अध्याय 5: ऊर्जा के स्रोत
VVI Objective Questions (Class 10th Physics)
Q1. निम्नलिखित में से कौन अनवीकरणीय (Non-renewable) ऊर्जा का स्रोत है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) कोयला (जीवाश्म ईंधन)
Q2. सौर सेल (Solar Cell) बनाने के लिए मुख्य रूप से किस तत्व का उपयोग किया जाता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) सिलिकॉन (Silicon)
Q3. बायोगैस (जैव गैस) का मुख्य घटक क्या होता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) मीथेन (CH₄ - लगभग 75%)
Q4. सौर कुकर में भोजन पकाने के लिए किस दर्पण का उपयोग सर्वाधिक उपयुक्त माना जाता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) अवतल दर्पण
Q5. पवन चक्की (Windmill) से विद्युत उत्पन्न करने के लिए पवन की न्यूनतम चाल कितनी होनी चाहिए?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) 15 km/h (लगभग 15 km/h से अधिक)
Q6. 'पवनों का देश' (Country of Winds) किसे कहा जाता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) डेनमार्क (Denmark)
Q7. नाभिकीय ऊर्जा (Nuclear Energy) प्राप्त करने के लिए कौन-सा तत्व आवश्यक है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) यूरेनियम (Uranium)
Q8. जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuel) के जलने से कौन-सी गैस उत्पन्न होती है जो अम्लीय वर्षा का मुख्य कारण है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) सल्फर और नाइट्रोजन के ऑक्साइड
Q9. सौर ऊर्जा को सीधे विद्युत ऊर्जा में बदलने वाली युक्ति को क्या कहते हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) सौर सेल (Solar Cell)
Q10. जल विद्युत संयंत्र (Hydroelectric Plant) किस प्रकार की ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy)
Q11. निम्नलिखित में से कौन बायोगैस ईंधन का स्रोत नहीं है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) नाभिकीय ऊर्जा
Q12. सूर्य में ऊर्जा उत्पन्न होने का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion)
Q13. महासागरीय तापीय ऊर्जा (OTEC) प्राप्त करने के लिए सतह और गहराई के जल के तापमान में कम से कम कितना अंतर होना चाहिए?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) 20°C (लगभग 20°C या अधिक)
Q14. गर्म जल प्राप्त करने के लिए हम सौर जल ऊष्मक (Solar Water Heater) का उपयोग किस दिन नहीं कर सकते?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) बादलों वाले दिन
Q15. भू-तापीय ऊर्जा (Geothermal Energy) किस प्रकार की ऊर्जा है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) पृथ्वी के अंदर की ऊष्मा ऊर्जा
Q16. CNG का मुख्य घटक कौन-सी गैस है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) मीथेन (Methane)
Q17. LPG (रसोई गैस) का प्रमुख घटक क्या है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) ब्यूटेन (Butane)
Q18. नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) अभिक्रिया को नियंत्रित करने के लिए किसका उपयोग मंदक/नियंत्रक के रूप में होता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) कैडमियम की छड़ें (Cadmium Rods)
Q19. टिहरी बांध किस नदी पर बनाया गया है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) गंगा (भागीरथी) नदी
Q20. सरदार सरोवर बांध परियोजना किस नदी पर स्थित है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) नर्मदा नदी
Q21. सौर स्थिरांक (Solar Constant) का सन्निकट मान कितना होता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) 1.4 kW/m²
Q22. निम्नलिखित में से कौन प्रदूषण मुक्त ऊर्जा का सबसे उत्तम स्रोत है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) सौर ऊर्जा
Q23. चारकोल (काठ-कोयला) लकड़ी से बेहतर ईंधन क्यों माना जाता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (D) उपर्युक्त सभी
Q24. तारापुर परमाणु विद्युत संयंत्र (Nuclear Power Plant) भारत के किस राज्य में स्थित है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) महाराष्ट्र
Q25. नरोरा नाभिकीय विद्युत संयंत्र किस राज्य में स्थित है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) उत्तर प्रदेश
Q26. सौर सेलों को आपस में जोड़कर बड़ी क्षमता वाला उपकरण तैयार करने को क्या कहते हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) सौर पैनल (Solar Panel)
Q27. ऊर्जा का अंतिम और सबसे बड़ा प्रत्यक्ष स्रोत कौन-सा है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) सूर्य (Sun)
Q28. हाइड्रोजन गैस को सबसे उत्तम ईंधन क्यों माना जाता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) दोनों (A और B)
Q29. सौर कुकर के बक्से की भीतरी सतह को काले रंग से क्यों रंगा जाता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) ऊष्मा का अधिक अवशोषण करने के लिए
Q30. महासागरीय तरंग ऊर्जा (Wave Energy) उत्पन्न होने का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) समुद्र की सतह पर तेज चलने वाली पवनें
महत्वपूर्ण लघु उत्तरीय प्रश्न (2 Marks)
Q1. ऊर्जा का एक उत्तम स्रोत किसे कहते हैं? इसके दो लक्षण लिखें।
उत्तर देखें
उत्तर: ऊर्जा का उत्तम स्रोत वह है जो प्रति एकांक द्रव्यमान अथवा आयतन अधिक कार्य करे तथा आसानी से उपलब्ध हो।
दो मुख्य लक्षण:
1. जिसका भंडारण तथा परिवहन सरल एवं सुरक्षित हो।
2. जो जलने पर अत्यधिक धुआं या विषैली गैसें उत्पन्न न करे अर्थात पर्यावरण के अनुकूल हो।
दो मुख्य लक्षण:
1. जिसका भंडारण तथा परिवहन सरल एवं सुरक्षित हो।
2. जो जलने पर अत्यधिक धुआं या विषैली गैसें उत्पन्न न करे अर्थात पर्यावरण के अनुकूल हो।
Q2. नवीकरणीय और अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में क्या अंतर है? उदाहरण दें।
उत्तर देखें
उत्तर:
• नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत: वे स्रोत जिनका उपयोग लगातार करने पर भी वे कभी समाप्त नहीं होते और प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा स्वतः पुनः उत्पन्न हो जाते हैं। (उदा. सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल ऊर्जा)।
• अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोत: वे स्रोत जिनके भंडार सीमित हैं और एक बार समाप्त होने के बाद उन्हें पुनः बनने में करोड़ों वर्ष लगते हैं। (उदा. कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस)।
• नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत: वे स्रोत जिनका उपयोग लगातार करने पर भी वे कभी समाप्त नहीं होते और प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा स्वतः पुनः उत्पन्न हो जाते हैं। (उदा. सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल ऊर्जा)।
• अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोत: वे स्रोत जिनके भंडार सीमित हैं और एक बार समाप्त होने के बाद उन्हें पुनः बनने में करोड़ों वर्ष लगते हैं। (उदा. कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस)।
Q3. जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) क्या हैं? इसके जलने से पर्यावरण को क्या नुकसान होता है?
उत्तर देखें
उत्तर: करोड़ों वर्ष पूर्व पृथ्वी के भीतर दबे पेड़-पौधों और मृत जीव-जंतुओं के उच्च ताप तथा दाब के कारण परिवर्तित अवशेषों को जीवाश्म ईंधन (जैसे कोयला, पेट्रोलियम) कहते हैं।
हानियाँ: इनके जलने से कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर और नाइट्रोजन के ऑक्साइड निकलते हैं, जो अम्लीय वर्षा (Acid Rain) तथा ग्लोबल वार्मिंग (ग्रीनहाउस प्रभाव) का कारण बनते हैं।
हानियाँ: इनके जलने से कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर और नाइट्रोजन के ऑक्साइड निकलते हैं, जो अम्लीय वर्षा (Acid Rain) तथा ग्लोबल वार्मिंग (ग्रीनहाउस प्रभाव) का कारण बनते हैं।
Q4. बायोगैस (जैव गैस) को एक उत्तम ईंधन क्यों माना जाता है?
उत्तर देखें
उत्तर: बायोगैस को उत्तम ईंधन मानने के मुख्य कारण:
1. इसमें लगभग 75% तक मीथेन गैस होती है, जिससे इसकी ऊष्मा उत्पादन क्षमता बहुत अधिक होती है।
2. यह बिना धुएं के जलती है, जिससे वायु प्रदूषण नहीं होता और कोई राख भी नहीं बचती।
3. संयंत्र से निकलने वाला अवशिष्ट घोल खेतों के लिए उत्कृष्ट जैविक खाद (नाइट्रोजन व फास्फोरस युक्त) का कार्य करता है।
1. इसमें लगभग 75% तक मीथेन गैस होती है, जिससे इसकी ऊष्मा उत्पादन क्षमता बहुत अधिक होती है।
2. यह बिना धुएं के जलती है, जिससे वायु प्रदूषण नहीं होता और कोई राख भी नहीं बचती।
3. संयंत्र से निकलने वाला अवशिष्ट घोल खेतों के लिए उत्कृष्ट जैविक खाद (नाइट्रोजन व फास्फोरस युक्त) का कार्य करता है।
Q5. सौर सेल (Solar Cell) के क्या लाभ तथा क्या सीमाएं (कमियां) हैं?
उत्तर देखें
उत्तर:
• लाभ: इनमें कोई गतिमान पुर्जा नहीं होता, इनके रखरखाव का खर्च नगण्य है और ये पर्यावरण प्रदूषण किए बिना कार्य करते हैं।
• सीमाएं: सौर सेल बनाने के लिए विशेष ग्रेड का सिलिकॉन महंगा होता है तथा सेलों को परस्पर जोड़ने के लिए चांदी (Silver) का उपयोग होता है, जिससे इसकी प्रारंभिक लागत बहुत अधिक होती है।
• लाभ: इनमें कोई गतिमान पुर्जा नहीं होता, इनके रखरखाव का खर्च नगण्य है और ये पर्यावरण प्रदूषण किए बिना कार्य करते हैं।
• सीमाएं: सौर सेल बनाने के लिए विशेष ग्रेड का सिलिकॉन महंगा होता है तथा सेलों को परस्पर जोड़ने के लिए चांदी (Silver) का उपयोग होता है, जिससे इसकी प्रारंभिक लागत बहुत अधिक होती है।
Q6. पवन ऊर्जा फार्म स्थापित करने की क्या सीमाएं (कठिनाइयां) हैं?
उत्तर देखें
उत्तर: प्रमुख सीमाएं निम्नलिखित हैं:
1. पवन फार्म केवल उन्हीं क्षेत्रों में स्थापित किए जा सकते हैं जहाँ वर्ष के अधिकांश दिनों में हवा की चाल न्यूनतम 15 km/h से अधिक हो।
2. 1 MW विद्युत उत्पादन के लिए लगभग 2 हेक्टेयर बहुत बड़े भू-भाग की आवश्यकता होती है।
3. तूफानों, बारिश और चक्रवात से टावरों तथा पंखों के टूटने का खतरा रहता है।
1. पवन फार्म केवल उन्हीं क्षेत्रों में स्थापित किए जा सकते हैं जहाँ वर्ष के अधिकांश दिनों में हवा की चाल न्यूनतम 15 km/h से अधिक हो।
2. 1 MW विद्युत उत्पादन के लिए लगभग 2 हेक्टेयर बहुत बड़े भू-भाग की आवश्यकता होती है।
3. तूफानों, बारिश और चक्रवात से टावरों तथा पंखों के टूटने का खतरा रहता है।
Q7. सौर कुकर के उपयोग के दो लाभ और दो हानियाँ लिखें।
उत्तर देखें
उत्तर:
• लाभ: 1. इसमें किसी ईंधन का खर्च नहीं होता और प्रदूषण नहीं फैलता। 2. भोजन के पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं।
• हानियाँ: 1. इसका उपयोग रात के समय या बादलों वाले दिनों में नहीं किया जा सकता। 2. इसमें भोजन तलने या रोटियां सेकने का काम नहीं किया जा सकता।
• लाभ: 1. इसमें किसी ईंधन का खर्च नहीं होता और प्रदूषण नहीं फैलता। 2. भोजन के पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं।
• हानियाँ: 1. इसका उपयोग रात के समय या बादलों वाले दिनों में नहीं किया जा सकता। 2. इसमें भोजन तलने या रोटियां सेकने का काम नहीं किया जा सकता।
Q8. नाभिकीय विखंडन और नाभिकीय संलयन में क्या अंतर है?
उत्तर देखें
उत्तर:
• नाभिकीय विखंडन: वह प्रक्रिया जिसमें एक भारी नाभिक (जैसे यूरेनियम-235) पर न्यूट्रॉन की बमबारी करने पर वह दो मध्यम भार वाले नाभिकों में टूटता है और भारी मात्रा में ऊर्जा मुक्त करता है।
• नाभिकीय संलयन: वह प्रक्रिया जिसमें दो हल्के नाभिक (जैसे हाइड्रोजन) अत्यधिक उच्च ताप और दाब पर परस्पर संयुक्त होकर एक भारी नाभिक (हीलियम) बनाते हैं। (यह सूर्य की ऊर्जा का स्रोत है)।
• नाभिकीय विखंडन: वह प्रक्रिया जिसमें एक भारी नाभिक (जैसे यूरेनियम-235) पर न्यूट्रॉन की बमबारी करने पर वह दो मध्यम भार वाले नाभिकों में टूटता है और भारी मात्रा में ऊर्जा मुक्त करता है।
• नाभिकीय संलयन: वह प्रक्रिया जिसमें दो हल्के नाभिक (जैसे हाइड्रोजन) अत्यधिक उच्च ताप और दाब पर परस्पर संयुक्त होकर एक भारी नाभिक (हीलियम) बनाते हैं। (यह सूर्य की ऊर्जा का स्रोत है)।
Q9. भू-तापीय ऊर्जा (Geothermal Energy) क्या है?
उत्तर देखें
उत्तर: भूगर्भीय परिवर्तनों के कारण पृथ्वी के भीतर की गहराई में पिघली हुई चट्टानें कुछ क्षेत्रों में ऊपर धकेल दी जाती हैं जिन्हें 'तप्त स्थल' (Hot spots) कहते हैं। जब भूमिगत जल इन तप्त स्थलों के संपर्क में आता है, तो वह भाप में परिवर्तित हो जाता है। इस उच्च दाबित भाप को पाइपों द्वारा निकालकर टरबाइन चलाकर विद्युत उत्पन्न की जाती है, जिसे भू-तापीय ऊर्जा कहते हैं।
Q10. महासागरीय तापीय ऊर्जा रूपांतरण (OTEC) संयंत्र किस सिद्धांत पर कार्य करता है?
उत्तर देखें
उत्तर: समुद्र की सतह का जल सूर्य द्वारा गर्म होता है, जबकि गहराई में जल ठंडा रहता है। यदि सतह और 2 km तक की गहराई के जल के तापमान में कम से कम 20°C का अंतर हो, तो सतह के गर्म जल का उपयोग अमोनिया जैसे कम क्वथनांक वाले वाष्पशील द्रवों को उबालकर भाप बनाने और उससे टरबाइन चलाकर विद्युत उत्पादन करने में किया जाता है।
Q11. नाभिकीय ऊर्जा के उपयोग से उत्पन्न होने वाले प्रमुख खतरे या हानियाँ क्या हैं?
उत्तर देखें
उत्तर:
1. अपशिष्ट का सुरक्षित निपटारा: नाभिकीय ईंधन के उपयोग के बाद बचे रेडियोधर्मी कचरे का सुरक्षित भंडारण और निपटान अत्यंत कठिन है, क्योंकि इनसे हानिकारक विकिरण निकलते रहते हैं।
2. दुर्घटना का जोखिम: रिएक्टर में किसी भी प्रकार के रिसाव या खराबी से भयंकर परमाणु दुर्घटना और पर्यावरण प्रदूषण का खतरा बना रहता है।
1. अपशिष्ट का सुरक्षित निपटारा: नाभिकीय ईंधन के उपयोग के बाद बचे रेडियोधर्मी कचरे का सुरक्षित भंडारण और निपटान अत्यंत कठिन है, क्योंकि इनसे हानिकारक विकिरण निकलते रहते हैं।
2. दुर्घटना का जोखिम: रिएक्टर में किसी भी प्रकार के रिसाव या खराबी से भयंकर परमाणु दुर्घटना और पर्यावरण प्रदूषण का खतरा बना रहता है।
Q12. ज्वारीय ऊर्जा (Tidal Energy) क्या है और इसका दोहन कैसे किया जाता है?
उत्तर देखें
उत्तर: चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव के कारण समुद्र के जलस्तर का चढ़ना (ज्वार) और गिरना (भाटा) होता है। समुद्र के संकीर्ण मुहाने पर बांध बनाकर ज्वार-भाटे के समय जल के प्रवाह से टरबाइन घुमाकर विद्युत उत्पन्न की जाती है, जिसे ज्वारीय ऊर्जा कहते हैं।
Q13. चारकोल को लकड़ी की तुलना में एक बेहतर ईंधन क्यों माना जाता है?
उत्तर देखें
उत्तर: लकड़ी को सीमित वायु में जलाने पर चारकोल प्राप्त होता है। यह बेहतर इसलिए है क्योंकि:
1. इसका ऊष्मीय मान (Calorific value) लकड़ी से बहुत अधिक होता है।
2. यह बिना ज्वाला और बिना धुएं के जलता है, जिससे वायु प्रदूषण नहीं होता।
1. इसका ऊष्मीय मान (Calorific value) लकड़ी से बहुत अधिक होता है।
2. यह बिना ज्वाला और बिना धुएं के जलता है, जिससे वायु प्रदूषण नहीं होता।
Q14. सौर पैनल (Solar Panel) क्या है? इसके दो प्रमुख उपयोग लिखें।
उत्तर देखें
उत्तर: जब अत्यधिक संख्या में सौर सेलों को एक निश्चित क्रम में आपस में जोड़कर एक बड़ी व्यवस्था बनाई जाती है, तो उसे सौर पैनल कहते हैं।
उपयोग:
1. कृत्रिम उपग्रहों (Satellites) और अंतरिक्ष अन्वेषण यानों में विद्युत आपूर्ति के लिए।
2. सुदूर ग्रामीण इलाकों में स्ट्रीट लाइट तथा सोलर वाटर पंप चलाने के लिए।
उपयोग:
1. कृत्रिम उपग्रहों (Satellites) और अंतरिक्ष अन्वेषण यानों में विद्युत आपूर्ति के लिए।
2. सुदूर ग्रामीण इलाकों में स्ट्रीट लाइट तथा सोलर वाटर पंप चलाने के लिए।
Q15. जल विद्युत संयंत्र (Hydroelectric Plant) के क्या लाभ हैं?
उत्तर देखें
उत्तर:
1. यह नवीकरणीय और प्रदूषण-मुक्त ऊर्जा का स्रोत है।
2. बांध बनाने से बाढ़ नियंत्रण में सहायता मिलती है और एकत्रित जल का उपयोग सिंचाई तथा मत्स्य पालन में किया जा सकता है।
1. यह नवीकरणीय और प्रदूषण-मुक्त ऊर्जा का स्रोत है।
2. बांध बनाने से बाढ़ नियंत्रण में सहायता मिलती है और एकत्रित जल का उपयोग सिंचाई तथा मत्स्य पालन में किया जा सकता है।
Q16. बड़े बांध बनाने के क्या पर्यावरणीय और सामाजिक दुष्प्रभाव हैं?
उत्तर देखें
उत्तर:
1. बहुत बड़े वन क्षेत्र, कृषि भूमि और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास जलमग्न होकर नष्ट हो जाते हैं।
2. स्थानीय निवासियों और जनजातीय समुदायों का बड़े पैमाने पर विस्थापन होता है तथा उनके पुनर्वास की गंभीर समस्या उत्पन्न होती है।
1. बहुत बड़े वन क्षेत्र, कृषि भूमि और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास जलमग्न होकर नष्ट हो जाते हैं।
2. स्थानीय निवासियों और जनजातीय समुदायों का बड़े पैमाने पर विस्थापन होता है तथा उनके पुनर्वास की गंभीर समस्या उत्पन्न होती है।
Q17. हाइड्रोजन को भविष्य का ईंधन क्यों कहा जाता है?
उत्तर देखें
उत्तर: हाइड्रोजन का कैलोरी मान सभी ईंधनों में सबसे अधिक (लगभग 150 kJ/g) होता है। इसके दहन के उपरांत केवल जलवाष्प बनती है और शून्य प्रदूषण होता है। इसलिए इसे भविष्य का सबसे स्वच्छ ऊर्जा स्रोत माना जाता है।
Q18. सौर कुकर में समतल दर्पण और कांच की शीट का क्या कार्य है?
उत्तर देखें
उत्तर:
• समतल दर्पण: सूर्य की किरणों को परावर्तित करके कुकर के बक्से के भीतर केंद्रित करता है।
• कांच की शीट: यह ग्रीनहाउस प्रभाव पैदा करती है; यह सौर विकिरण को अंदर आने देती है परंतु अवरक्त (ऊष्मा) किरणों को बाहर जाने से रोककर अंदर का तापमान बढ़ाए रखती है।
• समतल दर्पण: सूर्य की किरणों को परावर्तित करके कुकर के बक्से के भीतर केंद्रित करता है।
• कांच की शीट: यह ग्रीनहाउस प्रभाव पैदा करती है; यह सौर विकिरण को अंदर आने देती है परंतु अवरक्त (ऊष्मा) किरणों को बाहर जाने से रोककर अंदर का तापमान बढ़ाए रखती है।
Q19. सौर स्थिरांक (Solar Constant) से क्या समझते हैं?
उत्तर देखें
उत्तर: पृथ्वी के वायुमंडल की बाहरी परिधि पर, सूर्य की किरणों के लंबवत प्रति एकांक क्षेत्रफल पर प्रति सेकंड प्राप्त होने वाली सौर ऊर्जा को सौर स्थिरांक कहते हैं। इसका मान लगभग 1.4 kJ/(s·m²) (या 1.4 kW/m²) होता है।
Q20. ऊर्जा संकट क्या है और इसके समाधान के दो उपाय लिखें।
उत्तर देखें
उत्तर: जनसंख्या वृद्धि और औद्योगिकीकरण के कारण ऊर्जा की मांग में अत्यधिक वृद्धि तथा पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों के तेजी से समाप्त होने की स्थिति को ऊर्जा संकट कहते हैं।
समाधान के उपाय:
1. सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और बायोगैस जैसे गैर-पारंपरिक नवीकरणीय स्रोतों के उपयोग को बढ़ावा देना।
2. ऊर्जा का अपव्यय रोकना और ऊर्जा-दक्ष उपकरणों (जैसे LED बल्ब) का उपयोग करना।
समाधान के उपाय:
1. सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और बायोगैस जैसे गैर-पारंपरिक नवीकरणीय स्रोतों के उपयोग को बढ़ावा देना।
2. ऊर्जा का अपव्यय रोकना और ऊर्जा-दक्ष उपकरणों (जैसे LED बल्ब) का उपयोग करना।
महत्वपूर्ण दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 Marks)
Q1. बायोगैस (गोबर गैस) संयंत्र की संरचना और कार्यप्रणाली का सचित्र वर्णन करें।
विस्तृत उत्तर देखें
1. संरचना:
बायोगैस संयंत्र ईंटों का बना एक गुंबदनुमा ढांचा होता है। इसके मुख्य भाग निम्नलिखित हैं:
• मिश्रण कक्ष (Mixing Tank): जहाँ गोबर और पानी का 1:1 के अनुपात में घोल (Slurry) तैयार किया जाता है।
• संपाचित्र (Digester): यह भूमिगत रूप से बना एक सीलबंद कक्ष होता है जिसमें ऑक्सीजन की उपस्थिति नहीं होती।
• गैस होल्डर (गुंबद): संपाचित्र के ऊपर का गुंबद जहाँ उत्पन्न गैस एकत्रित होती है और गैस वाल्व से जुड़ी होती है।
• निकास कक्ष (Outlet Tank): प्रयुक्त हो चुके अवशिष्ट घोल (Manure) को बाहर निकालने वाला कक्ष।
2. कार्यप्रणाली:
गोबर और जल के मिश्रण को संपाचित्र में डाला जाता है। अवायवीय सूक्ष्मजीव (Anaerobic bacteria) ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में कुछ दिनों में गोबर के जटिल यौगिकों को अपघटित कर देते हैं। इस प्रक्रिया से मीथेन (CH4), कार्बन डाइऑक्साइड (CO2), हाइड्रोजन और हाइड्रोजन सल्फाइड का मिश्रण (बायोगैस) उत्पन्न होता है। प्रयुक्त घोल को खाद के रूप में निकाल लिया जाता है।
बायोगैस संयंत्र ईंटों का बना एक गुंबदनुमा ढांचा होता है। इसके मुख्य भाग निम्नलिखित हैं:
• मिश्रण कक्ष (Mixing Tank): जहाँ गोबर और पानी का 1:1 के अनुपात में घोल (Slurry) तैयार किया जाता है।
• संपाचित्र (Digester): यह भूमिगत रूप से बना एक सीलबंद कक्ष होता है जिसमें ऑक्सीजन की उपस्थिति नहीं होती।
• गैस होल्डर (गुंबद): संपाचित्र के ऊपर का गुंबद जहाँ उत्पन्न गैस एकत्रित होती है और गैस वाल्व से जुड़ी होती है।
• निकास कक्ष (Outlet Tank): प्रयुक्त हो चुके अवशिष्ट घोल (Manure) को बाहर निकालने वाला कक्ष।
2. कार्यप्रणाली:
गोबर और जल के मिश्रण को संपाचित्र में डाला जाता है। अवायवीय सूक्ष्मजीव (Anaerobic bacteria) ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में कुछ दिनों में गोबर के जटिल यौगिकों को अपघटित कर देते हैं। इस प्रक्रिया से मीथेन (CH4), कार्बन डाइऑक्साइड (CO2), हाइड्रोजन और हाइड्रोजन सल्फाइड का मिश्रण (बायोगैस) उत्पन्न होता है। प्रयुक्त घोल को खाद के रूप में निकाल लिया जाता है।
[ यहाँ बायोगैस संयंत्र (गुंबददार ढांचा) का नामांकित आरेख रहेगा ]
Q2. बॉक्सनुमा सौर कुकर (Solar Cooker) की बनावट, सिद्धांत तथा कार्यविधि का सचित्र वर्णन करें।
विस्तृत उत्तर देखें
1. सिद्धांत:
सौर कुकर ग्रीनहाउस प्रभाव (Greenhouse Effect) और काले रंग के ऊष्मा अवशोषण गुण के सिद्धांत पर कार्य करता है। यह सूर्य की प्रकाश ऊर्जा को ऊष्मा ऊर्जा में बदलकर भोजन पकाता है।
2. संरचना:
• रोधी बक्सा: लकड़ी या धातु का एक बक्सा जिसके अंदर का भाग काले रंग से पुता होता है।
• कांच की शीट: बक्से के ऊपरी ढक्कन पर पारदर्शी कांच की दोहरी प्लेट लगी होती है जो ऊष्मा को बाहर निकलने से रोकती है।
• समतल दर्पण (परावर्तक): ढक्कन के साथ लगा एक दर्पण जो सूर्य की किरणों को बक्से के अंदर परावर्तित करता है।
• खाना पकाने वाले डिब्बे: बाहर से काले रंग से रंगे धातु के बर्तन।
3. कार्यविधि:
जब परावर्तक दर्पण द्वारा सूर्य की किरणें कांच के ढक्कन से होकर बक्से में प्रवेश करती हैं, तो काला तल उन्हें अवशोषित कर लेता है। कांच का ढक्कन अवरक्त (ऊष्मा) किरणों को बाहर जाने से रोकता है, जिससे 2–3 घंटे में अंदर का तापमान 100°C से 140°C तक पहुँच जाता है और भोजन पक जाता है।
सौर कुकर ग्रीनहाउस प्रभाव (Greenhouse Effect) और काले रंग के ऊष्मा अवशोषण गुण के सिद्धांत पर कार्य करता है। यह सूर्य की प्रकाश ऊर्जा को ऊष्मा ऊर्जा में बदलकर भोजन पकाता है।
2. संरचना:
• रोधी बक्सा: लकड़ी या धातु का एक बक्सा जिसके अंदर का भाग काले रंग से पुता होता है।
• कांच की शीट: बक्से के ऊपरी ढक्कन पर पारदर्शी कांच की दोहरी प्लेट लगी होती है जो ऊष्मा को बाहर निकलने से रोकती है।
• समतल दर्पण (परावर्तक): ढक्कन के साथ लगा एक दर्पण जो सूर्य की किरणों को बक्से के अंदर परावर्तित करता है।
• खाना पकाने वाले डिब्बे: बाहर से काले रंग से रंगे धातु के बर्तन।
3. कार्यविधि:
जब परावर्तक दर्पण द्वारा सूर्य की किरणें कांच के ढक्कन से होकर बक्से में प्रवेश करती हैं, तो काला तल उन्हें अवशोषित कर लेता है। कांच का ढक्कन अवरक्त (ऊष्मा) किरणों को बाहर जाने से रोकता है, जिससे 2–3 घंटे में अंदर का तापमान 100°C से 140°C तक पहुँच जाता है और भोजन पक जाता है।
[ यहाँ सौर कुकर का नामांकित किरण आरेख रहेगा ]
Q3. जल विद्युत संयंत्र (Hydroelectric Power Plant) द्वारा विद्युत उत्पादन की प्रक्रिया का किरण आरेख सहित वर्णन करें। इसके लाभ और सीमाएं बताएं।
विस्तृत उत्तर देखें
1. कार्यप्रणाली:
नदी पर ऊँचा बांध बनाकर वर्षा जल को जलाशय में संचित किया जाता है, जिससे जल में स्थितिज ऊर्जा आ जाती है। जब बांध के गेट खोलकर पाइपों (Penstock) द्वारा इस पानी को तेजी से नीचे गिराया जाता है, तो स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा में बदल जाती है। यह तीव्र जलप्रवाह टरबाइन की पंखुड़ियों को घुमाता है और टरबाइन से जुड़ा जनित्र (Generator) विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करता है।
2. प्रमुख लाभ:
• यह ऊर्जा का एक प्रदूषण रहित और नवीकरणीय स्रोत है।
• बांधों से बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई की सुविधा मिलती है।
3. मुख्य सीमाएं:
• केवल पर्वतीय या उपयुक्त ढलान वाले सीमित क्षेत्रों में ही बनाए जा सकते हैं।
• विशाल वन क्षेत्र तथा उपजाऊ भूमि जलमग्न हो जाती है और वनस्पतियों के सड़ने से मीथेन गैस निकलती है।
नदी पर ऊँचा बांध बनाकर वर्षा जल को जलाशय में संचित किया जाता है, जिससे जल में स्थितिज ऊर्जा आ जाती है। जब बांध के गेट खोलकर पाइपों (Penstock) द्वारा इस पानी को तेजी से नीचे गिराया जाता है, तो स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा में बदल जाती है। यह तीव्र जलप्रवाह टरबाइन की पंखुड़ियों को घुमाता है और टरबाइन से जुड़ा जनित्र (Generator) विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करता है।
2. प्रमुख लाभ:
• यह ऊर्जा का एक प्रदूषण रहित और नवीकरणीय स्रोत है।
• बांधों से बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई की सुविधा मिलती है।
3. मुख्य सीमाएं:
• केवल पर्वतीय या उपयुक्त ढलान वाले सीमित क्षेत्रों में ही बनाए जा सकते हैं।
• विशाल वन क्षेत्र तथा उपजाऊ भूमि जलमग्न हो जाती है और वनस्पतियों के सड़ने से मीथेन गैस निकलती है।
[ यहाँ जल विद्युत संयंत्र का योजनाबद्ध आरेख रहेगा ]
Q4. नाभिकीय ऊर्जा क्या है? नाभिकीय रिएक्टर में विद्युत उत्पादन की प्रक्रिया समझाइए तथा इसके लाभ और हानियों का उल्लेख करें।
विस्तृत उत्तर देखें
1. नाभिकीय ऊर्जा एवं रिएक्टर की प्रक्रिया:
परमाणु के नाभिक में परिवर्तन (विखंडन या संलयन) से प्राप्त होने वाली विशाल ऊर्जा को नाभिकीय ऊर्जा कहते हैं।
नाभिकीय रिएक्टर में यूरेनियम-235 के विखंडन से भारी मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न होती है। अभिक्रिया को कैडमियम की छड़ों (नियंत्रक) द्वारा नियंत्रित किया जाता है। उत्पन्न ऊष्मा से भारी जल या शीतलक की सहायता से उच्च दाब की भाप बनाई जाती है, जो टरबाइन चलाकर जनित्र द्वारा विद्युत उत्पादन करती है।
2. लाभ:
• बहुत कम ईंधन (जैसे 1 ग्राम यूरेनियम) से अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा उत्पन्न होती है।
• इसके सामान्य संचालन में कोई धुआं या ग्रीनहाउस गैसें नहीं निकलतीं।
3. हानियाँ:
• प्रयुक्त रेडियोधर्मी कचरे का सुरक्षित निपटान अत्यंत चुनौतीपूर्ण है।
• दुर्घटना की स्थिति में रेडियोधर्मी रिसाव से भयंकर जन-धन की हानि हो सकती है।
परमाणु के नाभिक में परिवर्तन (विखंडन या संलयन) से प्राप्त होने वाली विशाल ऊर्जा को नाभिकीय ऊर्जा कहते हैं।
नाभिकीय रिएक्टर में यूरेनियम-235 के विखंडन से भारी मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न होती है। अभिक्रिया को कैडमियम की छड़ों (नियंत्रक) द्वारा नियंत्रित किया जाता है। उत्पन्न ऊष्मा से भारी जल या शीतलक की सहायता से उच्च दाब की भाप बनाई जाती है, जो टरबाइन चलाकर जनित्र द्वारा विद्युत उत्पादन करती है।
2. लाभ:
• बहुत कम ईंधन (जैसे 1 ग्राम यूरेनियम) से अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा उत्पन्न होती है।
• इसके सामान्य संचालन में कोई धुआं या ग्रीनहाउस गैसें नहीं निकलतीं।
3. हानियाँ:
• प्रयुक्त रेडियोधर्मी कचरे का सुरक्षित निपटान अत्यंत चुनौतीपूर्ण है।
• दुर्घटना की स्थिति में रेडियोधर्मी रिसाव से भयंकर जन-धन की हानि हो सकती है।
Q5. पवन चक्की (Windmill) द्वारा विद्युत उत्पादन के सिद्धांत, कार्यप्रणाली और पवन ऊर्जा की सीमाओं का विस्तार से वर्णन करें।
विस्तृत उत्तर देखें
1. सिद्धांत एवं कार्यप्रणाली:
पवन चक्की गतिशील वायु की गतिज ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा और फिर विद्युत ऊर्जा में बदलती है।
ऊँचे टॉवर पर लगी बड़ी पंखुड़ियों से जब तीव्र गति की हवा टकराती है, तो वे घूमने लगती हैं। पंखुड़ियों की यह घूर्णन गति गियर बॉक्स द्वारा बढ़ाई जाती है, जिससे टरबाइन और जनित्र का आर्मेचर तेजी से घूमता है और विद्युत धारा उत्पन्न होती है। कई पवन चक्कियों को जोड़कर पवन ऊर्जा फार्म (Wind Energy Farm) बनाया जाता है।
2. पवन ऊर्जा की सीमाएं:
• पवन ऊर्जा फार्म केवल उन्हीं स्थानों पर लग सकते हैं जहाँ हवा की चाल साल भर न्यूनतम 15 km/h बनी रहे।
• पवन फार्म की स्थापना के लिए बहुत बड़े भूभाग (1 MW के लिए ~2 हेक्टेयर भूमि) की आवश्यकता होती है।
• हवा की अनिश्चितता के कारण बैकअप के रूप में बैटरी या अन्य स्रोतों की आवश्यकता होती है।
पवन चक्की गतिशील वायु की गतिज ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा और फिर विद्युत ऊर्जा में बदलती है।
ऊँचे टॉवर पर लगी बड़ी पंखुड़ियों से जब तीव्र गति की हवा टकराती है, तो वे घूमने लगती हैं। पंखुड़ियों की यह घूर्णन गति गियर बॉक्स द्वारा बढ़ाई जाती है, जिससे टरबाइन और जनित्र का आर्मेचर तेजी से घूमता है और विद्युत धारा उत्पन्न होती है। कई पवन चक्कियों को जोड़कर पवन ऊर्जा फार्म (Wind Energy Farm) बनाया जाता है।
2. पवन ऊर्जा की सीमाएं:
• पवन ऊर्जा फार्म केवल उन्हीं स्थानों पर लग सकते हैं जहाँ हवा की चाल साल भर न्यूनतम 15 km/h बनी रहे।
• पवन फार्म की स्थापना के लिए बहुत बड़े भूभाग (1 MW के लिए ~2 हेक्टेयर भूमि) की आवश्यकता होती है।
• हवा की अनिश्चितता के कारण बैकअप के रूप में बैटरी या अन्य स्रोतों की आवश्यकता होती है।
[ यहाँ पवन चक्की का संरचनात्मक आरेख रहेगा ]
Q6. सौर सेल (Solar Cell) तथा सौर पैनल (Solar Panel) के कार्य सिद्धांत, निर्माण सामग्री और व्यावहारिक उपयोगों का विस्तार से वर्णन करें।
विस्तृत उत्तर देखें
1. कार्य सिद्धांत:
सौर सेल एक ऐसी अर्धचालक युक्ति है जो प्रकाश-वैद्युत प्रभाव (Photovoltaic Effect) के सिद्धांत पर कार्य करती है। जब सूर्य का प्रकाश (फोटॉन) सिलिकॉन जैसे अर्धचालक पर आपतित होता है, तो इसमें इलेक्ट्रॉन गतिशील हो जाते हैं और सौर ऊर्जा सीधे विद्युत ऊर्जा में रूपांतरित हो जाती है। एक प्रारूपिक सौर सेल लगभग 0.5 से 1 V का विभवांतर तथा लगभग 0.7 W विद्युत शक्ति उत्पन्न करता है।
2. निर्माण सामग्री:
• सौर सेल बनाने के लिए मुख्य रूप से उच्च शुद्धता वाले सिलिकॉन (Silicon) और गैलियम का उपयोग होता है।
• कई सौर सेलों को आपस में जोड़कर सौर पैनल बनाने के लिए उत्तम चालक के रूप में चांदी (Silver) के तारों का उपयोग किया जाता है।
3. मुख्य उपयोग:
• अंतरिक्ष अन्वेषण यानों, कृत्रिम उपग्रहों और स्पेस स्टेशनों में मुख्य विद्युत स्रोत के रूप में।
• ट्रैफिक सिग्नल, प्रकाश व्यवस्था और दूरदराज के क्षेत्रों में सोलर वाटर पंप चलाने में।
• कैलकुलेटर, कलाई घड़ियों तथा इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में।
सौर सेल एक ऐसी अर्धचालक युक्ति है जो प्रकाश-वैद्युत प्रभाव (Photovoltaic Effect) के सिद्धांत पर कार्य करती है। जब सूर्य का प्रकाश (फोटॉन) सिलिकॉन जैसे अर्धचालक पर आपतित होता है, तो इसमें इलेक्ट्रॉन गतिशील हो जाते हैं और सौर ऊर्जा सीधे विद्युत ऊर्जा में रूपांतरित हो जाती है। एक प्रारूपिक सौर सेल लगभग 0.5 से 1 V का विभवांतर तथा लगभग 0.7 W विद्युत शक्ति उत्पन्न करता है।
2. निर्माण सामग्री:
• सौर सेल बनाने के लिए मुख्य रूप से उच्च शुद्धता वाले सिलिकॉन (Silicon) और गैलियम का उपयोग होता है।
• कई सौर सेलों को आपस में जोड़कर सौर पैनल बनाने के लिए उत्तम चालक के रूप में चांदी (Silver) के तारों का उपयोग किया जाता है।
3. मुख्य उपयोग:
• अंतरिक्ष अन्वेषण यानों, कृत्रिम उपग्रहों और स्पेस स्टेशनों में मुख्य विद्युत स्रोत के रूप में।
• ट्रैफिक सिग्नल, प्रकाश व्यवस्था और दूरदराज के क्षेत्रों में सोलर वाटर पंप चलाने में।
• कैलकुलेटर, कलाई घड़ियों तथा इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में।
[ यहाँ सौर पैनल एवं सिलिकॉन सेल की आंतरिक संरचना का आरेख रहेगा ]
Q7. महासागरों से प्राप्त होने वाली विभिन्न ऊर्जाओं (ज्वारीय, तरंग और OTEC ऊर्जा) का विस्तृत तुलनात्मक विवरण दें।
विस्तृत उत्तर देखें
महासागरीय ऊर्जा के तीन प्रमुख रूप:
1. ज्वारीय ऊर्जा (Tidal Energy):
• उत्पत्ति का कारण: पृथ्वी पर चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव के कारण समुद्र के जलस्तर का चढ़ना (ज्वार) और गिरना (भाटा)।
• दोहन विधि: समुद्र के संकरे मुहाने पर बांध बनाकर टरबाइन द्वारा विद्युत बनाई जाती है।
• सीमा: बांध बनाने के लिए उपयुक्त संकीर्ण खाड़ियां बहुत सीमित हैं।
2. तरंग ऊर्जा (Wave Energy):
• उत्पत्ति का कारण: समुद्र की सतह पर तेज चलने वाली पवनों द्वारा जल में उत्पन्न होने वाली विशाल लहरें।
• दोहन विधि: तैरते हुए विशेष उपकरणों द्वारा लहरों की गतिज ऊर्जा से टरबाइन घुमाकर ऊर्जा प्राप्त की जाती है।
• सीमा: यह केवल वहीं व्यावहारिक है जहाँ बहुत तेज और निरंतर लहरें उठती हों।
3. महासागरीय तापीय ऊर्जा (OTEC):
• उत्पत्ति का कारण: समुद्र की सतह के गर्म जल और 2 km गहराई के ठंडे जल के तापमान में अंतर (न्यूनतम 20°C)।
• दोहन विधि: सतह के गर्म पानी से अमोनिया द्रव को उबालकर वाष्प से टरबाइन चलाई जाती है, फिर ठंडे पानी से उसे संघनित किया जाता है।
• सीमा: संयंत्र की स्थापना लागत बहुत अधिक और तकनीकी रूप से जटिल है।
1. ज्वारीय ऊर्जा (Tidal Energy):
• उत्पत्ति का कारण: पृथ्वी पर चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव के कारण समुद्र के जलस्तर का चढ़ना (ज्वार) और गिरना (भाटा)।
• दोहन विधि: समुद्र के संकरे मुहाने पर बांध बनाकर टरबाइन द्वारा विद्युत बनाई जाती है।
• सीमा: बांध बनाने के लिए उपयुक्त संकीर्ण खाड़ियां बहुत सीमित हैं।
2. तरंग ऊर्जा (Wave Energy):
• उत्पत्ति का कारण: समुद्र की सतह पर तेज चलने वाली पवनों द्वारा जल में उत्पन्न होने वाली विशाल लहरें।
• दोहन विधि: तैरते हुए विशेष उपकरणों द्वारा लहरों की गतिज ऊर्जा से टरबाइन घुमाकर ऊर्जा प्राप्त की जाती है।
• सीमा: यह केवल वहीं व्यावहारिक है जहाँ बहुत तेज और निरंतर लहरें उठती हों।
3. महासागरीय तापीय ऊर्जा (OTEC):
• उत्पत्ति का कारण: समुद्र की सतह के गर्म जल और 2 km गहराई के ठंडे जल के तापमान में अंतर (न्यूनतम 20°C)।
• दोहन विधि: सतह के गर्म पानी से अमोनिया द्रव को उबालकर वाष्प से टरबाइन चलाई जाती है, फिर ठंडे पानी से उसे संघनित किया जाता है।
• सीमा: संयंत्र की स्थापना लागत बहुत अधिक और तकनीकी रूप से जटिल है।
Q8. भू-तापीय ऊर्जा (Geothermal Energy) के उत्पादन की वैज्ञानिक विधि, इसके लाभ एवं सीमाओं की विस्तृत विवेचना करें।
विस्तृत उत्तर देखें
1. वैज्ञानिक विधि एवं कार्यप्रणाली:
पृथ्वी के गर्भ में होने वाली रेडियोधर्मी प्रक्रियाओं और उच्च दाब के कारण आंतरिक चट्टानें पिघलकर मैग्मा बन जाती हैं। यह मैग्मा जब ऊपर उठकर कुछ भूगर्भीय क्षेत्रों (तप्त स्थलों / Hot Spots) में फंस जाता है, तो भूमिगत जल इसके संपर्क में आकर अत्यधिक उच्च दाब वाली भाप (Steam) में बदल जाता है।
चट्टानों में गहराई तक पाइप डालकर इस उच्च दाबित भाप को बाहर निकाला जाता है और यह भाप सीधे जनित्र से जुड़ी टरबाइन को घुमाती है, जिससे विद्युत उत्पन्न होती है।
2. प्रमुख लाभ:
• यह 24 घंटे लगातार उपलब्ध रहने वाला एक स्वच्छ और प्रदूषण-रहित ऊर्जा स्रोत है।
• इसका संचालन मौसम (धूप, बारिश, हवा) पर निर्भर नहीं करता।
3. सीमाएं एवं चुनौतियां:
• व्यापारिक स्तर पर दोहन के योग्य तप्त स्थल दुनिया में बहुत कम स्थानों (जैसे न्यूजीलैंड, USA) पर ही उपलब्ध हैं।
• गहराई तक ड्रिलिंग करने की प्रारंभिक लागत अत्यधिक होती है।
पृथ्वी के गर्भ में होने वाली रेडियोधर्मी प्रक्रियाओं और उच्च दाब के कारण आंतरिक चट्टानें पिघलकर मैग्मा बन जाती हैं। यह मैग्मा जब ऊपर उठकर कुछ भूगर्भीय क्षेत्रों (तप्त स्थलों / Hot Spots) में फंस जाता है, तो भूमिगत जल इसके संपर्क में आकर अत्यधिक उच्च दाब वाली भाप (Steam) में बदल जाता है।
चट्टानों में गहराई तक पाइप डालकर इस उच्च दाबित भाप को बाहर निकाला जाता है और यह भाप सीधे जनित्र से जुड़ी टरबाइन को घुमाती है, जिससे विद्युत उत्पन्न होती है।
2. प्रमुख लाभ:
• यह 24 घंटे लगातार उपलब्ध रहने वाला एक स्वच्छ और प्रदूषण-रहित ऊर्जा स्रोत है।
• इसका संचालन मौसम (धूप, बारिश, हवा) पर निर्भर नहीं करता।
3. सीमाएं एवं चुनौतियां:
• व्यापारिक स्तर पर दोहन के योग्य तप्त स्थल दुनिया में बहुत कम स्थानों (जैसे न्यूजीलैंड, USA) पर ही उपलब्ध हैं।
• गहराई तक ड्रिलिंग करने की प्रारंभिक लागत अत्यधिक होती है।
Q9. पारंपरिक ऊर्जा स्रोत (Fossil Fuels) तथा गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोत (Alternative Sources) में विस्तृत तुलनात्मक अंतर स्पष्ट करें।
विस्तृत उत्तर देखें
पारंपरिक एवं गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों की तुलना:
• उपयोग का इतिहास: पारंपरिक स्रोतों (कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, लकड़ी) का उपयोग मानव सदियों से करता आ रहा है, जबकि गैर-पारंपरिक स्रोतों (सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायोगैस, नाभिकीय ऊर्जा) का उपयोग आधुनिक तकनीक के विकास के बाद हाल के दशकों में शुरू हुआ है।
• उपलब्धता एवं प्रकृति: अधिकांश पारंपरिक स्रोत अनवीकरणीय हैं और इनके भंडार तेजी से समाप्त हो रहे हैं, जबकि अधिकांश गैर-पारंपरिक स्रोत नवीकरणीय तथा असीम हैं।
• पर्यावरणीय प्रभाव: पारंपरिक स्रोतों के दहन से भारी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और राख निकलती है जिससे वायु प्रदूषण तथा ग्लोबल वार्मिंग होती है। इसके विपरीत गैर-पारंपरिक स्रोत पर्यावरण-अनुकूल और हरित ऊर्जा (Green Energy) प्रदान करते हैं।
• प्रारंभिक लागत एवं संचालन: पारंपरिक संयंत्रों की स्थापना तकनीक सरल है, जबकि गैर-पारंपरिक स्रोतों (जैसे सोलर पार्क या पवन फार्म) की स्थापना में आधुनिक तकनीक और अधिक प्रारंभिक पूंजी की आवश्यकता होती है।
• उपयोग का इतिहास: पारंपरिक स्रोतों (कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, लकड़ी) का उपयोग मानव सदियों से करता आ रहा है, जबकि गैर-पारंपरिक स्रोतों (सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायोगैस, नाभिकीय ऊर्जा) का उपयोग आधुनिक तकनीक के विकास के बाद हाल के दशकों में शुरू हुआ है।
• उपलब्धता एवं प्रकृति: अधिकांश पारंपरिक स्रोत अनवीकरणीय हैं और इनके भंडार तेजी से समाप्त हो रहे हैं, जबकि अधिकांश गैर-पारंपरिक स्रोत नवीकरणीय तथा असीम हैं।
• पर्यावरणीय प्रभाव: पारंपरिक स्रोतों के दहन से भारी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और राख निकलती है जिससे वायु प्रदूषण तथा ग्लोबल वार्मिंग होती है। इसके विपरीत गैर-पारंपरिक स्रोत पर्यावरण-अनुकूल और हरित ऊर्जा (Green Energy) प्रदान करते हैं।
• प्रारंभिक लागत एवं संचालन: पारंपरिक संयंत्रों की स्थापना तकनीक सरल है, जबकि गैर-पारंपरिक स्रोतों (जैसे सोलर पार्क या पवन फार्म) की स्थापना में आधुनिक तकनीक और अधिक प्रारंभिक पूंजी की आवश्यकता होती है।
Q10. ऊर्जा संकट के प्रमुख कारण क्या हैं? इसके स्थायी समाधान के लिए राष्ट्रीय एवं व्यक्तिगत स्तर पर क्या कदम उठाए जाने चाहिए?
विस्तृत उत्तर देखें
1. ऊर्जा संकट के प्रमुख कारण:
• जनसंख्या वृद्धि, शहरीकरण तथा तीव्र औद्योगिकीकरण के कारण प्रति व्यक्ति ऊर्जा उपभोग में बेतहाशा वृद्धि।
• जीवाश्म ईंधनों (कोयला, कच्चा तेल) के सीमित प्राकृतिक भंडारों का अंधाधुंध दोहन और उनका शीघ्र समाप्त होने की कगार पर पहुँचना।
• दैनिक जीवन तथा परिवहन में ऊर्जा का अनावश्यक अपव्यय और अप्रभावी तकनीक का उपयोग।
2. समाधान हेतु आवश्यक रणनीतियाँ:
• अक्षय ऊर्जा को प्राथमिकता: राष्ट्रीय ग्रिड में सौर, पवन और जैव ऊर्जा की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ाना तथा इन पर सब्सिडी देना।
• ऊर्जा दक्षता (Energy Efficiency): उद्योगों और घरों में 5-स्टार रेटेड तथा इनवर्टर आधारित ऊर्जा-दक्ष उपकरणों का प्रयोग।
• सार्वजनिक परिवहन का उपयोग: व्यक्तिगत वाहनों के स्थान पर इलेक्ट्रिक ट्रेनों, मेट्रो और बसों का अधिकाधिक उपयोग करना।
• व्यक्तिगत जागरूकता: अनावश्यक पंखे, लाइट और एसी बंद रखने की आदत बनाना तथा ऊर्जा संरक्षण को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना।
• जनसंख्या वृद्धि, शहरीकरण तथा तीव्र औद्योगिकीकरण के कारण प्रति व्यक्ति ऊर्जा उपभोग में बेतहाशा वृद्धि।
• जीवाश्म ईंधनों (कोयला, कच्चा तेल) के सीमित प्राकृतिक भंडारों का अंधाधुंध दोहन और उनका शीघ्र समाप्त होने की कगार पर पहुँचना।
• दैनिक जीवन तथा परिवहन में ऊर्जा का अनावश्यक अपव्यय और अप्रभावी तकनीक का उपयोग।
2. समाधान हेतु आवश्यक रणनीतियाँ:
• अक्षय ऊर्जा को प्राथमिकता: राष्ट्रीय ग्रिड में सौर, पवन और जैव ऊर्जा की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ाना तथा इन पर सब्सिडी देना।
• ऊर्जा दक्षता (Energy Efficiency): उद्योगों और घरों में 5-स्टार रेटेड तथा इनवर्टर आधारित ऊर्जा-दक्ष उपकरणों का प्रयोग।
• सार्वजनिक परिवहन का उपयोग: व्यक्तिगत वाहनों के स्थान पर इलेक्ट्रिक ट्रेनों, मेट्रो और बसों का अधिकाधिक उपयोग करना।
• व्यक्तिगत जागरूकता: अनावश्यक पंखे, लाइट और एसी बंद रखने की आदत बनाना तथा ऊर्जा संरक्षण को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना।
