भौतिकी (Physics) : संपूर्ण अध्याय - महत्वपूर्ण अंतर (Differences)
Class 10th Science • Top 20 VVI 5-Point Comparison Tables
Q1. वास्तविक प्रतिबिंब (Real Image) और आभासी/काल्पनिक प्रतिबिंब (Virtual Image) में पाँच मुख्य अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर देखें
| क्र.सं. | वास्तविक प्रतिबिंब (Real Image) | आभासी / काल्पनिक प्रतिबिंब (Virtual Image) |
|---|---|---|
| 1. | यह प्रकाश किरणों के वास्तविक कटान से बनता है। | यह किरणों के पीछे बढ़ाने पर काल्पनिक कटान से बनता है। |
| 2. | इसे पर्दे (Screen) पर प्राप्त किया जा सकता है। | इसे पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता। |
| 3. | यह वस्तु की तुलना में हमेशा उल्टा (Inverted) बनता है। | यह वस्तु की तुलना में हमेशा सीधा (Erect) बनता है। |
| 4. | दर्पण के सामने और लेंस के दूसरी तरफ बनता है। | दर्पण के पीछे और लेंस के उसी ओर बनता है। |
| 5. | इसका आवर्धन (m) ऋणात्मक (-) होता है। | इसका आवर्धन (m) धनात्मक (+) होता है। |
Q2. अवतल दर्पण (Concave Mirror) और उत्तल दर्पण (Convex Mirror) में पाँच मुख्य अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर देखें
| क्र.सं. | अवतल दर्पण (Concave Mirror) | उत्तल दर्पण (Convex Mirror) |
|---|---|---|
| 1. | इसका परावर्तक पृष्ठ अंदर की ओर धंसा होता है। | इसका परावर्तक पृष्ठ बाहर की ओर उभरा होता है। |
| 2. | इसकी फोकस दूरी (f) ऋणात्मक (-) होती है। | इसकी फोकस दूरी (f) धनात्मक (+) होती है। |
| 3. | यह वास्तविक और आभासी दोनों प्रतिबिंब बनाता है। | यह हमेशा केवल सीधा, आभासी और छोटा प्रतिबिंब बनाता है। |
| 4. | इसे अभिसारी दर्पण (Converging Mirror) कहते हैं। | इसे अपसारी दर्पण (Diverging Mirror) कहते हैं। |
| 5. | उपयोग: हजामती दर्पण, गाड़ी की हेडलाइट, सोलर कुकर। | उपयोग: वाहनों में साइड मिरर (Side Mirror) के रूप में। |
Q3. उत्तल लेंस (Convex Lens) और अवतल लेंस (Concave Lens) में पाँच मुख्य अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर देखें
| क्र.सं. | उत्तल लेंस (Convex Lens) | अवतल लेंस (Concave Lens) |
|---|---|---|
| 1. | यह बीच में मोटा तथा किनारों पर पतला होता है। | यह बीच में पतला तथा किनारों पर मोटा होता है। |
| 2. | इसे अभिसारी लेंस (Converging Lens) कहते हैं। | इसे अपसारी लेंस (Diverging Lens) कहते हैं। |
| 3. | इसकी फोकस दूरी (f) व क्षमता (P) धनात्मक (+) होती है। | इसकी फोकस दूरी (f) व क्षमता (P) ऋणात्मक (-) होती है। |
| 4. | यह वास्तविक और आभासी दोनों प्रतिबिंब बनाता है। | यह हमेशा केवल सीधा, आभासी और छोटा प्रतिबिंब बनाता है। |
| 5. | उपयोग: दूर-दृष्टि दोष के निवारण में, सूक्ष्मदर्शी में। | उपयोग: निकट-दृष्टि दोष के निवारण के चश्मे में। |
Q4. निकट-दृष्टि दोष (Myopia) और दूर-दृष्टि दोष (Hypermetropia) में पाँच मुख्य अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर देखें
| क्र.सं. | निकट-दृष्टि दोष (Myopia) | दूर-दृष्टि दोष (Hypermetropia) |
|---|---|---|
| 1. | निकट की वस्तु साफ दिखती है, पर दूर की वस्तु साफ नहीं दिखती। | दूर की वस्तु साफ दिखती है, पर निकट की वस्तु साफ नहीं दिखती। |
| 2. | प्रतिबिंब रेटिना के आगे (पहले) ही बन जाता है। | प्रतिबिंब रेटिना के पीछे बनता है। |
| 3. | नेत्र गोलक का आकार लंबा (बड़ा) हो जाता है। | नेत्र गोलक का आकार छोटा हो जाता है। |
| 4. | नेत्र लेंस की फोकस दूरी कम (वक्रता अधिक) हो जाती है। | नेत्र लेंस की फोकस दूरी अत्यधिक बढ़ जाती है। |
| 5. | निवारण के लिए अवतल लेंस (Concave Lens) का चश्मा लगाते हैं। | निवारण के लिए उत्तल लेंस (Convex Lens) का चश्मा लगाते हैं। |
Q5. एमीटर (Ammeter) और वोल्टमीटर (Voltmeter) में पाँच मुख्य अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर देखें
| क्र.सं. | एमीटर (Ammeter) | वोल्टमीटर (Voltmeter) |
|---|---|---|
| 1. | यह परिपथ में विद्युत धारा (Current) को मापता है। | यह दो बिंदुओं के बीच विभवांतर (Voltage) को मापता है। |
| 2. | इसे परिपथ में श्रेणीक्रम (Series) में जोड़ा जाता है। | इसे परिपथ में समांतर क्रम (Parallel) में जोड़ा जाता है। |
| 3. | इसका प्रतिरोध बहुत कम (नगण्य) होता है। | इसका प्रतिरोध बहुत अधिक होता है। |
| 4. | एक आदर्श एमीटर का प्रतिरोध शून्य (0) होता है। | एक आदर्श वोल्टमीटर का प्रतिरोध अनंत (∞) होता है। |
| 5. | इसका पैमाना एम्पियर (A) में अंकित होता है। | इसका पैमाना वोल्ट (V) में अंकित होता है। |
Q6. प्रतिरोधों के श्रेणीक्रम संयोजन (Series) और समांतर क्रम संयोजन (Parallel) में पाँच मुख्य अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर देखें
| क्र.सं. | श्रेणीक्रम संयोजन (Series Connection) | समांतर / पार्श्वक्रम संयोजन (Parallel Connection) |
|---|---|---|
| 1. | सभी प्रतिरोधों में समान विद्युत धारा (I) बहती है। | सभी प्रतिरोधों के सिरों पर समान विभवांतर (V) रहता है। |
| 2. | प्रत्येक प्रतिरोध के सिरों पर विभवांतर अलग-अलग होता है। | प्रत्येक प्रतिरोधक में धारा का मान अलग-अलग होता है। |
| 3. | समतुल्य प्रतिरोध: Rs = R₁ + R₂ + R₃ (बढ़ता है)। | समतुल्य प्रतिरोध: 1/Rp = 1/R₁ + 1/R₂ + 1/R₃ (घटता है)। |
| 4. | यदि एक उपकरण खराब हो जाए, तो सभी बंद हो जाते हैं। | एक उपकरण खराब होने पर भी बाकी सुचारू रूप से चलते रहते हैं। |
| 5. | उपयोग: त्योहारों की झालर (डेकोरेशन लाइट) में। | उपयोग: घरेलू बिजली वायरिंग में। |
Q7. दिष्ट धारा (DC) और प्रत्यावर्ती धारा (AC) में पाँच मुख्य अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर देखें
| क्र.सं. | दिष्ट धारा (Direct Current - DC) | प्रत्यावर्ती धारा (Alternating Current - AC) |
|---|---|---|
| 1. | इस धारा का मान और दिशा हमेशा स्थिर (एकदिशीय) रहती है। | इस धारा का परिमाण और दिशा निश्चित समय पर बदलती रहती है। |
| 2. | इसकी आवृत्ति (Frequency) शून्य (0 Hz) होती है। | भारत में इसकी आवृत्ति 50 Hz (50 चक्र/सेकंड) होती है। |
| 3. | इसे बिना अधिक ऊर्जा हानि के दूर तक नहीं भेजा जा सकता। | ट्रांसफॉर्मर द्वारा इसे बहुत दूर तक आसानी से भेजा जा सकता है। |
| 4. | इसे बैटरी में संचित (Store) किया जा सकता है। | इसे सीधे बैटरी में संचित नहीं किया जा सकता। |
| 5. | स्रोत: सेल, बैटरी, डीसी जनरेटर। | स्रोत: विद्युत पावर हाउस, एसी जनरेटर। |
Q8. विद्युत मोटर (Electric Motor) और विद्युत जनरेटर / डायनेमो (Electric Generator) में पाँच मुख्य अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर देखें
| क्र.सं. | विद्युत मोटर (Electric Motor) | विद्युत जनरेटर / डायनेमो (Generator) |
|---|---|---|
| 1. | यह विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलता है। | यह यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है। |
| 2. | यह फ्लेमिंग के वामहस्त (बाएं हाथ) नियम पर कार्य करता है। | यह फ्लेमिंग के दक्षिणहस्त (दाएं हाथ) नियम पर कार्य करता है। |
| 3. | यह विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव के सिद्धांत पर आधारित है। | यह विद्युत चुंबकीय प्रेरण (EMI) के सिद्धांत पर आधारित है। |
| 4. | यह चलाने के लिए विद्युत धारा ग्रहण (खर्च) करता है। | यह चलने पर विद्युत धारा उत्पन्न (पैदा) करता है। |
| 5. | उपयोग: पंखा, वाशिंग मशीन, पानी का पंप। | उपयोग: पावर स्टेशन, शादी-पार्टी में जनरेटर। |
Q9. नवीकरणीय (Renewable) और अनवीकरणीय (Non-Renewable) ऊर्जा स्रोतों में पाँच मुख्य अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर देखें
| क्र.सं. | नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत (Renewable Energy) | अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोत (Non-Renewable Energy) |
|---|---|---|
| 1. | ये असीमित भंडार वाले और कभी न समाप्त होने वाले स्रोत हैं। | इनके भंडार सीमित हैं और ये समय के साथ समाप्त हो जाएंगे। |
| 2. | इनका प्रकृति में लगातार स्वतः पुनर्चक्रण होता रहता है। | इनके निर्माण में करोड़ों वर्ष का समय लगता है। |
| 3. | इनके उपयोग से कोई प्रदूषण या धुआं नहीं फैलता। | इनके जलने से भारी वायु प्रदूषण व ग्लोबल वार्मिंग होती है। |
| 4. | इन्हें पर्यावरण-मित्र (Eco-friendly) ऊर्जा कहते हैं। | इन्हें जीवाश्म व पारंपरिक प्रदूषणकारी ईंधन कहा जाता है। |
| 5. | उदा. सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल विद्युत, बायोगैस। | उदा. कोयला, पेट्रोलियम (डीजल/पेट्रोल), प्राकृतिक गैस। |
Q10. लघुपथन (Short Circuit) और अतिभारण (Overloading) में पाँच मुख्य अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर देखें
| क्र.सं. | लघुपथन (Short Circuit) | अतिभारण (Overloading) |
|---|---|---|
| 1. | विद्युन्मय (गर्म) तार और उदासीन तार के आपस में सीधे छू जाने से होता है। | एक ही सॉकेट से बहुत सारे उच्च शक्ति वाले उपकरण एक साथ चलाने से होता है। |
| 2. | परिपथ का प्रतिरोध लगभग शून्य हो जाता है। | परिपथ का कुल प्रतिरोध बहुत कम हो जाता है क्योंकि भार बढ़ जाता है। |
| 3. | धारा का मान अचानक अत्यधिक (खतरनाक रूप से) बढ़ जाता है। | परिपथ से बहने वाली धारा सुरक्षित सीमा से अधिक हो जाती है। |
| 4. | तारों में चिंगारी निकलती है और आग लगने का खतरा तुरंत होता है। | तार धीरे-धीरे गर्म होकर पिघलते हैं और वायरिंग जल सकती है। |
| 5. | बचाव: तारों पर अच्छा इंसुलेशन और फ्यूज / MCB लगाना। | बचाव: एक सॉकेट पर एक ही भारी उपकरण चलाना व सही क्षमता का फ्यूज लगाना। |
Q11. प्रकाश का परावर्तन (Reflection) और प्रकाश का अपवर्तन (Refraction) में पाँच मुख्य अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर देखें
| क्र.सं. | प्रकाश का परावर्तन (Reflection of Light) | प्रकाश का अपवर्तन (Refraction of Light) |
|---|---|---|
| 1. | प्रकाश किरण किसी सतह से टकराकर उसी माध्यम में वापस लौटती है। | प्रकाश किरण एक माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में प्रवेश करती है। |
| 2. | इसमें प्रकाश की चाल (Speed) और तरंगदैर्ध्य नहीं बदलती। | माध्यम बदलने से प्रकाश की चाल और तरंगदैर्ध्य बदल जाती है। |
| 3. | आपतन कोण हमेशा परावर्तन कोण के बराबर होता है (∠i = ∠r)। | आपतन कोण और अपवर्तन कोण सामान्यतः बराबर नहीं होते (∠i ≠ ∠r)। |
| 4. | यह मुख्य रूप से दर्पणों एवं चमकदार सतहों पर होता है। | यह लेंस, कांच, जल एवं प्रिज्म में होता है। |
| 5. | नियम: परावर्तन के नियम लागू होते हैं। | नियम: स्नेल का नियम (sin i / sin r = μ) लागू होता है। |
Q12. विभव / विभवांतर (Potential Difference) और विद्युत वाहक बल (EMF) में पाँच मुख्य अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर देखें
| क्र.सं. | विभवांतर (Potential Difference - V) | विद्युत वाहक बल (EMF - E) |
|---|---|---|
| 1. | परिपथ के किन्हीं दो बिंदुओं के बीच विभव का अंतर है। | खुले परिपथ में सेल के दोनों ध्रुवों के बीच का अधिकतम विभव अंतर है। |
| 2. | यह परिपथ में धारा बहते समय (बंद परिपथ में) मापा जाता है। | जब सेल से कोई धारा न ली जा रही हो (खुले परिपथ में) तब मापा जाता है। |
| 3. | इसका मान EMF से हमेशा कम होता है (डिस्चार्जिंग के समय)। | इसका मान विभवांतर से हमेशा अधिक या बराबर होता है। |
| 4. | यह परिपथ के प्रतिरोध पर निर्भर करता है। | यह बाहरी परिपथ के प्रतिरोध पर निर्भर नहीं करता। |
| 5. | यह एक प्रभाव (Effect / कार्य) है। | यह धारा प्रवाह का मूल कारण (Cause / स्रोत) है। |
Q13. प्रतिरोध (Resistance) और प्रतिरोधकता / विशिष्ट प्रतिरोध (Resistivity) में पाँच मुख्य अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर देखें
| क्र.सं. | प्रतिरोध (Resistance - R) | प्रतिरोधकता (Resistivity - ρ) |
|---|---|---|
| 1. | चालक द्वारा विद्युत धारा के प्रवाह में डाली गई कुल रुकावट है। | इकाई लंबाई व इकाई अनुप्रस्थ काट वाले चालक का प्रतिरोध है। |
| 2. | इसका SI मात्रक ओम (Ω) होता है। | इसका SI मात्रक ओम-मीटर (Ω·m) होता है। |
| 3. | तार की लंबाई (l) बढ़ाने पर प्रतिरोध बढ़ता है। | यह तार की लंबाई पर निर्भर नहीं करती। |
| 4. | तार की मोटाई (A) बढ़ाने पर प्रतिरोध घटता है। | यह तार के अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल पर निर्भर नहीं करती। |
| 5. | सूत्र: R = V / I या R = ρ(l/A) | सूत्र: ρ = (R × A) / l (केवल पदार्थ की प्रकृति व ताप पर निर्भर) |
Q14. फ्लेमिंग के वामहस्त नियम (Left-Hand Rule) और दक्षिणहस्त नियम (Right-Hand Rule) में पाँच मुख्य अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर देखें
| क्र.सं. | फ्लेमिंग का वामहस्त नियम (Left Hand) | फ्लेमिंग का दक्षिणहस्त नियम (Right Hand) |
|---|---|---|
| 1. | चालक पर लगने वाले बल (गति) की दिशा ज्ञात करने के लिए। | प्रेरित विद्युत धारा (Induced Current) की दिशा ज्ञात करने के लिए। |
| 2. | यह मुख्य रूप से विद्युत मोटर पर लागू होता है। | यह मुख्य रूप से विद्युत जनरेटर (डायनेमो) पर लागू होता है। |
| 3. | इसमें बाएं हाथ के अंगूठे, तर्जनी व मध्यमा का प्रयोग होता है। | इसमें दाएं हाथ के अंगूठे, तर्जनी व मध्यमा का प्रयोग होता है। |
| 4. | अंगूठा चालक की गति / आरोपित बल की दिशा (F) बताता है। | अंगूठा चालक की गति की दिशा में पहले से रखा जाता है। |
| 5. | सिद्धांत: चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही चालक पर बल। | सिद्धांत: विद्युत चुंबकीय प्रेरण (फैराडे का नियम)। |
Q15. स्थायी चुंबक (Permanent Magnet) और विद्युत चुंबक (Electromagnet) में पाँच मुख्य अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर देखें
| क्र.सं. | स्थायी चुंबक (Permanent Magnet) | विद्युत चुंबक / अस्थायी (Electromagnet) |
|---|---|---|
| 1. | इसका चुंबकत्व स्थायी रहता है और आसानी से समाप्त नहीं होता। | धारा बंद करते ही इसका चुंबकत्व तुरंत समाप्त हो जाता है। |
| 2. | इसकी चुंबकीय शक्ति निश्चित एवं कमजोर होती है। | धारा बढ़ाकर इसकी शक्ति को अत्यधिक शक्तिशाली बना सकते हैं। |
| 3. | इसके ध्रुवों (N और S) की स्थिति बदली नहीं जा सकती। | धारा की दिशा बदलकर इसके ध्रुवों को आसानी से बदला जा सकता है। |
| 4. | यह मुख्य रूप से इस्पात (Steel) या एल्निको से बनता है। | यह नरम लोहे (Soft Iron) के क्रोड पर तार लपेटकर बनता है। |
| 5. | उपयोग: लाउडस्पीकर, दिक्सूचक, गैल्वेनोमीटर। | उपयोग: विद्युत घंटी, क्रेन (भारी लोहा उठाने में), मोटर। |
Q16. प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण (Dispersion) और प्रकाश का प्रकीर्णन (Scattering) में पाँच मुख्य अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर देखें
| क्र.सं. | प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण (Dispersion) | प्रकाश का प्रकीर्णन (Scattering) |
|---|---|---|
| 1. | श्वेत प्रकाश का सात रंगों के स्पेक्ट्रम में टूटना है। | धूल व वायु के कणों द्वारा प्रकाश को चारों दिशाओं में फैलाना है। |
| 2. | यह मुख्य रूप से प्रिज्म या पानी की बूंदों द्वारा होता है। | यह वायुमंडल में मौजूद धूलकणों एवं गैस अणुओं द्वारा होता है। |
| 3. | कारण: विभिन्न रंगों के प्रकाश का अपवर्तनांक व चाल अलग होना। | कारण: प्रकाश की तरंगदैर्ध्य कणों के आकार से तुलनात्मक होना। |
| 4. | बैंगनी रंग का झुकाव सर्वाधिक और लाल का सबसे कम होता है। | नीले रंग का प्रकीर्णन सबसे अधिक और लाल का सबसे कम होता है। |
| 5. | प्राकृतिक उदाहरण: इंद्रधनुष (Rainbow) का बनना। | प्राकृतिक उदाहरण: आकाश का नीला दिखना, सूर्योदय पर लाल दिखना। |
Q17. चालक (Conductor), अर्धचालक (Semiconductor) और अचालक / कुचालक (Insulator) में पाँच मुख्य अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर देखें
| क्र.सं. | चालक (Conductor) | अर्धचालक (Semiconductor) | अचालक / कुचालक (Insulator) |
|---|---|---|---|
| 1. | विद्युत धारा आसानी से बहती है। | चालकता चालक और कुचालक के बीच होती है। | विद्युत धारा बिल्कुल नहीं बहती। |
| 2. | प्रतिरोध बहुत कम (नगण्य) होता है। | प्रतिरोध मध्यम स्तर का होता है। | प्रतिरोध अत्यधिक (अनंत) होता है। |
| 3. | मुक्त इलेक्ट्रॉन अत्यधिक होते हैं। | सामान्य ताप पर बहुत कम मुक्त इलेक्ट्रॉन। | मुक्त इलेक्ट्रॉन नहीं होते। |
| 4. | ताप बढ़ाने पर प्रतिरोध बढ़ता है। | ताप बढ़ाने पर प्रतिरोध घटता है। | ताप का विशेष प्रभाव नहीं पड़ता। |
| 5. | उदा. चांदी (सर्वश्रेष्ठ), तांबा, एल्युमिनियम। | उदा. सिलिकॉन (Si), जर्मेनियम (Ge)। | उदा. रबर, प्लास्टिक, सूखी लकड़ी, कांच। |
Q18. नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) और नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) में पाँच मुख्य अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर देखें
| क्र.सं. | नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) | नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) |
|---|---|---|
| 1. | एक भारी नाभिक दो हल्के नाभिकों में टूटता है। | दो हल्के नाभिक आपस में जुड़कर एक भारी नाभिक बनाते हैं। |
| 2. | यह सामान्य ताप और दाब पर कराया जा सकता है। | इसके लिए अत्यधिक उच्च ताप (10⁷ K) व उच्च दाब चाहिए। |
| 3. | प्रति इकाई द्रव्यमान संलयन की तुलना में कम ऊर्जा निकलती है। | इसमें विखंडन की तुलना में अत्यधिक प्रचंड ऊर्जा निकलती है। |
| 4. | यह परमाणु भट्टी में नियंत्रित किया जा सकता है। | इसे नियंत्रित करना वर्तमान में अत्यंत कठिन है। |
| 5. | उदाहरण: परमाणु बम, नाभिकीय विद्युत गृह (यूरेनियम-235)। | उदाहरण: सूर्य व तारों की ऊर्जा का स्रोत, हाइड्रोजन बम। |
Q19. सौर सेल (Solar Cell) और सोलर कुकर (Solar Cooker) में पाँच मुख्य अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर देखें
| क्र.सं. | सौर सेल (Solar Cell / Panel) | सोलर कुकर (Solar Cooker) |
|---|---|---|
| 1. | यह सौर ऊर्जा को सीधे विद्युत ऊर्जा में बदलता है। | यह सौर ऊर्जा को ऊष्मा ऊर्जा (Heat) में बदलता है। |
| 2. | यह सिलिकॉन और चांदी जैसे अर्धचालकों से बना होता है। | यह काले बक्से, समतल दर्पण और कांच के ढक्कन से बना होता है। |
| 3. | उत्पन्न ऊर्जा को बैटरी में संचित किया जा सकता है। | इसकी ऊष्मा को संचित नहीं किया जा सकता (तुरंत उपयोग होता है)। |
| 4. | सिद्धांत: प्रकाश-विद्युत प्रभाव (Photovoltaic effect)। | सिद्धांत: ग्रीनहाउस प्रभाव (कांच ऊष्मा को रोककर रखता है)। |
| 5. | उपयोग: कृत्रिम उपग्रहों में, स्ट्रीट लाइट, टीवी चलाने में। | उपयोग: दाल, चावल, सब्जियां उबालने व पकाने में। |
Q20. प्राथमिक इंद्रधनुष (Primary Rainbow) और द्वितीयक इंद्रधनुष (Secondary Rainbow) में पाँच मुख्य अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर देखें
| क्र.सं. | प्राथमिक इंद्रधनुष (Primary Rainbow) | द्वितीयक इंद्रधनुष (Secondary Rainbow) |
|---|---|---|
| 1. | यह पानी की बूंदों में दो अपवर्तन और एक पूर्ण आंतरिक परावर्तन से बनता है। | यह पानी की बूंदों में दो अपवर्तन और दो पूर्ण आंतरिक परावर्तन से बनता है। |
| 2. | इसमें लाल रंग बाहर (ऊपर) और बैंगनी रंग अंदर (नीचे) होता है। | इसमें बैंगनी रंग बाहर (ऊपर) और लाल रंग अंदर (नीचे) होता है। |
| 3. | यह अधिक चमकीला एवं स्पष्ट दिखाई देता है। | यह प्राथमिक की तुलना में धुंधला और कम चमकीला होता है। |
| 4. | इसकी कोणीय चौड़ाई लगभग 2° (40° से 42°) होती है। | इसकी कोणीय चौड़ाई लगभग 3° (50° से 53°) होती है। |
| 5. | यह द्वितीयक इंद्रधनुष के नीचे स्थित होता है। | यह प्राथमिक इंद्रधनुष के ठीक ऊपर बनता है। |
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