति की दिशा) को व्यक्त करेगा। (यह नियम विद्युत मोटर में प्रयुक्त होता है)।
Q5. फ्लेमिंग का दक्षिण-हस्त नियम (Right-Hand Rule) लिखें।
उत्तर देखें
उत्तर: अपने दाहिने हाथ के अँगूठे, तर्जनी और मध्यमा को परस्पर लंबवत फैलाएं। यदि तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा और अँगूठा चालक की गति की दिशा को दर्शाए, तो मध्यमा चालक में उत्पन्न प्रेरित विद्युत धारा (Induced Current) की दिशा को दर्शाएगी। (यह नियम विद्युत जनित्र में प्रयुक्त होता है)।
Q6. विद्युत चुंबक (Electromagnet) क्या है? इसके दो उपयोग लिखें।
उत्तर देखें
उत्तर: जब किसी नर्म लोहे की छड़ (क्रोड) पर विद्युत-रोधी तांबे के तार को लपेटकर उसमें विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो वह एक शक्तिशाली अस्थायी चुंबक बन जाता है, जिसे विद्युत चुंबक कहते हैं।
उपयोग:
1. विद्युत घंटी (Electric Bell) तथा लाउडस्पीकर में।
2. क्रेन द्वारा भारी लोहे के कचरे और स्क्रेप को उठाने में।
उपयोग:
1. विद्युत घंटी (Electric Bell) तथा लाउडस्पीकर में।
2. क्रेन द्वारा भारी लोहे के कचरे और स्क्रेप को उठाने में।
Q7. स्थायी चुंबक और विद्युत चुंबक में दो अंतर लिखें।
उत्तर देखें
उत्तर:
1. स्थायी चुंबक: यह कार्बन-इस्पात या मिश्रधातु का बना होता है और इसका चुंबकत्व हमेशा बना रहता है (धारा बंद करने पर भी खत्म नहीं होता)। इसकी शक्ति नियत रहती है।
2. विद्युत चुंबक: यह नर्म लोहे का बना होता है और इसका चुंबकत्व धारा प्रवाहित होने तक ही रहता है। धारा का मान बढ़ाकर इसकी शक्ति बदली जा सकती है।
1. स्थायी चुंबक: यह कार्बन-इस्पात या मिश्रधातु का बना होता है और इसका चुंबकत्व हमेशा बना रहता है (धारा बंद करने पर भी खत्म नहीं होता)। इसकी शक्ति नियत रहती है।
2. विद्युत चुंबक: यह नर्म लोहे का बना होता है और इसका चुंबकत्व धारा प्रवाहित होने तक ही रहता है। धारा का मान बढ़ाकर इसकी शक्ति बदली जा सकती है।
Q8. परिनालिका (Solenoid) क्या है? इसका उपयोग किसमें होता है?
उत्तर देखें
उत्तर: पास-पास लिपटे विद्युत-रोधी तांबे के तार की बेलनाकार नलिका जैसी अनेक फेरों वाली कुंडली को परिनालिका कहते हैं। धारा प्रवाहित करने पर इसका व्यवहार एक छड़ चुंबक जैसा होता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से विद्युत चुंबक बनाने में किया जाता है।
Q9. विद्युत चुम्बकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) से क्या समझते हैं?
उत्तर देखें
उत्तर: जब किसी कुंडली और चुंबक के बीच आपेक्षिक गति कराई जाती है, तो कुंडली से जुड़े चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है। इस परिवर्तन के कारण कुंडली में एक विद्युत वाहक बल (विद्युत धारा) उत्पन्न हो जाता है। इस परिघटना को विद्युत चुम्बकीय प्रेरण कहते हैं।
Q10. दिष्ट धारा (DC) और प्रत्यावर्ती धारा (AC) में क्या अंतर है?
उत्तर देखें
उत्तर:
• दिष्ट धारा (DC): वह विद्युत धारा जिसकी दिशा समय के साथ नहीं बदलती और हमेशा एक ही दिशा में बहती है (जैसे बैटरी या सेल से प्राप्त धारा)।
• प्रत्यावर्ती धारा (AC): वह विद्युत धारा जिसकी दिशा और परिमाण एक निश्चित समय अंतराल के बाद आवर्ती रूप से बदलते रहते हैं (जैसे पावर हाउस से प्राप्त 50 Hz वाली धारा)।
• दिष्ट धारा (DC): वह विद्युत धारा जिसकी दिशा समय के साथ नहीं बदलती और हमेशा एक ही दिशा में बहती है (जैसे बैटरी या सेल से प्राप्त धारा)।
• प्रत्यावर्ती धारा (AC): वह विद्युत धारा जिसकी दिशा और परिमाण एक निश्चित समय अंतराल के बाद आवर्ती रूप से बदलते रहते हैं (जैसे पावर हाउस से प्राप्त 50 Hz वाली धारा)।
Q11. AC करंट DC करंट की तुलना में अधिक लाभदायक क्यों माना जाता है?
उत्तर देखें
उत्तर: प्रत्यावर्ती धारा (AC) को ट्रांसफार्मर की सहायता से उच्च या निम्न वोल्टेज पर आसानी से बदला जा सकता है। इससे विद्युत ऊर्जा को दूर-दराज के स्थानों तक बिना अधिक ऊर्जा हानि (Power Loss) के बहुत कम खर्च पर भेजा जा सकता है।
Q12. विद्युत मोटर का क्या सिद्धांत है?
उत्तर देखें
उत्तर: विद्युत मोटर इस सिद्धांत पर कार्य करती है कि जब किसी धारावाही कुंडली को किसी चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो उस पर एक चुंबकीय बल आघूर्ण (Torque) कार्य करता है, जो कुंडली को लगातार अपने अक्ष पर घुमाता है। यह विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलती है।
Q13. विद्युत मोटर में विभक्त वलय (Split Ring / Commutator) का क्या कार्य है?
उत्तर देखें
उत्तर: विभक्त वलय विद्युत मोटर में एक दिक-परिवर्तक (Commutator) का कार्य करता है। यह प्रत्येक आधे घूर्णन के बाद कुंडली में प्रवाहित होने वाली धारा की दिशा को उलट देता है, जिससे कुंडली लगातार एक ही दिशा में घूमती रहती है।
Q14. गैल्वेनोमीटर को आमीटर में कैसे बदला जाता है?
उत्तर देखें
उत्तर: गैल्वेनोमीटर की कुंडली के साथ समांतरक्रम (Parallel) में एक बहुत कम प्रतिरोध का तार (जिसे शंट - Shunt कहते हैं) जोड़कर इसे आमीटर में बदला जाता है।
Q15. गैल्वेनोमीटर को वोल्टमीटर में कैसे रूपांतरित किया जाता है?
उत्तर देखें
उत्तर: गैल्वेनोमीटर की कुंडली के साथ श्रेणीक्रम (Series) में एक बहुत उच्च मान का प्रतिरोध जोड़कर इसे वोल्टमीटर में रूपांतरित किया जाता है।
Q16. घरेलू वायरिंग में तीन तारों के रंग और उनके नाम क्या हैं?
उत्तर देखें
उत्तर:
1. लाल रंग: विद्युन्मय तार (Live Wire / 220 V)
2. काला रंग: उदासीन तार (Neutral Wire / 0 V)
3. हरा रंग: भू-संपर्क तार (Earth Wire / सुरक्षा तार)
1. लाल रंग: विद्युन्मय तार (Live Wire / 220 V)
2. काला रंग: उदासीन तार (Neutral Wire / 0 V)
3. हरा रंग: भू-संपर्क तार (Earth Wire / सुरक्षा तार)
Q17. अर्थिंग (भू-संपर्कन) क्यों जरूरी है?
उत्तर देखें
उत्तर: धातु की बॉडी वाले उपकरणों (जैसे फ्रिज, कूलर, प्रेस) में यदि आंतरिक रूप से कोई तार कटकर धातु की बॉडी को छू जाए, तो अर्थिंग अतिरिक्त लीकेज करंट को सीधे जमीन में भेज देती है। इससे उपकरण छूने वाले व्यक्ति को घातक बिजली का झटका नहीं लगता।
Q18. लघुपथन (Short Circuit) के क्या खतरे हैं और इससे कैसे बचा जाता है?
उत्तर देखें
उत्तर: लघुपथन होने पर तारों में अत्यधिक उच्च धारा बहती है जिससे बहुत अधिक चिंगारी और ऊष्मा उत्पन्न होती है, जिससे आग लगने का खतरा रहता है। इससे बचाव के लिए परिपथ में उचित क्षमता का फ्यूज तार या MCB (Miniature Circuit Breaker) लगाया जाता है।
Q19. आर्मेचर (Armature) क्या है?
उत्तर देखें
उत्तर: विद्युत मोटर और जनित्र में नर्म लोहे के क्रोड पर तांबे के विद्युतरोधी तारों को लपेटकर बनाई गई आयताकार कुंडली को आर्मेचर कहते हैं। यह चुंबकीय क्षेत्र के अंदर तेजी से घूर्णन करता है।
Q20. किसी छड़ चुंबक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं कैसे खींची जाती हैं?
उत्तर देखें
उत्तर: एक ड्राइंग बोर्ड पर कागज लगाकर बीच में छड़ चुंबक रखा जाता है। फिर एक छोटी चुंबकीय दिक्सूची (Compass) को चुंबक के उत्तरी ध्रुव के पास रखते हैं और सुई के दोनों सिरों पर पेंसिल से बिंदु लगाते हुए सुई को आगे बढ़ाते हैं। इन बिंदुओं को मिलाने पर एक सतत वक्र रेखा बनती है जो चुंबकीय क्षेत्र रेखा कहलाती है।
महत्वपूर्ण दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 Marks)
Q1. विद्युत मोटर का सिद्धांत, संरचना और कार्यविधि का सचित्र वर्णन करें।
विस्तृत उत्तर देखें
1. सिद्धांत:
विद्युत मोटर इस सिद्धांत पर कार्य करती है कि जब किसी चुंबकीय क्षेत्र में रखी धारावाही आयताकार कुंडली में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो फ्लेमिंग के वामहस्त नियम के अनुसार कुंडली की भुजाओं पर बराबर और विपरीत दिशा में बल लगते हैं। यह बलयुग्म कुंडली को निरंतर घुमाता है। (यह विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलती है)।
2. मुख्य भाग:
• क्षेत्र चुंबक (Field Magnet): शक्तिशाली स्थाई चुंबक जिसके ध्रुव N और S होते हैं।
• आर्मेचर (Armature): नर्म लोहे के क्रोड पर लिपटी तांबे के तार की आयताकार कुंडली (ABCD)।
• विभक्त वलय (Split Rings / Commutator): पीतल के दो अर्धवृत्ताकार वलय जो धारा की दिशा बदलते हैं।
• कार्बन ब्रश (Carbon Brushes): बाहरी बैटरी से धारा को विभक्त वलय तक पहुँचाने वाले स्थिर ब्रश।
3. कार्यविधि:
जब कुंडली ABCD में धारा प्रवाहित होती है, तो भुजा AB पर नीचे की ओर और भुजा CD पर ऊपर की ओर बल लगता है, जिससे कुंडली दक्षिणावर्त (Clockwise) घूमती है। आधे चक्कर के बाद विभक्त वलय के कारण धारा की दिशा उलट जाती है, जिससे कुंडली उसी दिशा में लगातार घूमती रहती है।
विद्युत मोटर इस सिद्धांत पर कार्य करती है कि जब किसी चुंबकीय क्षेत्र में रखी धारावाही आयताकार कुंडली में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो फ्लेमिंग के वामहस्त नियम के अनुसार कुंडली की भुजाओं पर बराबर और विपरीत दिशा में बल लगते हैं। यह बलयुग्म कुंडली को निरंतर घुमाता है। (यह विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलती है)।
2. मुख्य भाग:
• क्षेत्र चुंबक (Field Magnet): शक्तिशाली स्थाई चुंबक जिसके ध्रुव N और S होते हैं।
• आर्मेचर (Armature): नर्म लोहे के क्रोड पर लिपटी तांबे के तार की आयताकार कुंडली (ABCD)।
• विभक्त वलय (Split Rings / Commutator): पीतल के दो अर्धवृत्ताकार वलय जो धारा की दिशा बदलते हैं।
• कार्बन ब्रश (Carbon Brushes): बाहरी बैटरी से धारा को विभक्त वलय तक पहुँचाने वाले स्थिर ब्रश।
3. कार्यविधि:
जब कुंडली ABCD में धारा प्रवाहित होती है, तो भुजा AB पर नीचे की ओर और भुजा CD पर ऊपर की ओर बल लगता है, जिससे कुंडली दक्षिणावर्त (Clockwise) घूमती है। आधे चक्कर के बाद विभक्त वलय के कारण धारा की दिशा उलट जाती है, जिससे कुंडली उसी दिशा में लगातार घूमती रहती है।
[ यहाँ विद्युत मोटर का नामांकित किरण आरेख रहेगा ]
Q2. प्रत्यावर्ती धारा जनित्र (AC Generator / Dynamo) की बनावट और कार्यप्रणाली का सचित्र वर्णन करें।
विस्तृत उत्तर देखें
1. सिद्धांत:
विद्युत जनित्र विद्युत चुम्बकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) के सिद्धांत पर कार्य करता है। जब किसी शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र में एक चालक कुंडली को यांत्रिक रूप से घुमाया जाता है, तो उससे संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होने के कारण कुंडली में प्रेरित विद्युत धारा उत्पन्न होती है।
2. मुख्य भाग:
• क्षेत्र चुंबक: चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करने वाला चुंबक।
• आर्मेचर: घूर्णन करने वाली कुंडली ABCD।
• सर्पी वलय (Slip Rings): धातु के दो पूर्ण गोलाकार छल्ले (R1, R2) जो कुंडली के सिरों से जुड़े होते हैं।
• कार्बन ब्रश: बाहरी परिपथ को धारा प्रदान करने वाले ब्रश (B1, B2)।
3. कार्यविधि:
जब कुंडली को चुंबकीय क्षेत्र में घुमाया जाता है, तो फ्लेमिंग के दक्षिण-हस्त नियम के अनुसार पहले आधे चक्कर में धारा एक दिशा में (B1 से B2) और अगले आधे चक्कर में धारा विपरीत दिशा में (B2 से B1) बहती है। इस प्रकार बाहरी परिपथ में प्रत्यावर्ती धारा (AC) प्राप्त होती है।
विद्युत जनित्र विद्युत चुम्बकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) के सिद्धांत पर कार्य करता है। जब किसी शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र में एक चालक कुंडली को यांत्रिक रूप से घुमाया जाता है, तो उससे संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होने के कारण कुंडली में प्रेरित विद्युत धारा उत्पन्न होती है।
2. मुख्य भाग:
• क्षेत्र चुंबक: चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करने वाला चुंबक।
• आर्मेचर: घूर्णन करने वाली कुंडली ABCD।
• सर्पी वलय (Slip Rings): धातु के दो पूर्ण गोलाकार छल्ले (R1, R2) जो कुंडली के सिरों से जुड़े होते हैं।
• कार्बन ब्रश: बाहरी परिपथ को धारा प्रदान करने वाले ब्रश (B1, B2)।
3. कार्यविधि:
जब कुंडली को चुंबकीय क्षेत्र में घुमाया जाता है, तो फ्लेमिंग के दक्षिण-हस्त नियम के अनुसार पहले आधे चक्कर में धारा एक दिशा में (B1 से B2) और अगले आधे चक्कर में धारा विपरीत दिशा में (B2 से B1) बहती है। इस प्रकार बाहरी परिपथ में प्रत्यावर्ती धारा (AC) प्राप्त होती है।
[ यहाँ AC जनित्र का नामांकित किरण आरेख रहेगा ]
Q3. विद्युत चुम्बकीय प्रेरण से संबंधित फैराडे के प्रयोगों और नियमों की विस्तृत व्याख्या करें।
विस्तृत उत्तर देखें
1. फैराडे का प्रयोग:
माइकल फैराडे ने एक तार की कुंडली को गैल्वेनोमीटर से जोड़ा और उसके पास एक छड़ चुंबक को तेजी से आगे-पीछे किया। उन्होंने देखा कि जब तक चुंबक और कुंडली के बीच सापेक्ष गति रहती है, गैल्वेनोमीटर में विक्षेप (धारा) दिखाई देता है। चुंबक को स्थिर करने पर धारा शून्य हो जाती है।
2. फैराडे के नियम:
• प्रथम नियम: जब भी किसी बंद कुंडली से होकर गुजरने वाले चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है, तो कुंडली में एक विद्युत वाहक बल (प्रेरित धारा) उत्पन्न होता है। यह धारा तब तक ही रहती है जब तक फ्लक्स में परिवर्तन जारी रहता है।
• द्वितीय नियम: कुंडली में उत्पन्न प्रेरित विद्युत वाहक बल का मान चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की दर के समानुपाती होता है। (e ∝ -dΦ/dt)
माइकल फैराडे ने एक तार की कुंडली को गैल्वेनोमीटर से जोड़ा और उसके पास एक छड़ चुंबक को तेजी से आगे-पीछे किया। उन्होंने देखा कि जब तक चुंबक और कुंडली के बीच सापेक्ष गति रहती है, गैल्वेनोमीटर में विक्षेप (धारा) दिखाई देता है। चुंबक को स्थिर करने पर धारा शून्य हो जाती है।
2. फैराडे के नियम:
• प्रथम नियम: जब भी किसी बंद कुंडली से होकर गुजरने वाले चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है, तो कुंडली में एक विद्युत वाहक बल (प्रेरित धारा) उत्पन्न होता है। यह धारा तब तक ही रहती है जब तक फ्लक्स में परिवर्तन जारी रहता है।
• द्वितीय नियम: कुंडली में उत्पन्न प्रेरित विद्युत वाहक बल का मान चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की दर के समानुपाती होता है। (e ∝ -dΦ/dt)
Q4. एक धारावाही परिनालिका (Solenoid) के कारण उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र का वर्णन करें तथा इसकी तुलना छड़ चुंबक से करें।
विस्तृत उत्तर देखें
1. परिनालिका का चुंबकीय क्षेत्र:
जब किसी परिनालिका में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो इसके चारों ओर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं का प्रतिरूप बिल्कुल एक छड़ चुंबक जैसा होता है। परिनालिका का एक सिरा उत्तरी ध्रुव (N) तथा दूसरा सिरा दक्षिणी ध्रुव (S) की भांति व्यवहार करता है।
• परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं समांतर और सीधी होती हैं, जो दर्शाती हैं कि इसके अंदर चुंबकीय क्षेत्र सभी बिंदुओं पर एकसमान (Uniform) होता है।
2. छड़ चुंबक से समानता:
• दोनों के दो ध्रुव (N और S) होते हैं।
• दोनों स्वतंत्रतापूर्वक लटकाने पर उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरते हैं।
• दोनों चुंबकीय पदार्थों (लोहा, निकेल) को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।
3. अंतर:
परिनालिका का चुंबकत्व धारा के मान और दिशा पर निर्भर करता है (अस्थायी है), जबकि छड़ चुंबक का चुंबकत्व स्थायी होता है।
जब किसी परिनालिका में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो इसके चारों ओर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं का प्रतिरूप बिल्कुल एक छड़ चुंबक जैसा होता है। परिनालिका का एक सिरा उत्तरी ध्रुव (N) तथा दूसरा सिरा दक्षिणी ध्रुव (S) की भांति व्यवहार करता है।
• परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं समांतर और सीधी होती हैं, जो दर्शाती हैं कि इसके अंदर चुंबकीय क्षेत्र सभी बिंदुओं पर एकसमान (Uniform) होता है।
2. छड़ चुंबक से समानता:
• दोनों के दो ध्रुव (N और S) होते हैं।
• दोनों स्वतंत्रतापूर्वक लटकाने पर उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरते हैं।
• दोनों चुंबकीय पदार्थों (लोहा, निकेल) को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।
3. अंतर:
परिनालिका का चुंबकत्व धारा के मान और दिशा पर निर्भर करता है (अस्थायी है), जबकि छड़ चुंबक का चुंबकत्व स्थायी होता है।
Q5. घरेलू विद्युत परिपथ में होने वाली दुर्घटनाओं (शॉर्ट सर्किट एवं ओवरलोडिंग) के कारणों और इनसे बचाव के सुरक्षा उपायों का विस्तार से वर्णन करें।
विस्तृत उत्तर देखें
1. दुर्घटनाओं के मुख्य कारण:
• लघुपथन (Short Circuit): तारों का इंसुलेशन (प्लास्टिक कवर) खराब होने से जब गर्म तार (Live wire) और ठंडा तार (Neutral wire) सीधे आपस में छू जाते हैं, तो प्रतिरोध शून्य होकर अत्यधिक धारा बहने लगती है।
• अतिभारण (Overloading): जब एक ही सर्किट या सॉकेट से बहुत सारे अधिक पावर वाले उपकरण (हीटर, एसी, गीजर) एक साथ चला दिए जाते हैं, तो खींची जाने वाली धारा लाइन की क्षमता से बढ़ जाती है।
2. बचाव के सुरक्षा उपाय:
• विद्युत फ्यूज एवं MCB का उपयोग: परिपथ के फेज तार में उचित रेटिंग का फ्यूज या MCB लगाना चाहिए ताकि धारा बढ़ते ही सर्किट कट जाए।
• उचित अर्थिंग (भू-संपर्कन): सभी 3-पिन प्लग वाले उपकरणों की धातु बॉडी को अर्थ वायर से जोड़ना चाहिए।
• गुणवत्तायुक्त तार एवं स्विच: ISI मार्क वाले अच्छे इंसुलेशन वाले तारों का उपयोग करना चाहिए।
• लघुपथन (Short Circuit): तारों का इंसुलेशन (प्लास्टिक कवर) खराब होने से जब गर्म तार (Live wire) और ठंडा तार (Neutral wire) सीधे आपस में छू जाते हैं, तो प्रतिरोध शून्य होकर अत्यधिक धारा बहने लगती है।
• अतिभारण (Overloading): जब एक ही सर्किट या सॉकेट से बहुत सारे अधिक पावर वाले उपकरण (हीटर, एसी, गीजर) एक साथ चला दिए जाते हैं, तो खींची जाने वाली धारा लाइन की क्षमता से बढ़ जाती है।
2. बचाव के सुरक्षा उपाय:
• विद्युत फ्यूज एवं MCB का उपयोग: परिपथ के फेज तार में उचित रेटिंग का फ्यूज या MCB लगाना चाहिए ताकि धारा बढ़ते ही सर्किट कट जाए।
• उचित अर्थिंग (भू-संपर्कन): सभी 3-पिन प्लग वाले उपकरणों की धातु बॉडी को अर्थ वायर से जोड़ना चाहिए।
• गुणवत्तायुक्त तार एवं स्विच: ISI मार्क वाले अच्छे इंसुलेशन वाले तारों का उपयोग करना चाहिए।
Q6. दिष्ट धारा (DC) जनित्र की बनावट, सिद्धांत तथा कार्यविधि का वर्णन करें। यह AC जनित्र से किस प्रकार भिन्न है?
विस्तृत उत्तर देखें
1. सिद्धांत एवं बनावट:
DC जनित्र भी विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करता है। इसकी संरचना लगभग AC जनित्र जैसी ही होती है, परंतु इसमें दो पूर्ण सर्पी वलयों (Slip rings) के स्थान पर विभक्त वलय (Split rings / Commutator) का उपयोग किया जाता है।
2. कार्यविधि:
जब आर्मेचर कुंडली को चुंबकीय क्षेत्र में घुमाया जाता है, तो उसमें प्रेरित धारा उत्पन्न होती है। विभक्त वलय प्रत्येक आधे घूर्णन के बाद बाहरी परिपथ के साथ ब्रशों का संपर्क इस प्रकार बदलते हैं कि बाहरी परिपथ में धारा की दिशा हमेशा एक ही बनी रहती है, जिससे हमें शुद्ध दिष्ट धारा (DC) प्राप्त होती है।
3. AC और DC जनित्र में मुख्य अंतर:
• AC जनित्र में सर्पी वलय (पूर्ण छल्ले) होते हैं, जिससे बाहरी परिपथ में प्रत्यावर्ती धारा मिलती है।
• DC जनित्र में विभक्त वलय (दिक-परिवर्तक) होते हैं, जिससे बाहरी परिपथ में केवल एक ही दिशा में दिष्ट धारा मिलती है।
DC जनित्र भी विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करता है। इसकी संरचना लगभग AC जनित्र जैसी ही होती है, परंतु इसमें दो पूर्ण सर्पी वलयों (Slip rings) के स्थान पर विभक्त वलय (Split rings / Commutator) का उपयोग किया जाता है।
2. कार्यविधि:
जब आर्मेचर कुंडली को चुंबकीय क्षेत्र में घुमाया जाता है, तो उसमें प्रेरित धारा उत्पन्न होती है। विभक्त वलय प्रत्येक आधे घूर्णन के बाद बाहरी परिपथ के साथ ब्रशों का संपर्क इस प्रकार बदलते हैं कि बाहरी परिपथ में धारा की दिशा हमेशा एक ही बनी रहती है, जिससे हमें शुद्ध दिष्ट धारा (DC) प्राप्त होती है।
3. AC और DC जनित्र में मुख्य अंतर:
• AC जनित्र में सर्पी वलय (पूर्ण छल्ले) होते हैं, जिससे बाहरी परिपथ में प्रत्यावर्ती धारा मिलती है।
• DC जनित्र में विभक्त वलय (दिक-परिवर्तक) होते हैं, जिससे बाहरी परिपथ में केवल एक ही दिशा में दिष्ट धारा मिलती है।
[ यहाँ DC जनित्र का नामांकित किरण आरेख रहेगा ]
Q7. किसी चुंबकीय क्षेत्र में स्थित धारावाही चालक पर लगने वाले बल का व्यंजक (F = I L B sinθ) समझाइए तथा यह किन-किन बातों पर निर्भर करता है?
विस्तृत उत्तर देखें
1. चालक पर लगने वाले बल की निर्भरता:
प्रयोगों द्वारा यह सिद्ध होता है कि चुंबकीय क्षेत्र में रखे चालक पर लगने वाला बल (F):
• चालक में प्रवाहित विद्युत धारा (I) के समानुपाती होता है: F ∝ I
• चालक की लंबाई (L) के समानुपाती होता है: F ∝ L
• चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता (B) के समानुपाती होता है: F ∝ B
• चालक और चुंबकीय क्षेत्र के बीच के कोण की ज्या (sinθ) के समानुपाती होता है: F ∝ sinθ
2. कुल सूत्र:
इन सभी को मिलाने पर: F = I L B sinθ
3. विशेष स्थितियाँ:
• यदि चालक चुंबकीय क्षेत्र के समांतर हो (θ = 0°), तो F = 0 (कोई बल नहीं लगेगा)।
• यदि चालक चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत हो (θ = 90°), तो F = I L B (अधिकतम बल लगेगा)।
प्रयोगों द्वारा यह सिद्ध होता है कि चुंबकीय क्षेत्र में रखे चालक पर लगने वाला बल (F):
• चालक में प्रवाहित विद्युत धारा (I) के समानुपाती होता है: F ∝ I
• चालक की लंबाई (L) के समानुपाती होता है: F ∝ L
• चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता (B) के समानुपाती होता है: F ∝ B
• चालक और चुंबकीय क्षेत्र के बीच के कोण की ज्या (sinθ) के समानुपाती होता है: F ∝ sinθ
2. कुल सूत्र:
इन सभी को मिलाने पर: F = I L B sinθ
3. विशेष स्थितियाँ:
• यदि चालक चुंबकीय क्षेत्र के समांतर हो (θ = 0°), तो F = 0 (कोई बल नहीं लगेगा)।
• यदि चालक चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत हो (θ = 90°), तो F = I L B (अधिकतम बल लगेगा)।
Q8. विद्युत चुंबक क्या है? एक शक्तिशाली विद्युत चुंबक कैसे बनाया जाता है? इसके निर्माण और शक्ति को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन करें।
विस्तृत उत्तर देखें
1. निर्माण विधि:
एक नरम लोहे की बेलनाकार छड़ (क्रोड) लेते हैं और उसके ऊपर विद्युत-रोधी (इंसुलेटेड) तांबे के तार को पास-पास लपेटकर कुंडली बना देते हैं। जब इस कुंडली के दोनों सिरों को किसी बैटरी और कुंजी से जोड़कर धारा प्रवाहित की जाती है, तो नरम लोहे की छड़ एक अत्यंत शक्तिशाली विद्युत चुंबक बन जाती है।
2. विद्युत चुंबक की शक्ति बढ़ाने वाले कारक:
• फेरों की संख्या (N): कुंडली में तांबे के तार के फेरों की संख्या जितनी अधिक होगी, चुंबक उतना ही शक्तिशाली होगा।
• विद्युत धारा (I): कुंडली में प्रवाहित धारा का मान बढ़ाने से चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता बढ़ती है।
• क्रोड का पदार्थ: स्टील की तुलना में नरम लोहे का क्रोड प्रयोग करने पर चुंबकत्व बहुत अधिक तीव्र और शीघ्र समाप्त होने वाला (नियंत्रित) बनता है।
एक नरम लोहे की बेलनाकार छड़ (क्रोड) लेते हैं और उसके ऊपर विद्युत-रोधी (इंसुलेटेड) तांबे के तार को पास-पास लपेटकर कुंडली बना देते हैं। जब इस कुंडली के दोनों सिरों को किसी बैटरी और कुंजी से जोड़कर धारा प्रवाहित की जाती है, तो नरम लोहे की छड़ एक अत्यंत शक्तिशाली विद्युत चुंबक बन जाती है।
2. विद्युत चुंबक की शक्ति बढ़ाने वाले कारक:
• फेरों की संख्या (N): कुंडली में तांबे के तार के फेरों की संख्या जितनी अधिक होगी, चुंबक उतना ही शक्तिशाली होगा।
• विद्युत धारा (I): कुंडली में प्रवाहित धारा का मान बढ़ाने से चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता बढ़ती है।
• क्रोड का पदार्थ: स्टील की तुलना में नरम लोहे का क्रोड प्रयोग करने पर चुंबकत्व बहुत अधिक तीव्र और शीघ्र समाप्त होने वाला (नियंत्रित) बनता है।
[ यहाँ विद्युत चुंबक की संरचना का किरण आरेख रहेगा ]
Q9. किसी वृत्ताकार पाश (Circular Loop) में प्रवाहित विद्युत धारा के कारण उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र का सचित्र वर्णन करें। केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र किन बातों पर निर्भर करता है?
विस्तृत उत्तर देखें
1. चुंबकीय क्षेत्र का प्रतिरूप:
जब किसी वृत्ताकार चालक पाश (लूप) में विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो तार के प्रत्येक छोटे हिस्से के चारों ओर संकेंद्री वृत्तों के रूप में चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं बनती हैं। जैसे-जैसे हम तार से लूप के केंद्र की ओर बढ़ते हैं, ये वृत्त बड़े होते जाते हैं और केंद्र पर पहुँचकर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं बिल्कुल सीधी और समांतर हो जाती हैं।
2. केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र की निर्भरता:
• प्रवाहित धारा (I) के अनुक्रमानुपाती होता है (B ∝ I)।
• पाश की त्रिज्या (r) के व्युत्क्रमानुपाती होता है (B ∝ 1/r)।
• यदि कुंडली में n फेरे हों, तो चुंबकीय क्षेत्र n गुना बढ़ जाता है (B ∝ n) क्योंकि प्रत्येक फेरे में धारा की दिशा समान होती है।
जब किसी वृत्ताकार चालक पाश (लूप) में विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो तार के प्रत्येक छोटे हिस्से के चारों ओर संकेंद्री वृत्तों के रूप में चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं बनती हैं। जैसे-जैसे हम तार से लूप के केंद्र की ओर बढ़ते हैं, ये वृत्त बड़े होते जाते हैं और केंद्र पर पहुँचकर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं बिल्कुल सीधी और समांतर हो जाती हैं।
2. केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र की निर्भरता:
• प्रवाहित धारा (I) के अनुक्रमानुपाती होता है (B ∝ I)।
• पाश की त्रिज्या (r) के व्युत्क्रमानुपाती होता है (B ∝ 1/r)।
• यदि कुंडली में n फेरे हों, तो चुंबकीय क्षेत्र n गुना बढ़ जाता है (B ∝ n) क्योंकि प्रत्येक फेरे में धारा की दिशा समान होती है।
[ यहाँ वृत्ताकार लूप के चुंबकीय क्षेत्र का आरेख रहेगा ]
Q10. घरेलू वायरिंग व्यवस्था में फ्यूज, अर्थ वायर और स्विच को किस तार से जोड़ा जाता है और क्यों? विस्तार से समझाएं।
विस्तृत उत्तर देखें
1. स्विच का संयोजन:
स्विच को हमेशा विद्युन्मय तार (Live Wire) के साथ जोड़ा जाता है। यदि स्विच को न्यूट्रल तार से जोड़ दिया जाए, तो स्विच बंद होने पर भी उपकरण में 220 V का करंट बना रहेगा, जिससे मरम्मत करते समय घातक झटका लग सकता है।
2. विद्युत फ्यूज का संयोजन:
फ्यूज को भी हमेशा विद्युन्मय तार (Live Wire) के श्रेणीक्रम में लगाया जाता है ताकि शॉर्ट सर्किट या ओवरलोडिंग के समय लाइन तुरंत कट जाए और घर के उपकरण सुरक्षित रहें।
3. भू-संपर्क तार (Earth Wire) का संयोजन:
इसे सीधे धातु के आवरण वाले उपकरणों की बॉडी से जोड़कर भूमिगत प्लेट से जोड़ा जाता है। यह किसी भी लीकेज करंट को शून्य विभव वाली पृथ्वी में सुरक्षित रूप से पहुंचाकर आग लगने और जानलेवा झटके के खतरे को टालता है।
स्विच को हमेशा विद्युन्मय तार (Live Wire) के साथ जोड़ा जाता है। यदि स्विच को न्यूट्रल तार से जोड़ दिया जाए, तो स्विच बंद होने पर भी उपकरण में 220 V का करंट बना रहेगा, जिससे मरम्मत करते समय घातक झटका लग सकता है।
2. विद्युत फ्यूज का संयोजन:
फ्यूज को भी हमेशा विद्युन्मय तार (Live Wire) के श्रेणीक्रम में लगाया जाता है ताकि शॉर्ट सर्किट या ओवरलोडिंग के समय लाइन तुरंत कट जाए और घर के उपकरण सुरक्षित रहें।
3. भू-संपर्क तार (Earth Wire) का संयोजन:
इसे सीधे धातु के आवरण वाले उपकरणों की बॉडी से जोड़कर भूमिगत प्लेट से जोड़ा जाता है। यह किसी भी लीकेज करंट को शून्य विभव वाली पृथ्वी में सुरक्षित रूप से पहुंचाकर आग लगने और जानलेवा झटके के खतरे को टालता है।
